11+ प्यारी गौरैया पर सुंदर कविता | Poem On Sparrow In Hindi

Poem On Sparrow In Hindi :- आज के पोस्ट में प्यारी गौरैया पर बहुत ही सुंदर कविता प्रस्तुत किया गया है। बचपन में तुमने सबसे पहले जो चिड़िया देखी होगी, वह जरूर गौरैया रही होगी. हमारे घर-आंगन, खिड़की व दरवाजे पर बेधड़क फुदकती, चीं-चीं करती गौरैया की संख्या में पिछले कई वर्षों में काफी कमी आयी है।

समय रहते अगर इस प्यारी-सी चिड़िया को बचाने के प्रयास नहीं किये गये तो वह दिन दूर नहीं जब गिद्धों की तरह गौरैया भी इतिहास बन जायेगी और सिर्फ गूगल और किताबों में ही दिखेगी. जरूरत यह है कि इस घरेलू चिड़िया के लिए तुम अपने घर में ऐसा माहौल बनाओ, ताकि यह रूठे नहीं और रोज तुमसे मिलने आयें।

गौरैया की संख्या में कमी के संभावित कारणों में आहार और आवास, मोबाइल फोन टावर्स के रेडिएशन जैसे कारक शामिल हैं. निवास स्थान की क्षति, फसलों में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक की व्यापक उपस्थिति तथा शिकार इनकी कमी के प्रमुख कारण हैं।

हर वर्ष 20 मार्च को दुनियाभर में विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है. गौरैया के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है. गौरैया की लगातार कम होती जा रही संख्या को ध्यान में रख वर्ष 2010 में पहली बार यह दिवस मनाया गया था।

यह बिहार व दिल्ली का राजकीय पक्षी है. ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी ऑफ प्रोटेक्शन ऑफ बर्ड्स ने भारत से लेकर विश्व के विभिन्न हिस्सों में अनुसंधानकर्ताओं द्वारा किये गये अध्ययनों के आधार पर गौरैया को ‘रेड लिस्ट’ में डाला है।

गौरैया

Poem On Sparrow In Hindi

नन्ही सी गौरैया है।

प्यारी सी गौरैया है।

घर – आँगन में फुदक रही,

भोली सी गौरैया है।

चिचियाती होते ही भोर।

चींची, चींची करती शोर।

कभी बैठ जाती मुड़ेर पर,

जाती कभी वाटिका ओर।

बिस्किट पाकर, खाती कुरै।

झट से उड़ जाती है फुर्र।

छोटी मुन्नी नटखट है,

उसे देख कर देती हुई।

मैं देता दाना-पानी।

खुश होती चिड़िया रानी।

छज्जे में घोंसला बना,

अंडों पर है निगरानी।

गौरीशंकर वैश्य विनम्र

गौरैया

Poem On Sparrow In Hindi

चहका करती घर गौरैया।

दाना खाती हर गौरैया।।

बच्चें चाहें उसे पकड़ना,

हाथ न आती पर गौरैया।

आँगन में फुदका करती है,

अलग रंग की नर गौरैया।

बना घोंसला घर में रहती,

पाकर प्यार निडर गौरैया।

प्यारे-प्यारे अंडे रखती,

अंडों के ऊपर गौरैया।

छोटे बच्चे शोर न करते,

जब हो इधर-उधर गौरैया।

ची-ची, चीं-ची भोजन माँगें,

जब आए लेकर गौरैया।

अम्मा रखतीं दाना-पानी,

बैठे कंधे पर गौरैया।

इसे बचाओ, कारण ढूँढो,

कैसे जाती मर गौरैया।

सन्तोष कुमार सिंह

दादी की प्यारी गौरैया

Poem On Sparrow In Hindi

दादी की प्यारी गौरैया,

खाना खाने आती।

बड़े चाव से दादी उसको,

चावल-दाल खिलाती।

उसके लिए एक प्याले में,

पानी रखा हुआ है।

छुट्टी वाले दिन गौरैया,

खाती मालपुआ है।

ची-ची करके बड़े प्यार से,

बात किया करती है।

दादीजी के आसपास,

दिनभर घूमा करती है।

कभी छेड़ देते हम उसको,

दादी से कह आती।

दादी की प्यारी गौरैया,

हम को डाँट खिलाती।

चक्रधर शुक्ल

गौरैया

Poem On Sparrow In Hindi

आंगन में बैठी गौरैया,

फुदक-फुदक करती ता-थैया।

पांव दबाकर धीरे-धीरे,

गया पकड़ने छिपकर भैया।।

जैसे ही वह पास में आया,

और पकड़ने हाथ बढ़ाया।

चकमा देकर फुर्र हो गई,

बहुत-बहुत भैया पछताया।।

अजय अनुरागी

प्यासी गौरैया

Poem On Sparrow

भूखी-प्यासी गौरैया

दिनभर खोजती रही

मकान के दीवारों में

अनाज के कुछ दाने

मीठी-मीठी पानी की बूंदें

हर बार वह

निराश होकर बैठ जाती

चीं-चीं कर थक जाती

वह कभी नीचे आती

कभी छत पर चढ़ जाती

हर बार आवाज लगाती

जब कभी दिखता मानव

फुदक-फुदक कर चहचहाती

पानी के लिए आवाज लगाती

नितेश कुमार सिन्हा

आओ गौरैया आँगन में

Poem On Sparrow In Hindi

चीं चीं करती गौरैया,

तुम आओ मेरे आँगन में।

फुदको चहको झूम के नाचो,

गाओ मेरे आँगन में।।

छज्जे पर रख दिए हैं मैंने,

पत्ते, टहनी और तिनके।

नीड़ बना लेना तुम यहीं,

सुन्दर सा इनको बुनके।।

चावल, गेहूँ, दाल के दाने,

सुबह शाम दूंगा पानी।

यहीं रहो अपनी बनके,

होगी ना कोई परेशानी।।

मुझको अपना दोस्त बना लो,

संग तुम्हारे खेलूँगा।

सब ही रक्खें ध्यान तुम्हारा,

ऐसा सबसे बोलूँगा।।

दीप्ति सक्सेना

गौरैया

Poem On Sparrow

जैसे हुआ सवेरा

चुपके से आ जाती गौरैया

दबा चोंच में

घास-फूस के तिनके लाती गौरैया।

दादा जी के फोटो के पीछे

घोंसला बनाया है

बड़े मजे से सोकर

उसमें रात बिताती गौरैया।

जगदीश व्योम

गौरैया रानी गौरैया रानी

Poem On Sparrow In Hindi

गौरैया रानी, गौरैया रानी

मेरे स्कूल में आओ न,

देखो बगिया में पड़े-दाने चुग जाओ न।

मेरे मुंडेर पर चहक-चहक कर,

मधुर गीत सुनाओ न।

स्कूल में आकर अपने नन्हें प्यारे बच्चों को,

उड़ना तुम सिखलाओ न।

अपने देश को छोड़कर तुम कहाँ चली गयीं,

फिर आकर अपना घोंसला बनाओ न।

गौरैया रानी, गौरैया रानी,

मेरे स्कूल में आओ न।

फुदक-फुदक कर चहक-चहक कर

सभी को एक साथ सदा खुश रहने का

सबक तुम सिखलाओ न।

मेरी बगिया कितनी सुंदर,

रखा है दाना-पानी,

अपनी भूख मिटाओ न।

गौरैया रानी गौरैया रानी

मेरे स्कूल में आओ न।

नरेंद्र सिंह कुशवाहा

मेरी प्यारी गौरेया

Poem On Sparrow In Hindi

गांव के चौपाल में चहकती गौरैया

मीठे-मीठे गीत सुनाती गौरैया

गुड़िया को धीरे से रिझाती गौरैया

याद आज आती है।

हरे-भरे पेड़ों पर फुदकती गौरैया

घर के मुंडेर पर थिरकती गौरैया

स्मृति में बस जाती है

घर के चौखट पर नन्हीं सी गुड़िया।

पास में फुदकती प्यारी सी चिड़िया

लुका-छिपी का यह खेल क्रम-दर-क्रम बढ़ना

यादों के झरोखे से एक मधुर संगीत सुनाती है

धीरे-धीरे यादें अब अवशेष रह गई।

लुका-छिपी का खेल स्मृति-शेष रह गया।

न रहा गांव, न रहा मुंडेर

गौरैया कहानी के बीच रह गई

गुड़िया अब बड़ी होकर सयानी हुई।

उसके एक मुनिया रानी हुई

जिसे उसने गौरैया की कहानी सुनाई

मुनिया मुस्कराई फिर चिल्लाई

मां गौरैया तो दिखाओ।

कहानी की वास्तविकता तो समझाओ

मुनिया के प्रश्नों पर गुड़िया झुंझलाई

दिल का दर्द आंखों में छलक आया

मुनिया को मोबाइल टावर दिखाया।

फिर उसको धीरे से समझाया

इसमें बैठा है एक भयानक दरिंदा

जिसने छीना हमसे एक प्यारा परिंदा

गौरैया का दुश्मन हमने बनाया।

उसे छाती-पेट से लगाया

उसने छीना है हमारी प्यारी गौरैया

रह गई स्मृतियों में न्यारी गौरैया

गौरैया को यदि बचाना है।

दरिंदे को मिटाना है

नहीं तो कहानियों में रह जाएगी गौरैया

मुनिया के प्रश्नों का उत्तर न दे पाएगी दुनिया।

राकेशधर द्विवेदी


रोज सुबह आती गौरैया

Poem On Sparrow In Hindi

ची -ची, चूं-चूं बोल पपैया

दैया रे दैया, दैया रे दैया

करती करती ता -ता थैया

रोज सुबह आती गोरैया।

फुदकफुदक कर पंख पसारे

जैसे नाचे सोन चिरैया

गाती ऐसे जैसे गवैया

दैया रे दैया, दैया रे दैया।

मन में इक संदेशा लाई,

सूरज चिलकी सिर पे आई।

आलस त्यागो सुस्ती छोड़ो,

मत करो तुम जग हंसाई।

उठरी बहना उठ रे भैया

दैया रे दैया, दैया रे दैया!

बैठ डाल पर गाएं पंछी

सुप्रभात के मंगल गीत

ममता भर रंभाती पल में,

मां बछड़े की मधुरिम प्रीत।

दूध दुहाने मचली गैया

दैया रे दैया, दैया रे दैया!

ची -चीं चूं -चूं बोल पपैया

दैया रे दैया, दैया रे दैया!

शिवचरण सेन “शिवा”

गोरैया कहां गई?

Poem On Sparrow

प्यारी न्यारी सी गौरैया,

ढूंढ रहे हम कहां गई?

कौन देश, परदेश, डगरिया,

चिड़िया रानी जहां गई?

सुबह सवेरे डाली डाली

फुदक फुदक कर उड़ती थी।

ची ची करती चहक निराली,

रस कानों में भरती थी।

गली, मोहल्ला, शहर हमारा

कितना सूना बना गई?

कहां रहे वो पेड़ जहां पर

उसका रेन बसेरा था?

बंद हुए वो कोटर जिनमें

गौरैया का डेरा था।

खिड़की खिड़की लगी जालियां,

किला घरों को बना गई।

नहीं बचा अब दाना पानी

पत्थर के चौबारों में।

रास नहीं आती चिड़िया को

आबो हवा बजारों में।

जंगल की शीतल पुरवइया

शायद उसको उड़ा गई।

उसका कोई ठौर ठिकाना

बस्ती में तैयार करो।

थोड़ा दाना पानी उसका,

आंगन दे हरी द्वार धरो।

फिर शायद आए गौरैया,

लौट वहां से जहां गई।

धीरेन्द्र कुमार जोशी



ओ गौरैया

Poem On

आंगन में चिन-चिन गा जाना,

ओ गौरैया, फिर आ जाना।

गई किधर, गायब तू कब से?

अता-पता भी पूछे किससे?

क्यों रूठी? यह बतला जाना,

ओ गौरैया, फिर आ जाना।

बस्ती तुझको भूल न पाए,

संग-संग दुनिया खैर मनाए।

लाड़ ललन पर बरसा जाना,

ओ गौरैया, फिर आ जाना।

है उदास हर तरु, हर डाली,

गई फूल-बगिया की लाली।

चहक-चहक घर पर छा जाना,

ओ गौरैया, फिर आ जाना।

वह सब करना जो मन माने,

चुगना खूब अन्न के दाने।

मेरी रोटी भी खा जाना,

ओ गौरैया, फिर आ जाना।

भगवतीप्रसाद गौतम

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