[11+ Best] किताब पर सुंदर कविता | Poem On Books In Hindi

पुस्तक

Poem On Books

पुस्तकों का करो बच्चों मान,

पुस्तक बढ़ाती सबका ज्ञान।

ज्ञान से बनता इंसान महान,

पुस्तकों का करो बच्चों मान।

पुस्तकों में जो लगाता ध्यान,

लगती परीक्षा उसको आसान।

अच्छे अंक दिलाते सम्मान,

पुस्तकों का करो बच्चों मान।

पुस्तक करती मनोरंजन,

स्वस्थ रहता है सबका मन।

स्वस्थ मन तो स्वस्थ तन,

पुस्तकों में लगाओ बच्चों मन।

पढ़ पुस्तक बनता विद्वान,

बढ़ जाती है उसकी शान

सबका होता यही अरमान,

पुस्तकों का करो बच्चों मान।

-साधना श्रीवास्तव


किताबें

Poem On Book


किताबों से मिलता हमें ज्ञान

किताबें बनायें हमें विद्वान

सबसे अच्छी मित्र हमारी

ज्ञान से बड़ा न कोई दान।


मुझे लगती किताबें प्यारी

देती हमें जानकारी देर सारी

इतिहास हो या हो विज्ञान

दूर करें सारा अज्ञान।


मुझे दें सब ज्ञान

माँ सरस्वती का,

मुझे मिले वरदान ।

-अनिकेत सहगल


किताबों में मिलता है

Poem On Book In Hindi


किताबों में मिलता है,

ज्ञान की ढेर सारी बातें।

समंदर की बातें,

अंतरिक्ष की बाते ।


किताबों में छिपा है,

विद्या का भण्डार।

किताबों में मिलती है,

जान का हर सार।


वेद है पुराण है,

और गीता, कुरान है।

ज्ञान विज्ञान है इसमें,

समाया सारा जहान है।


गाँव है नगर है और,

प्रकृति है पहाड़ है।

धरती, आसमान है,

समस्त ब्रम्हांड है।

-सुरेखा नवरत्न


अच्छी-अच्छी पुस्तक पढ़ना

Poem On Book In Hindi


मेरे घर में है अलमारी,

रखी पुस्तकें इसमें सारी।


सजे हुए हैं इसके खाने,

मोटे-पतले ग्रंथ पुराने।


करते दादा पढ़ना सीखो,

सोच-समझकर बढ़ना सीखो।


मेहनत करके मंजिल चढ़ना,

अच्छी-अच्छी पुस्तक पढ़ना।


इनसे तुमको ज्ञान मिलेगा,

जीवन में सम्मान मिलेगा।

-डॉ.सतीश चंद्र भगत


प्यारी पुस्तक

Poem On Books

प्यारी-प्यारी पुस्तक है,

देती दिल पे दस्तक है। 

अक्षर-अक्षर ज्ञान भरा है,

अशिक्षा का तिमिर हरा है। 

ऊँचा करती मस्तक है,

प्यारी-प्यारी पुस्तक है।

जीवन का निर्माण करे,

जन-जन का कल्याण करे।

करती सेवा अब तक है,

प्यारी-प्यारी पुस्तक है।

चित्र सुंदर इसमें आते,

बालमन को ये लुभाते।

ये भरती ज्ञान अक्षत है,

प्यारी-प्यारी पुस्तक है।

-गोविन्द भारद्वाज

तुम्हारी किताब

Poem On Books In Hindi

मैं तुम्हें समझाना चाहती हूँ

मैं तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ

मैं तुम्हारी किताब हूँ।

मैं तुम्हें कुछ सिखाना चाहती हूँ

कुछ वेदों की, कुछ ग्रंथों की बातें

तुम्हें बताना चाहती हूँ

मैं तुम्हारी किताब हूँ।

तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ

तुम्हें सच्चाई के साथ खड़े होना,

झूठ के खिलाफ लड़ना,

सिखाना चाहती हूँ।

कुछ प्रकृति की, कुछ नदियों की बातें

तुम्हें बताना चाहती हूँ

जीवन के सफर में तुम्हें

आगे बढ़ते देखना चाहती हूँ।

तुम्हारे जीवन में तुम्हें

नई प्रेरणा देना चाहती हूँ

मैं तुम्हारी किताब हूँ।

तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ।

-निशा रायपुरिया

पुस्तकें जीना सिखाती हैं

Poem On Books In Hindi

अंधकारमय जीवन पथ पर

जीवन ज्योति जलाती हैं

भले-बुरे का भेद बता कर

जीवन राह दिखाती हैं।

पुस्तकें हमें जीना सिखाती हैं।

भूत-वर्तमान और भविष्य के

राज सभी बताती हैं

सारे जहां का ज्ञान उर में समाती हैं।

पुस्तकें हमें जीना सिखाती हैं।

मूक रहकर भी जवाब

हर सवाल का बताती हैं

घर बैठे-बैठे सारे जहां की सैर कराती हैं।

अपने चाहने वालों को मंजिल तक पहुंचाती हैं

पुस्तकें हमें जीना सिखाती हैं।

कबीर-सूर-तुलसी की वाणी ये बताती हैं

गीता-वेद-पुराण की कहानी भी सुनाती हैं।

पुस्तकें हमें जीना सिखाती हैं।

धर्म ग्रंथों का सार भी बताती हैं

जनमानस में चेतना जगाती हैं

पुस्तकें हमें जीना सिखाती हैं।

वैर करो न आपस में तुम

मिल कर रहना सिखाती हैं

पुस्तकें हमें जीना सिखाती हैं।

सुपथ पर हमें चलाती

कुपथ से सदा बचाती हैं

पुस्तकें हमें जीना सिखाती हैं।

मीत नहीं कोई इनके जैसा

जीवन भर साथ निभाती हैं

पुस्तकें हमें जीना सिखाती हैं।

-सुनील कुमार

किताब

Poem On Books In Hindi

काश ! जिंदगी सचमुच किताब होती,

पढ़ सकती मैं कि आगे क्या होगा ।

क्या पाऊँगी मैं और क्या दिल खोयेगा,

कब थोड़ी खुशी मिलेगी , कब दिल रोयेगा।

काश! जिंदगी सचमुच किताब होती ,

फाड़ सकती मैं उन लम्हों को।

जिन्होने मुझे रुलाया है,

जोड़ती कुछ पन्ने

जिनकी यादों ने मुझे हँसाया हैं।

हिसाब तो लगा पाती कितना ,

खोया और कितना पाया है।

काश! जिंदगी सचमुच किताब होती।

वक्त से आँखें चुराकर पीछे चली जाती।

टूटे सपनों को फिर से अरमानों से सजाती।

कुछ पल के लिये मैं भी सुस्कुराती,

काश!‌‌ जिंदगी सचमुच किताब होती।

-मेहरूनिशा रोपड़

पुस्तक बोली

Poem On Books

बच्चों ने अब पुस्तक खोली,

उसमें से कविता भी डोली।

पाठों ने मुस्कान बिखेरी,

गणित की भी बिछी रंगोली।।

महापुरुष का पाठ है उसमें,

धरती का भी राज है उसमें।

विज्ञान की है खोज सुहानी,

खेती की है कुमकुम रोली।।

संस्कृति की पहचान है पुस्तक,

ज्ञान की आवाज है पुस्तक।

रामकृष्ण का चरित्र है उसमें,

खोलो मुझको पुस्तक बोली।।

पुस्तक हमसे कुछ नहीं लेती,

पढ़ो लिखो तो सब कुछ देती।

मुझको पढ़कर महान बने सब,

हँसते हँसते पुस्तक बोली।।

-कमलसिंह चौहान

बाल मुक्तक

Book Poem In Hindi

सदा किताबें देती ज्ञान।

पढ़-पढ़कर बनते विद्वान।

जो चाहो वह जानो समझो,

भाषा, गणित, धर्म, विज्ञान।

आओ हम सब वृक्ष लगायें।

सुखद मनोहर धरा बनायें।

वृक्ष रोकते वायु प्रदूषण,

जीवन में खुशहाली लायें।

साहस दृढ़ता होती जिनके।

मंजिल पास सदा है उनके।

सीखा नहीं हार मानना,

जीत पास आती है चलके।

होते सदा वृक्ष अनमोल।

कौन चुकाता उनका मोल।

वृक्ष लगाना और बचाना,

देना सबसे ऐसा बोल।

सूरज आता सदा जगाने।

आती चिड़ियां गीत सुनाने।

लगता हमको कितना अच्छा,

मम्मी आती हमें उठाने।

-कैलाश त्रिपाठी

किताबों का महत्व

Poem On Books In Hindi

अ, आ, इ, ई, की वर्णमाला,

गणित का ज्ञान है किताबों में।

नागरिक शास्त्र, इतिहास, भूगोल,

पूरे विश्व का विज्ञान है किताबों मे।।

गंगा, यमुना, सरस्वती की निर्मल धारा,

गोदावरी, नर्मदा, कावेरी का संगम है किताबों में।

विन्ध, हिमाचल, सतपुड़ा की सुन्दरता,

अनमोल जीवन रक्षक 

औषधियों का वर्णन है किताबों में।।

रहिम मीराबाई, तुलसीदास, कालीदास,

सुर की तान है किताबों में।

प्रेमचंद की कृतियाँ,

साहित्य की पहचान है किताबों में।।

झांसी की रानी, वीर शिवाजी, 

महाराणा की गाथा,

हिन्द की पहचान, 

राष्ट्र की जीत है किताबों में।

भारत का संविधान, गीता, 

कुरान, चार वेद, अठारह पुराण,

जन गण मन, 

वन्दे मातरम् गीत है किताबों में।।

-विजय गुर्जर

किताबें

Poem On Book

हाय यह किताबें

कभी न समाप्त होवे।

न जाने कहाँ से आए,

दिल का चैन ले जाए।।

दुनिया भर की बातें इसमें

पढ़ाती हैं यह खिलाकर कसमें ।

तरह-तरह की है कसमें

न जाने कहाँ से आई इसमें ?

हम बच्चों पर है यह भार,

न जाने कहाँ से आ जाता बार-बार।।

लेकिन कितनी ही करो इनकी बुराई,

यही है वह जिनसे बच्चे करते पढ़ाई।

इनको पढ़कर ही जीवन में

हम बन पाते हैं महान नागरिक ||

किताबें पन्ने पेंसिल कलम

हम करते हैं इन सबको नमन।।

-साक्षी कुमारी

किताब

Best Hindi Poetry Books

मानवनिर्मित होकर भी

प्रति के गुणों से युक्त हूँ मैं।

हवा ,पानी ,धरती

और

चांद सूरज की भांति

मैंने भी कभी नहीं सीखा

कुछ लेना

गुण अपनाया है मैंने

केवल देने का

अपना सबकुछ मानव को देकर

भी कोई उम्मीद नही रखती।

मेरी हमेशा

बस एक ही अभिलाषा

मुझसे अधिक से अधिक

ज्ञान ले लो।

वास्तव में नि:स्वार्थता

मेरा दूसरा नाम है

पर शायद आप परिचित होंगे

मेरे चिर परिचित नाम

‘ किताब’ से।

-अनुपमा

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हिन्दी कविता

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मजदूर दिवस प्यारी बेटी बाल दिवस
गंगा नदी शिक्षा गाॅंव
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