15+ सरस्वती माॅं पर सुंदर कविता | Saraswati Maa Poem In Hindi

Saraswati Maa Poem In Hindi :- बसन्त पंचमी का त्योहार माता सरस्वती की पूजा और आराधना का विशिष्ट दिन है। माँ सरस्वती अपने दोनों हाथों में वीणा धारण करती हैं। माँ सरस्वती के तीसरे हाथ में पुस्तक तथा चौथे हाथ में स्फटिक की माला सुशोभित रहती है। जहाँ वीणा संगीत और कला तथा पुस्तक ज्ञान का प्रतीक है, वहीं स्फटिक की माला इस बात का प्रतीक है कि माँ सरस्वती को भगवान् शिव के समान ही तप करना प्रिय है।

वसंत पंचमी के दिन हर बालक मां सरस्वती का पूजा बड़ी धुम-धाम से करता है। और उनसे विनती करता है कि मां हम पर ज्ञान और विद्या ऐसे ही बनाए रखना। उस दिन मां सरस्वती पर वंदना किया जाता है। हम आज के पोस्ट में सरस्वती माता पर सुंदर और बेहतरीन कविता लेकर आएं हुए हैं। आप इन कविताओं को पढ़कर और लिखकर अपने स्कूल और समारोह में भाग भी ले सकते हैं।

वीणा वादिनी वर दो माँ

Poem On Maa Saraswati

वीणा वादिनी वर दो माँ,

आलोकित जग कर दो माँ।

मन वीणा के तार छेड़ दो,

मुखरित यह जीवन कर दो माँ।

मेरे गीतों के हर स्वर में माँ,

नित तेरा ही आशीष रहे माँ।

तिमिर जग का दूर करो माँ,

जगमग यह जग कर दो माँ।

दुर्जन का संहार करो माँ,

सर्वत्र जग में शांति भरो माँ।

वीणा वादिनी वर दो माँ,

आलोकित जग कर दो माँ।

-वृंदा पंचभाई

हे वीणा वाली

Poem On Maa Saraswati

वीणा वाली शारदा मैया,

हमको दे दो ज्ञान।

नन्हे नन्हे बच्चे हैं हम,

करें आपका ध्यान।।

चरणों में हम शीश झुकाते,

करते हैं सम्मान।

हाथ जोड़ कर विनती करते,

करेंगे न अपमान।।

दीप ज्ञान की जल जाये माँ,

करते सभी प्रणाम।

हम भी आगे बढ़ते जायें,

जग में हो सब नाम।।

आशीर्वाद हमें दो माता,

करें नेक हम काम।

पढ़ लिख कर विद्वान बनें हम,

रौशन कर दो नाम।।

-प्रिया देवांगन

शारदे वंदन

Poem On Maa Saraswati In Hindi

चरण कमल में तेरे माता,

अपना शीश झुकाते हैं।

ज्ञान और बुद्धि देने वाली,

तेरे ही गुण गाते हैं।।

श्वेत कमल में बैठी माता,

कर में पुस्तक रखती।

राजा हो, या रंक सभी का,

किस्मत तू ही लिखती।।

वीणा की झंकार सुनकर,

ताल कमल खिल जाते हैं।

बैठ पुष्प में तितली रानी,

भौरे गाना गाते हैं।।

मधुर-मधुर मुस्कान बिखेरे,

ज्ञान-बुद्धि तू देती है.

शब्द- शब्द में बसने वाली,

सब कुमति हर लेती है।।

मैं अज्ञानी बालक माता,

शरण तुम्हारी आया हूँ.

झोली भर दे मेरी मैया,

शब्द पुष्प मैं लाया हूँ।।

-महेंद्र देवांगन

माँ भारती वरदान दो

Saraswati Maa Par Kavita

संसार सारा एक हो।

हर व्यक्ति जग का नेक हो।।

मिट जाए तम अज्ञान का,

सदबुद्धि विद्या, ज्ञान दो।

माँ भारती! बरदान दो।।

बन्धुत्व की हो भावना।

परमार्थ की हो कामना।।

हित हो मनुजता का सदा,

गन्तव्य एक महान दो।

माँ भारती! वरदान दो।।

विख्यात भारतवर्ष हो।

इसका सतत् उत्कर्ष हो।।

यह हो व्यवस्थित, संगठित,

इसकी प्रगति पर ध्यान दो।

माँ भारती! वरदान दो।।

सहमति, सुमति का वास हो।

नय हर्ष, नव उल्लास हो।।

सर्वज्ञ सुख हो, शांति हो,

सबको उचित सम्मान दो।

माँ भारती! वरदान दो।।

-सुश्री स्नेहलता

मातु शारदे

Maa Saraswati Par Kavita

मातु शारदे, मातु शारदे,

हमको ज्ञान व बुद्धि दे।

हम तो ठहरे अबोध बाल,

हमको ज्ञान का वर दे।।

हम नादान ना कुछ जाने,

ज्ञान चक्षु का वरदान दे।

पर सेवा काम आए हम,

ऐसा तू हमको वरदान दे।।

पद्म पुष्प निवासिनी,

कर तू वीणा धारणी।

विद्या-बुद्धि प्रदायिनी,

पुस्तक-हार धारणी।।

मन का तम हटा ज्ञान,

की ऐसी बुद्धि तू भर दे।

हम तो नन्ही सी जान,

आगे बढ़ने का भान दे।।

प्रकाश पुँज दिखाकर,

अज्ञानता को हर दो।

जीवन जगमग कर,

सुर ताल से भर दो।।

-सीमांचल त्रिपाठी

हे माता

Mata Saraswati Par Kavita In Hindi

हे माता सरस्वती,

दे दो हमको थोड़ा ज्ञान।

कभी थकें न कभी रुकें न,

भले बुरे का रख लें ध्यान।

इधर उधर की बाधा हर लो,

जहाँ जायें, पाएँ सम्मान।

पढ़ लिख कर हो जाएँ बड़े,

हो सबको हम पर अभिमान।

हे माता सरस्वती,

दे दो हमको थोड़ा ज्ञान।

-सुहानी यादव

हमें विद्या धन देना

Saraswati Maa Poem In Hindi

हे सरस्वती माता,

बस इतनी दया करना।

आए हैं शरण तेरी,

हमें विद्या धन देना।

आकर के बैठना तुम,

जिह्वा हमारी पर।

नहीं दूर कभी होना,

वाणी में विराज रहो।

बोलें अमृतवाणी,

ऐसा हमें स्वर देना।

हे सरस्वती माता,

बस इतनी दया करना।

आए हैं शरण तेरी,

हमें विद्या धन देना।

अज्ञानता दूर करो,

तुम ज्ञान बढ़ा देना।

अंधकार को दूर करो,

उजियारा कर देना।

बन जाएँ ज्ञानी हम,

माँ ऐसा वर देना।

हे सरस्वती माता,

बस इतनी दया करना।

आए हैं शरण तेरी,

हमें विद्या धन देना।

साहस और हिम्मत को,

जीवन में भर देना।

घबराएँ कभी भी नहीं,

निर्भीक बना देना।

हो जाएँ पार भव से,

इतनी शक्ति देना।

हे सरस्वती माता,

बस इतनी दया करना।

आए हैं शरण तेरी,

हमें विद्या धन देना।

-कविता

सरस्वती स्तवन

Maa Saraswati की कविता हिंदी में

जय जय जय माँ वीणा पाणी,

स्वर संगीत सभी को भाता।

जो जन सप्तम् स्वर में गाता,

स्वर साहित्य की तू कल्याणी।

ऋतम्भरा मेधा करती तुम,

नन्हे से शिशु है तेरे हम।

माँ कर मूक मुखर वरदानी,

सामवेद स्वर छन्द सुरचना।

नाद ब्रह्म अनहद शुवचना,

झंकृत स्वर कर वीणा पाणी।

नवसृजन साहित्य सम्भारों,

हित समाज की कृपा पसारों।

तेरी महिमा देव नहीं जानी,

मक्खन सा निर्मल माँ कर दे।

सुन्दर भाव हृदय में भर दे,

करहुं कृपा मातु निज जानी।

-पुष्पांजलि तिवारी

मुझे उम्मीद है की यह लेख सरस्वती माॅं पर कविता के बारे में जो जानकारी दी गयी है वो आपको अच्छा लगा होगा, यदि आपको यह post सरस्वती माॅं पर कविता (Saraswati Maa Poem In Hindi) पसंद आया है तो कृपया कर इस पोस्ट को Social Media अपने दोस्तों के साथ अधिक से अधिक शेयर करें ताकि उन्हें भी इसके बारे में पूरी जानकारी मिल सके। हमारे वेबसाइट Gyankinagri.com को विजिट करना न भूलें क्योंकि हम इसी तरह के और भी जानकारी आप के लिए लाते रहते हैं। धन्यवाद!!!

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