7 Best Janvaron ki kahaniyan 2021 | जानवरों की कहानियां हिंदी में

Janvaron ki kahaniya :- आज की पोस्ट में आपके लिए 7 Best Janvaron ki kahaniyan यानि हिंदी में जानवरों की कहानियां का संग्रह प्रस्तुत करने जा रहे हैं। इन कहानियों में जानवरों का पात्रता का नाम भी लिया गया है। जिन्हें पढ़ने में अलग ही आनंद का मजा आता है। 
 
अक्सर यह देखा जाता है कि जब बच्चें घर में अकेले हो या फिर पढ़ाई-लिखाई से मन ऊब जाने के बाद वो अक्सर ही कहानियों का सहारा लेते हैं। ज्यादातर बच्चें तो Janvaron ki kahaniyan पढ़ने की विशेष रुचि रखते हैं। इन Janvaron ki kahaniyan में एक अलग ही प्रकार का अनुभव होता है। चलिए बिना कोई देरी किए इन जानवरों की कहानियों को पढ़ते है।
Let’s start reading and enjoy


          बाज और चिड़िया

          Janvaron ki kahaniyan


बहुत समय पहले की बात है। चंपकवन के जंगलों में सभी पक्षियां आपस में मिल-जूलकर रहा करती थी। उस समय बड़े पक्षी छोटे पक्षियों के साथ मित्रता का व्यवहार करा करते थे। उस चंपकवन के जंगल में एक बाज रहा करता था। एक दिन वह सवेरे-सवेरे उड़ रहा था। उसी समय उसे एक पेड़ पर हिलती हुई एक लाल रंग की वस्तु दिखाई दी। उसे देख कर बाज डर गया। बाज अपने जीवनकाल में इस तरह का रंगीन वस्तु पहले कभी नहीं देखा था। उसने किसी तरह से हिम्मत जुटा के उस के समीप पहुंचा। उसके पास जाने पर उसमें कोई हरकत नहीं हुई। तब जाकर बाज का हिम्मत ओर बढ़ गया। फिर वह आगे बढ़ कर बंधी हुई रस्सी को अपने पंजें से स्पर्श किया तो उसे किसी तरह का कोई हरकत महसूस नहीं हुआं। 
बाज ने चैंन की सांस ली। बाज़ अपने चोंच में दबा कर उस रंगीन वस्तु को उठा कर अपने घोंसले की तरफ चल दिया। जैसे ही वह अपने घोंसले की तरफ उड़ान भरता है, उसे सामने वाले पेड़ पर एक चिड़िया दिखाई पड़ा। 

चिड़िया बाज को देख कर बोली, ‘नमस्कार बाज भाई, यह सुबह सुबह गुब्बारा लेकर कहां घुम रहे हो। 

बाज़ ने कहा कि – गुब्बारा? यह गुब्बारा क्या होता हैं? 

चिड़िया हंसते हुए बोली कि आप सच में गुब्बारा को नहीं जानते हैं। बाज ने सिर हिलाते हुए कहा कि, नहीं, मैं नहीं जानता।चिड़िया ने कहा कि यह आपकी चोंच में क्या है? लाल रंग की वस्तु को इशारा करते हुए पूछती हैं। 

बाज़ खूब जोर जोर से हंसते हुए बोला ‘हो हो हो’, मैं नहीं जानता कि यह क्या है? मुझे तो यह एक पेड़ पर लटका हुआ पड़ा था। मैंने सोचा कि कोई विचित्र जानवर है परन्तु इस में कोई हरकत न होत देख खुशी के मारे इसे अपने साथ उठा कर अपने साथ लेकर चला आया।

बाज़ की बात सुनकर चिड़िया हंसते हुए बोली कि यह कोई विचित्र जानवर नहीं है बल्कि यह एक “गुब्बारा ” हैं। इसमें हवा भरी हुई होती है। इसके सिर पर धागा बांध कर हवा में नचाया जाता हैं। और इसके साथ खेलने में भी खूब मज़ा आता है।

बाज़ ने झट से कहा, ” कैसे,?

चिड़िया ने तुरंत गुब्बारे के सिर पर बंधी रस्सी को पकड़ हवा में जा उड़ती है। गुब्बारा हवा में नाचने लग जाता है। यह देखकर बाज़ अतिप्रसन्न हो जाता है।

बाज़ को कुछ दूर स्थान पर एक चमकती हुई मांस की हड्डी दिखाई पड़ा। वह लाल गुब्बारे को भूलकर मांस की हड्डी पर चला जाता हैं। वह चिड़िया से कहती है कि,” चिड़िया रानी” , मेरे इस गुब्बारे का ध्यान देना। मैं इसके साथ बाद में खेलूंगा। यह कहकर बाज़ वहां से उड़ कर चला जाता हैं।,

‘अच्छा ठीक है बाज़ भाई, चिड़िया बोली।’ चिड़िया गुब्बारे के साथ देरी से खेलती रही। वह गुब्बारे के साथ खेल खेलकर थक भी चुकी थी। बाद में वह अपने घोंसले पर भी चली गई। फिर भी बाज़ नहीं आया। यह देखकर चिड़िया परेशान हो जाती हैं। उसे याद आया कि गुब्बारे के चक्कर में उसने भोजन भी नहीं किया। भूख-प्यास के कारण उसने गुस्से में गुब्बारे को चोंच से मार दिया। जिससे गुब्बारा फूट जाता है।

‘आगे क्या होगा।’ यह सोच कर चिड़िया डर जाती हैं। वह फूटे हुए गुब्बारे को छोड़कर भोजन की तलाश में चली जाती हैं।

कुछ समय के पश्चात बाज़ मांस की हड्डी को चूसने के बाद उसे अपने गुब्बारे की याद आता है। वह तुरंत उड़ कर गुब्बारे वाले के स्थान पर पहुंच गया। उस स्थान पर चिड़िया को न पाकर और फूटे हुए गुब्बारे को देख कर बाज़ गुस्से से आग बबूला हो जाता हैं। 

बाज़ तुरंत चिड़िया के घोंसले पर पहुंच गया। वह जोर जोर से चिड़ियां को आवाज देने लगता है। मेरा गुब्बारे को तूने क्यों फोड़ा। चिड़िया अपने पेड़ के घोंसले वाले खोल में दुबकी बैठी थी। वह यह सब बातें सुनकर डर रही थी कि कहीं बाज़ गुस्से में उसे मार न दे। बाज़ कहकर थक वहां से चला जाता हैं। और इस घटना से बाद चिड़िया बाज़ से डरने लग जाती हैं। अब बाज़ भी चिड़िया को पकड़ने की फिराक में रहने लग जाता है। तभी से इन दोनों में दुश्मनी शुरू हो जाती हैं।

Janvaron ki kahaniyan In Hindi

नैतिक शिक्षा : – क्रोध में किया गया कार्य हमेशा नई मुसीबत और संकट का ही सामना करना पड़ता है। 


      रिया भेड़ और मोनू बंदर

          Janvaron ki kahaniyan 


रिया बहुत ही भली भेड़ थी. वह अपने घर के काम-काज में ही हमेशा व्यस्त रहती थी। खाली समय में वह अपने बगीचे में गुलाब, चमेली आदि के फूलों की देखभाल करती थी। उस के बाग के पास से गुजरने वाले लोग उन फूलों की खुशबू सूंघने के लिए अकसर रुक जाया करते थे।

अकसर रिया ऐसे लोगों को एक-दो गुलाब और मुट्ठी भर चमेली के फूल जरूर दे दिया करती थी। उस का पड़ोसी मोनू बंदर बड़ा सुस्त और झगड़ालू था। उसे काम से नफरत थी और वह बिना कुछ किए ही मौज करना चाहता था। 

वह रिया से बहुत घृणा करता था। अपने मकान पर ताला लगा कर पड़ोसी गधे के पास अपने बच्चे छोड़ कर जब रिया फूल बेचने बाजार जाती थी। 

इस बीच में मोनू बंदर कूद कर उस के बाग में घुस जाता और पौधों को उखाड़ कर नष्ट कर देता। अपनी रोजी-रोटी से साधन को इस तरह तबाह होता हुआ देख कर जब रिया फूट फूट कर रोतीं और मोनु बंदर को उसे देख कर बड़ा अजीब सा मजा आता।

सुंदरवन के जंगलों में एक पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। दूर-दूर के जंगलों के निवासियों को भी इस समारोह में भाग लेने की अनुमति दी गई थी। सब से बढ़िया फूल उगाने वाले को 7,000 रुपए नकद इनाम और “फूलों की रानी” की उपाधि देने की घोषणा की गई थी।

रिया ने सोचा कि अगर वह थोड़ा सा ओर परिश्रम कर ले तो यह इनाम व उपाधि दोनों ही उसे मिल सकते हैं। इनाम के पैसों से वह अपने घर के सामने ही फूलों की दुकान खोल लेगी। इससे उसे अपने बच्चों को अकेले छोड़ कर फूल बेचने के लिए दूर-दूर तक नहीं जाना पड़ेगा। यह सोच कर वह रात-दिन फूलों के पौधों को पानी और खाद दे कर बड़ा करने में लगी रही। रिया को हर वक्त इसी का खयाल रहता था।

प्रदर्शनी वाले दिन, रिया सवेरे-सवेरे उठी। उस ने अपनी टोकरी में सभी प्रकार के फूल इकट्ठे किए और फूलों के हार, सुंदर गजरे, गुलदस्ते तैयार किए। दोपहर तक उस ने अपना सारा काम कर लिया। गधे ने फूलों की टोकरी प्रदर्शनी मैदान में पहुंचाने कार्य किया। गधे की पीठ पर टोकरी लाद कर रिया अपनी बच्चों के साथ चल पड़ी। तभी उसे याद आया कि वह रसोई घर का दरवाज़ा तो बंद करना ही भूल गई। वह वापस मुड़ी और अपने घर का ताला खोल कर अंदर गई।

इतने में न जाने मोनू बंदर अचानक कहां से कूद कर आया। उस ने फूलों को इधर-उधर फेंक दिया।

रिया भेड़ भागी-भागी बाहर आई और अपने फूलों की इतनी बुरी हालत देख कर हक्की-बक्की हो गई और चीखने चिल्लाने लगी। लेकिन साथ ही मोनू बंदर भी दर्द के मारे कराह रहा था। मैं मर गया, मुझे छोड़ दो, मुझे मत काटो। दरअसल बरगद के पेड़ पर रहने वाली शहद की मक्खियां और चींटियां रिया भेड़ की सहायता करना चाहती थीं और साथ ही दुष्ट मोनू को एक ऐसा सबक सिखाना चाहती थीं, जिसे वह जिंदगी भर याद रखे। तब तक रिया के घर के सामने बड़ी भीड़ इकट्ठी हो गई थी।

रिया भेड़ ने शहद की मक्खियों और चींटियों का धन्यवाद किया और उन से प्रार्थना की कि वे मोनू को माफ कर दें। मोनू ने भी सब के सामने यह वादा किया कि वह फूलों की दुकान चलाने में रिया भेड़ की मदद करेगा और भला बनने की कोशिश करेगा।


   खरगोश और चालाक लोमड़ी

         Janvaron ki kahaniyan


सोनपुर के जंगल में रहने वाले सोनू और मोनू खरगोश पक्के मित्र थे। दिन भर दोनों उछल-कूद मचाते और शाम होते ही घर लौट आते थे। सोनू बहुत बुद्धिमान था, लेकिन मोनू डरपोक और आलसी था।

सोनू हर काम को सोच-समझकर करता था। डर नाम की कोई वस्तु’ तो जैसे वह जानता ही न था।

एक बार उसी जंगल में एक मक्कार और चालाक लोमड़ी आ गया। वह उन दोनों को खेलते कूदते देखता, तो मन ही मन उन दोनों को चट करने की सोचा करता था। परंतु अगले ही क्षण उसे सोनू की समझदारी का ध्यान आ जाता। वह जानता था कि सोनू के होते हुए उसकी दाल नहीं गल सकती। फिर भी वह उन दोनों को चट करने की योजनाएं बनाता रहता था।

एक दिन दोनों मित्र रोज की तरह खेलने के लिए जा रहे थे। तभी चालाक लोमड़ी उनके सामने आ गई। उस समय लोमड़ी ने साधुओं जैसा वेष-भूषा बना रखा था। भगवा रंग के कपड़े पहने, हाथ में कमंडल लिए वह धीरे-धीरे उन के पास गया।

लोमड़ी चालाकी भरी आवाज में बोला, “बच्चो, तुम कहां जा रहे हो ?’ सोनू खरगोश, लोमड़ी को साधू के वेष में देख कर समझ गया कि वह उन्हें धोखा देना चाहता है, परंतु वह भी कम न था‌। उस ने भी बड़े आदर भाव के साथ हाथ जोड़ कर कहा, “हम खेलने जा रहे हैं, महाराज, लेकिन आप और इस वेष में?” “हां बच्चा,मैं ने सारी जिंदगी बहुत पापकर्म किए हैं।

अब मेरा निकट समय आ चुका है। इसलिए मैं प्रार्याश्चित्त करना चाहता हूं। सब बुरे काम छोड़ कर मैं ने संन्यास ले लिया है। यों तो लोमड़ी के मुंह में पानी भर आया था, फिर भी वह दिखावे के उपदेश देने लगा। सोनू उस की बातों में नहीं आया। और मन ही मन उस से बचने की यक्ति सोचने लगा। उधर बेचारा मोनू डर के मारे थर-थर कांप रहा था। 

उसे घबराया हुआ देख कर लोमड़ी ने कहा, “तुम बहुत कमजोर दिल के दिखाई पड़ते हो, मैंने बहुत मेहनत से एक ऐसी दवा बनाई है जिसे खाने से शरीर में बहुत ताकत आती है।

“मैं वही दवा रोज खाता हूं। इस समय वह दवा मेरे पास नहीं है। मेरे साथ चलो, अपनी कुटिया से तुम्हें भी दवा दे दूंगा। सोनू खरगोश बोला, “परंतु महाराज, हम आप की बातों की सच्चाई परखने के बाद ही आप के साथ चल सकेंगे।

लोमड़ी चक्कर में पड़ गया कि अपनी बात का प्रमाण किस प्रकार दे। अभी लोमड़ी सोच ही रहा था कि सोनू खरगोश दूर एक पेड़ की ओर संकेत करते हुए बोला, “महाराज, हमारे 10 गिनने तक आप दौड़ कर उस पेड़ को छू कर आएं तो हमें आपकी हर बात पर यकीन हो जाएगा।’

लोमड़ी ने सोचा कि इन की तसल्ली के लिए यह भी कर लेता हूं। उस ने कहा, “तुम्हारे लिए मैं यह भी करके दिखा देता हूं।इतना कहते ही साधु के वेष में लोमड़ी अपने ढीले-ढाले कपड़ों को संभालता हुआ सोनू द्वारा बताए पेड़ की ओर दौड़ पड़ा वह उन के 10 गिनने से पहले ही लौट कर उन्हें अपने साथ ले जाना चाहता था।

लोमड़ी अपनी योजना पर बहुत खुश हो रहा था। वह सोच रहा था कि घर पहुंचते ही दोनों को एक साथ खाएगा। और उसकी बहुत दिनों की इच्छा पूरी हो जाएगी। 

लोमड़ी के दौड़ते ही सोनू खरगोश ने मोनू से कहा, ‘भागो, जब तक वह चालाक लोमड़ी पेड़ के पास आए, हम यहां से बहुत दूर निकल जाएंगे। लोमड़ी पेड़ को छू कर मुड़ा, तो वह देखकर दंग रह गया। दोनों खरगोश काफी भागे जा रहे थे, तब उसे अपनी मूर्खता पर बड़ी शर्म आई।


         जल की उपयोगिता 

         Janvaron ki kahaniyan


एक जंगल में पीने के पानी की बड़ी समस्या थी। जंगल के जानवरों के अनुरोध पर शेर ने जगह जगह हैन्डपम्प व नल लगवाये। जंगल को पानी सुलभ होने लगा। जंगल में कुछ शरारती जानवर ऐसे भी थे जो रात के वक्त नल खोल दिया करते। इससे दूर दूर तक पानी बहता रहता। लेकिन बहते पानी की ओर कोई ध्यान नहीं देता। सभी अपने मतलब से मतलब रखते।

एक दिन पास के गाँव का एक गधा जंगल में अपने मित्र से मिलने आया। उसने देखा जंगल में तमाम नलों से पानी बह रहा है। उसने तुरन्त सभी नलों को बन्द किया। जंगल के कुछ जानवर व उनके बच्चे गधे की हँसी उड़ाने लगे और कहने लगे। उफ! यह तो बहुत कंजूस लगता है, ऐसा मालूम होता है, इसके गाँव में पानी की बड़ी कमी है। तभी तो इसने जंगल के पूरे नल बन्द कर दिये?

लेकिन गधे ने किसी से कुछ न कहा। इधर जैसे ही वह गधा अपने मित्र के घर पहुँचा, कुछ जानवरों ने, फिर से नल खोल दिये। थोड़ी देर बाद गधा अपने मित्र के साथ जंगल का नजारा देखने निकला। उसने सभी नलों को फिर से बन्द किया और अपने मित्र से कहा। लगता है जंगल के जानवर पानी की कद्र करना नहीं जानते?

मित्र ने कहा, अरे भाई, पानी तो बहुत तुच्छ चीज है, इसकी कद्र क्या करे? हाँ पहले तो फिर भी पानी की समस्या थी, लेकिन अब तो राजा साहब की कृपा से जगह जगह नल ही नल हैं। गधे ने कहा, पानी को इस तरह बहाना अच्छी बात नहीं? क्यों? मित्र ने पूछा।

गधे ने कहा, इसका जवाब मैं आज शाम को राजा साहब की चौपाल लगेगी तब दूंगा। जब शाम को चौपाल लगी तो वह गधा भी पहुँचा। शेर से प्रणाम कर बोला, महाराज, मैं आपको एक जरूरी सुझाव देना चाहता हूँ आपके सुझाव का स्वागत है। शेर ने कहा।

गधे ने कहा, आपके जंगल में पानी की कोई कीमत नहीं है, जगह जगह नल हर वक्त बहते रहते हैं, उन्हें बन्द नहीं किया जाता। यदि इस जंगल के प्राणियों का रवैया यही रहा तो आने वाले दिनों में जल संकट फिर से गहरा हो सकता है। अतः नलों को फालतू न बहने। दिया जाय, पानी की जितनी आवश्यकता हो, उतना ही प्रयोग करें। हाँ, एक बात और है, यदि नलों के नीचे नालियाँ बना दी जाए। गन्दे पानी को एक जगह एकत्रित कर, उससे खेती भी की जा सकती है। इससे गरीब जानवरों को फायदा मिलेगा। नाली के अभाव में जमीन मे हर वक्त नमी रहती है, इससे गन्दगी फैलती है व मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है जो मलेरिया फैलाकर पूरे जंगल को रोगी बना‌ सकता है।

यह सुनते ही शेर की आँखें खुली। उसने जंगल में एक कानून बनाया। जिसके मुताबिक पानी का उपयोग आवश्यकतानुसार किया जाने लगा। फिर शेर ने गधे को बहुत बहुत धन्यवाद देते हुए कहा। तुमने हमें जो सुझाव दिया। उसे हम और हमारे जंगल वासी कभी नहीं भूलेंगे। अब जंगल के जानवर पानी की उपयोगिता का सही अर्थ समझ चुके थे।

Janvaron ki kahaniyan In Hindi

नैतिक शिक्षा :- जल एक बहुमूल्य रत्न हैं। इसका उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए।


               इनामी पेड़

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सुंदरवन के जंगल में एक हाथी के बच्चे आपस में खेल रहे थे। खेल ही खेल में हाथी के बच्चे पेड़ उखाड़ने की कोशिश करने लग गए। तभी वहां के महाराज शेरसिंह आ पहुंचे। शेरसिंह बहुत ही ईमानदार और बुद्धिमान जंगल के राजा थे।

उन्होंने पेड़ उखाड़ते बच्चों को देखा तो उन्हें प्यार से बुला कर समझाया कि, “तुम इतने समझदार हो कर पेड़ उखाड़ रहे हो? पेड़ हमारे लिए बहुत लाभदायक होते हैं। तुम्हें तो पेड़ उखाड़ने के स्थान पर नए पेड़ लगाने चाहिए।”

अगले ही दिन शेरसिंह महाराज ने पूरे वन में यह घोषणा कर दिया कि सुंदरवन में रहने वाले हर पशु को एक-एक पेड़ अपने घर के पास लगाना होगा। अगले वर्ष सब के पेड़ देखे जाएंगे। जिस का पेड़ सब से अच्छा होगा, उसे इनाम दिया जाएगा।

उसी दिन से सभी जंगली जानवर महाराज शेरसिंह का आज्ञा का पालन शुरू कर दिया गया। 

सभी ने पेड़ लगाने प्रारंभ कर दिए। सब बढ़िया से बढ़िया पौधे नर्सरी से खरीद कर ले आए। सभी इनाम जीतना चाहते थे। गुल्लु गदहा ने सेब, अमरूद आदि के पेड़ लगाए। और रबर और जामुन के पेड़ तथा चंपा बंदर ने लगाएं। कनेर, आम, संतरा आदि के पौंधा जम्पु हाथी ने लगाएं।

सोनु खरगोश उस जंगल में बहुत ही गरीब जानवर था। सोनु खरगोश को गरीब के नाम अन्य जानवर उसे बहुत मजाक उड़ाया करते थे। उसके पास पैसा न होने के कारण वह कोई भी पौधा न खरीद पाया। इसलिए वह जंगल में जाकर कहीं से एक निंबोली का बीज उठा लाया और अपने घर के सामने उसे ही बो दिया।

कुछ ही दिन बाद उसमें से नीम का पौधा निकल आया। धीरे-धीरे एक वर्ष बीत गया। सभी के पौधे पेड़ों का रूप लेने लगे थे, पर सोनु खरगोश के पेड़ को देख कर सभी हंसते थे। सब उसे चिढ़ाते थे कि इस के पेड़ के कड़वे फल खा कर महाराज इसे ही इनाम देंगे।

लेकिन‌ सोनु खरगोश ने किसी को उत्तर नहीं देता था। अंत में वह दिन भी आ गया जब महाराज शेरसिंह सब के पेड़ देखने के लिए निकले। महाराज ने सब के पेड़ बहुत ध्यान से देखे। और सभी को सराहना किया।

अगले दिन महाराज की गुफा के सामने सभी पशु एकत्रित हुए। सभी यह जानने को उत्सुक थे। कि इनाम किसे मिलेगा। महाराज अपनी गुफा से निकले और बोले, “आप सभी लोगों ने बहुत अच्छे-अच्छे पेड़ लगाए हैं। मैं आप सभी से बहुत खुश हूं, पर सोनु खरगोश का नीम का पेड़ सब से अच्छा है और उसे ही इनाम मिलेगा।

फैसला सुन कर सभी के सभी हैरान रह गए। सोनु खरगोश भी हैरान था। सभी आपस में खुसुर फुसुर करने लगे। 

महाराज शेरसिंह को भी पता चला कि सब इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। महाराज ने कहा, “मैं बताता हूं कि सोनु खरगोश के नीम के पेड़ को पुरस्कार क्यों दिया गया है। आप सब के पेड़ के केवल फल या फूल ही काम में आते हैं, पर नीम ही एक ऐसा पेड़ है। जिस का हर भाग लाभदायक होता है।

“नीम की जड़ को उबाल कर यदि उस का पानी पिया जाए तो इस से बुखार ठीक हो जाता है। तने पर लगी छाल को पीस कर फंसी पर लगाने से फंसी ठीक हो जाती है। नीम की टहनियों के दातुन से दांत साफ किए जाते हैं। “इस के पत्ते सुखा कर अनाज या गरम कपड़ों में रखने से कीड़ा नहीं लगता। नीम के नए-नए पत्तों को खाने से खून भी साफ रहता है। इस के फूल व फल (निंबोली) खाने से पेट ठीक रहता है। निंबोली की गुठली से तेल निकलता है, जो बहुत उपयोगी होता है।

नीम अपने आसपास की वायु को शुद्ध कर देता है, जिससे बीमारी फैलने का डर नहीं रहता। फिर इस की घनी छाया में बैठ कर हम सभी अपनी थकान उतार लेते हैं।

‘अब आप लोग खुद फैसला करें कि जिस पेड़ का हर भाग इतना उपयोगी हो, उसे इनामी पेड़ घोषित करना उचित था कि नहीं?” महाराज की बात सुन कर सभी चुप हो गए।


              बुद्धिमान तोता 

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जब से मंगरू शिकारी ने मिठू तोते को पकड़ कर बेचने के लिए पिंजरे में बंद किया, तभी से वह बड़ा उदास रहता था। कई दूसरे पक्षियों के साथ वह भी पिंजरे में बड़ा असहाय अवस्था में कैद था। एक दिन, मंगरू शिकारी ने उसे एक धनी आदमी के हाथों बेच दिया। जहां, उसे एक बड़े कीमती और सुंदर पिंजरे में रखा गया। 

उस आदमी के दो छोटे छोटे बच्चे थे, जो उस खूबसूरत तोते को देख कर बहुत खुश होते थे। संगत और स्वादिष्ट भोजन के बावजूद मिठू तोता प्रसन्न नहीं था। वह तो जंगल में रहने वाले अपने माता-पिता के पास लौट जाना चाहता था। लेकिन थोड़े दिनों बाद वह बच्चों के साथ हिल-मिल गया। अब वह प्रसन्नता से पिंजरे में झूलता रहता था। उसने मनुष्य की भाषा भी सीख ली।

स्कूल से आते ही बच्चे जोर-जोर से पुकारते, “मिठू, मिठू, मिठू” करते तो मिठू तोते भी उनका खुशी-खुशी स्वागत करता। बच्चे भी खुशी से मिठू तोते को हरा मिर्च और अमरूद के टुकड़े देते। थोड़े ही दिनों में, मिठू ने अपने आस पास के लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा को समझना और साफ-साफ बोलना सीख लिया।

एक दिन सुबह, मिठू तोता ने अपने मालिक के घर की दीवार पर बैठे अन्य तोतों की जोड़ी को खुशी से चहचहाते हुए देखा। उन्हें देख कर मिठू तोते के मन में भी दूसरे पक्षियों की तरह आजादी से उड़ने की इच्छा हुई।

एक दिन नौकर ने पिंजरे को साफ करने और तोते के लिए रखे गए दाना-पानी को बदलने के लिए यह सोचे बिना ही पिंजरे की खिड़की खोल दी। मिठू तोते ने तुरंत नौकर की उंगली को काट खाया। नौकर ने दर्द के मारे झट से अपना हाथ पीछे हटा लिया। इस से पहले कि वह पिंजरे को फिर से बंद करता, मिठू तोता बहुत दूर निकल चुका था।

बहुत देर तक उड़ने के बाद, मिठू तोता अपने जंगल में पहुंचा। मगर वन में घुसने से पहले ही राजा के अंगरक्षकों ने उसे रोक लिया। फिर मुख्य अंगरक्षक मोटू हाथी ने उस से कहा, “क्योंकि तुम इंसानी दुनिया से आए हो, इसलिए हम तुम्हें जंगल के राजा शेर से अनुमति लिए बिना नहीं आने देंगे।” 

मिठु तोते ने बड़े आदर के साथ कहा, “श्रीमान, जैसी आप की इच्छा और कृपया महाराज से मेरा नमस्कार अवश्य कहें।”

राजा ने मिठु तोते के वन में दाखिल होने की अनुमति देते हुए कहा, ” तुम जंगल के नियमों ख्याल रखना और अन्य जीव जंतुओं अच्छे से व्यवहार करना। और उसे अपने माता-पिता के पास रहने की इजाजत भी दे दी। 

मिठु तोता अपने माता-पिता से मिल कर बहुत खुश हुआ।फिर मिठु तोता के पिता ने बताया, “मिठु, तुम बिलकुल ठीक समय पर आए हो, क्यों कि तीन दिन के बाद हमारे राजा शेरसिंह का जन्म दिन मनाया जाएगा। इस समारोह में भाग लेने के लिए सभी पशु व पक्षी राजा की मांद के बाहर खुले स्थान पर इकट्ठे हो गए। जब इस समारोह में मिठु तोता कहीं भी नजर न आया तो राजा ने अचानक से पूछ लिया, “मिठु तोता कहां है?”

मिठु तोता के माता-पिता ने भी उस की काफी तलाश की, मगर वह कहीं भी दिखाई न दिया। अचानक से मिठु तोता ने एक बहुत ऊंचे नीम के पेड़ की डाल पर बैठे-बैठे चिल्ला कर कहा, “भाग जाओ। और कहीं न कहीं छिप जाओ, क्यों कि शिकारी जंगल में घुस आए हैं।

राजा ने चिंतित होकर उससे पूछा, “तुम ने उन्हें कहां देखा?”इस के उत्तर में मिठु तोता ने कहा, महाराज, यहां आने से पहले, मैं नदी पर नहाने गया था। वहीं मैंने नदी के दूसरे किनारे पर खड़ी शिकारियों से भरी चार जीपें देखीं। सबका जीवन बचाने के लिए राजा ने मिठु का धन्यवाद दिया। राजा ने मिठु के माता-पिता को बधाई देते हुए कहा, “धन्य हैं ऐसे माता-पिता, जिन का मिठु तोता जैसा बुद्धिमान बेटा है।

    मछली और मेंढक की मित्रता 

          Janvaron ki kahaniyan


दो बड़ी मछलियां सहसराबुद्धि और सताबुद्धि एक बड़े तालाब में रहती थी। दोनों एक मेंढक एकाबुद्धि की बहुत अच्छी दोस्त थी। तीनों तालाब में बहुत अच्छा वक्त बीताते थे। एक शाम वे तीनों तालाब में इकट्ठा हुए, उन लोगों ने देखा कि कुछ मछवारे अपने हाथों में जाल और बड़ी टोकरी लिए सामने से जा रहे हैं और उनके पास ढेर सारी मछलियां भी हैं। तालाब के पास से गुजरते वक्त वे लोग एक दूसरे से बातें कर रहे थे। ‘ये तालाब तो मछलियों से भरा हुआ है।

उनमें से एक मछवारे ने कहा,’कल सुबह हम यहां मछलियां पकड़ने आएंगे। तालाब ज्यादा गहरा नहीं है। दूसरे दिन वे उस तालाब में आने के लिए तैयार हो गए। 

मेंढक मछवारों की बात सुनकर दुखी हो गया। उसने अपने दोस्तों से कहा, ‘अब हमें बचने के लिए कुछ उपाय निकालने होंगे। या तो हमें भागना पड़ेगा या फिर छिपना पड़ेगा। मछलियों को इस बात से ज्यादा चिंता नहीं हुई। 

एक मछली ने दूसरी से कहा, कुछ नहीं होगा, वे मछवारे तो बस ऐसे ही बातें कर रहे थे। वे यहां नहीं आएंगे। अगर आ भी जाते हैं तो मुझे पता है, मैं उनसे निपट लूंगी। मुझे पानी के बहुत सारे आइडिया आते है। मैं तुम्हे और खुद को बचा लूंगी। 

दूसरी मछली ने भी यही कहा कि वो भी अपनी और परिवार की जान बचाने में सक्षम है। दोनों मछलियां एक दूसरे के सपोर्ट में आ गई। दोनों ने ही कहा कि वे चंद मछवारों की वजह से अपने पुर्वजों का घर छोड़कर नहीं जाएंगी, लेकिन मेंढक नहीं माना। उसने बोला कि वो अपने परिवार को लेकर कल सुबह होने से पहले ही किसी और तालाब में चला जाएगा। दूसरे दिन सुबह मछवारे आए और उन लोगों ने अपने बड़े-बड़े जाल बिछाए। तालाब से मछली केंकड़े, कछुआ और मेंढक पकड़ रहे थे। दोनों मछलियां बचने की कोशिश करती रही, लेकिन बच नहीं पाई। उनकी एक भी चालाकी काम नहीं आई। 

मछवारों ने उन्हें पकड़ लिया और जब जाल में उन्हें दबोचा तो वे मर चुकी थी। मछवारे इतनी बड़ी दो मछलियां पकड़कर बहुत खुश और गर्वित थे। वे सबको दिखाकर घर जा रहे थे। इस बीच, मेंढक को रहने के लिए एक जगह मिल गई थी, लेकिन वो अपने दोस्तों के लिए डरा हुआ था। फिर जब उसे अपने दोस्त की मौत के बारे में पता चला वो दुखी हो गया। 

मेंढक परिवार से कहने लगा, ‘उनके पास बहुत हुनर था, लेकिन जिस हुनर की ज्यादा जरूरत थी वही नहीं था। लेकिन मेरे पास वही एक हुनर था। मैं अपने परिवार के साथ ही रहना चाहता हूं और खुश हूं।

Janvaron ki kahaniyan In Hindi

नैतिक शिक्षा :- हमें अपने हुनर और अक्ल का सही उपयोग करना चाहिए।

कुछ शब्द :- 

मैंने यहां पर 7 Interesting Best Janvaron Ki kahaniyan शेयर किया हूं और मैं उम्मीद भी करता हूं कि आप सभी को यह लेख 7 Best Janvaron Ki kahaniyan जरूर पसंद आया होगा। आप इसी तरह से कहानियां पढ़ना पसंद करते हैं तो हमारा ज्ञान की नगरी को विजिट करते रहे हम यहां पर इसी तरह ज्ञानवर्धक और दिलचस्प कहानियों का संग्रह प्रस्तुत करते रहेंगे।

यह लेख 7 Best Janvaron Ki kahaniyan आप लोगों को पसंद आया है तो दोस्तों के साथ और सोशल मीडिया पर भी शेयर जरूर करें। धन्यवाद…

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