Top 41+ Best Famous Balgeet In Hindi | बच्चों के लिए लोकप्रिय बालगीत

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Famous Balgeet In Hindi :- इस आर्टिकल में हमने बच्चों के लिए बहुत ही मज़ेदार और लोकप्रिय 39+ हिन्दी शिक्षाप्रद पर आधारित ज्ञानवर्धक और मनोरंजक बालगीत का अनोखा संग्रह आपके साथ साझा किया गया है। यह बच्चों को गाने वाला प्रसिद्ध बालगीत है जो हम लोगों के बचपन की याद दिला देती हैं।

यहाँ पर जो बच्चों की बाल गीत, बच्चों की कविताएं प्रस्तुत की गई हैं। वह पूरी तरह से बच्चों के मनोविज्ञान के अनुरूप हैं। जो लोकप्रिय कवियों के द्वारा लिखी गई हैं। यह कविताएँ बच्चों के लिए सरल और रूचिकर हैं। और आसान शब्दों में बताया गया है। इसे हर कोई आसानी से पढ़ सकता है। यह बच्चों को नई-नई चीजें सिखने में मदद करती है। और उनकी बौद्धिक ज्ञान में विकसित करती है।

आज-कल अक्सर स्कूल में बच्चों के लिए बच्चों की छोटी कविता पाठ का आयोजन होता हैं। उन बच्चों के लिए बाल कविताएं यहाँ पर दी गई कविताओं से काफी मदद मिलेगी। तो चलिए दोस्तों पढ़ते है मजेदार बच्चों की बाल कविता, बच्चों की बाल कविताएं और यह बाल कविताओं का अनोखा संग्रह अच्छा लगा तो अपने दोस्तों के साथ अवश्य साझा करें, उन्हें भी यह बाल कविता पसंद आएं।

बच्चों हमारे इस ज्ञान की नगरी वेबसाइट पर बेहतरीन और सुंदर हिंदी कविताओं का अनोखा संग्रह उपलब्ध कराया गया है, आप जों कविताएं पढ़ना चाहते हैं यहां पर 👉 क्लिक कर पढ़ सकते हैं। धन्यवाद!!!

 

Balgeet In Hindi

 

तितली

Balgeet

 

रंग-बिरंगी प्यारी तितली,

पंख हिलाती आती तितली।

 

हाथ किसी के लगे न तितली,

फुर्र फुर्र उड़ जाती तितली।

 

पंख हिलाती आती तितली,

हाथ किसी के लगे न तितली।

 

बन्दर मामा

Balgeet In Hindi

 

रौब से निकले बन्दर मामा,

आज सिलाऊं मस्त पैजामा।

मल-मल कर उसको धुलवाऊं,

पानी छिड़क इस्त्री करवाऊं।

 

रात तक पहुंचे ससुराल,

सबने पूछे उनके हाल।

सेंट लगा ससुराल जाऊं,

ताम-झाम अपना दिखलाऊं।

 

रात तक पहुंचे ससुराल,

सबने पूछे उनके हाल।

सासू ने पकवान बनाए,

मिल बांट सबने खाए।

 

सुबह बीवी की करा विदाई,

शाम को घर लौट आए भाई।

-अरुण यादव

 

मीठी बोली

Hindi Balgeet

 

मीठी बोली सबसे बोल,

कड़वी बोली कभी न बोल।

झूठ न बोल, सच-सच बोल,

सच की बोली है अनमोल।

 

पाठ पढ़ाओ चिड़िया

Balgeet

 

मेरे आंगन आओ चिड़िया,

मीठे गान सुनाओ चिड़िया।

खीर बनाई है अम्मा ने,

तुम भी आकर खाओ चिड़िया।

 

फुदक-फुदक कर टहनी टहनी,

अपना नाच दिखाओ चिड़िया।

धरा कटोरी में है पानी,

अपनी प्यास बुझाओ चिड़िया।

 

पंख नहीं है मेरे फिर भी,

उड़ना मुझे सिखाओ चिड़िया।

संग सहेली अपनी आकर,

सब का जी बहलाओ चिड़िया।

 

मिलजुल कर सब को रहना है,

ऐसा पाठ पढ़ाओ चिड़िया।

-राजेन्द्र निशेश

 

बाल गीत

Hindi Balgeet

 

अम्मा जब लोरी गाती थीं,

तो नींद तुरत आ जाती थी।

अम्मा तुम फिर से आ जाओ,

लोरी हमें सुना जाओ।

 

अपने प्यारे हाथों से,

थपकियाँ भी हमें लगा जाओ।

भूख लगी है बहुत जोर से,

मुझको एक कौर खिला जाओ।

 

अम्मा तुम फिर से आ जाओ,

तेरे बिन सूना घर लगता।

अंगना भी रोया है करता,

मिट्टी के चूल्हे की रोटी।

 

अम्मा तुम हमें खिला जाओ,

गोदी में अपनी लेकर।

अम्मा तुम हमें सुला जाओ,

आपके साथ बिताये पल की।

 

यादें हमें सताती हैं,

कहाँ छुपी हो अम्मा मेरी।

फिर से दर्श दिखा जाओ,

अम्मा अब तुम आ जाओ।

-विद्या शंकर

 

बालगीत

Hindi Balgeet

 

गाँव में एक मदारी आया,

संग अपने बंदर वो लाया।

बंदर ने नाच तमाशा दिखाया,

उछल-कूद कर सबको हँसाया।

 

इधर-उधर, चहका फुदका,

कभी सीधा खड़ा कभी लुड़का।

सबके मन को खूब भाया,

मदारी संग ऐसा बंदर लाया।

-वैष्णवी मोहन

 

सर्दी आई

Hindi Balgeet

 

ज़रा सँभल कर रहना भाई,

मौसम बदला सर्दी आई।

बंदर टोपी मफलर मोजे,

दस्ताने शॉलें स्वेटर।

 

संदूकों से निकल निकल अब,

अलमारी को देंगे भर।

चादर छोड़ सभी ओढ़ेंगे,

मोटी कम्बल और रजाई।

 

मौसम बदला सर्दी आई,

गरम पकौड़े हलवा पूरी।

भाजी पाव बनायेंगे,

आलू गोभी मेथी पालक।

 

भरे परांठे खायेंगे,

सूप चाय काफी है पर।

आईसक्रीम की रोक लगाई,

मौसम बदला सर्दी आई।

 

बैडमिंटन फुटबॉल क्रिकेट,

बच्चे खेलेंगे हिलमिल।

पिकनिक के प्रोग्राम बनेंगे,

दिल सबके जायेंगे खिल।

 

धूप सेकती नानी-दादी,

लेकर अपनी ऊन सिलाई।

मौसम बदला सर्दी आई।

-निशा कोठारी

 

दादी मां

Balgeet In Hindi

 

दादी बोली आओ बच्चों,

तुमको गीत सुनाती हूं।

परियों वाली बातें कहकर,

तुम सबका मन बहलाती हूं।

 

इंद्र की नगरी सुंदर नगरी,

रहती उधर पे अप्सराएं।

चांद और तारे फीके लगते,

इतनी तेज वो जगमगाएं।

 

गीत वो गातीं नाचा करतीं,

तुमको उनकी बात बताती हूं।

दादी बोली आओ बच्चों,

तुमको गीत सुनाती हूं।

 

चंदा मामा की नगरी में,

टिमटिम तारे करते हैं।

सूरज आता वह छुप जाते,

आंख मिचौली करते हैं।

 

इधर-उधर वह घूमे क्यों,

तुमको सब राज बताती हूं।

दादी बोली आओ बच्चों,

तुमको गीत सुनाती हूं।

 

जादू वाली उस नगरी में,

एक जादूगर भी रहता है।

कौन कहां पर क्या-क्या करता,

वह सब देखा करता है।

 

अजब-गजब हैं उसके किस्से,

कुछ किस्से तुम्हें सुनाती हूं।

दादी बोली आओ बच्चों,

तुमको गीत सुनाती हूं।

-डॉ. वर्षा चौबे

 

आई है भइया होली रे

Hindi Balgeet

 

हल्ला-गुल्ला शोर मचाती,

रंगों की बौछारें लाती।

आई है भइया होली रे,

आओ रामू आओ श्यामू।

 

खूब मजे से गाओ मिलकर,

रंग उड़ाओ गले लगाओ।

सबको तुम अपनाओ मिलकर,

वैर-द्वेष का भाव मिटाती।

 

खुशियों की सौगातें लाती,

आई है भइया होली रे।

कीचड़ मत फेंको तुम भाई,

अच्छे बच्चे तुम सारे हो।

 

नन्हें-मुन्ने थोड़े नटखट,

माँ की आँखों के तारे हो।

मीठे-मीठे सपन जगाती,

सब के मन को ये भा जाती,

आई है भइया होली रे।

-राजेंद्र निशेश

जगमग दीप

Hindi Balgeet

 

जगमग-जगमग दीप जलाती

आई है दीवाली,

ओठों पे मुस्कान लिए है

रात बावरी काली।

 

राम श्याम ने खूब सजाया

अपना घर है भैया,

रजनी देखो नाच रही है

करती ता-ता- थैया।

 

जी भरकर हैं खाते लल्ला

नहीं पेट है खाली,

पूनम सबको बाँट रही है

लिए मिठाई थाली।

 

पटाखों की धूम मची है

इधर-उधर इतराते,

जरा आग दिखला दी इनको

भागे-भागे जाते।

 

खुशियों की बारात सजाये

आई है दीवाली,

रह न जाये आज कोई भी

मुस्कानों से खाली।

-राजेन्द्र निशेश

गाँधी जी के तीन बन्दर

Balgeet

दम दमा दम मस्त कलन्दर,

हम हैं गाँधी जी के बन्दर।

हम में अच्छे-अच्छे गुण हैं,

नहीं किसी से भी हम कम हैं।

 

मैंने घूमी दुनिया सारी,

चाहूंओर है मारा-मारी।

लेकिन मैं तो अच्छा देखू,

अच्छी-अच्छी बातें सीखू।

 

बुरी चीज मैं नहीं देखता,

मैं बापू को प्यारा लगता।

मैं भी घूमा दुनिया सारी,

कहीं मौज़ तो कहीं लाचारी।

 

बुरी बात मैं नहीं बोलता,

सोच समझ कर मुंह को खोलता।

बुरा न बोलो मेरा नारा,

इसीलिए बापू का प्यारा।

 

मैं भी दुनिया घूमा करता,

तरह-तरह की बातें सुनता।

लेकिन बापू ने सिखलाया,

जीवन का इक मंत्र बताया।

 

बुरी बात पर कान न धरना,

दुख ही दुख पाओगे वरना।

तुम भी यह सब बातें सीखो,

बुरा कहो, ना सुनो, ना देखो।

 

यदि मंत्र यह अपना लोगे,

तो सबके प्रिय बन जाओगे।

-डॉ. ममता खत्री

चींटी रानी

Hindi Balgeet

 

चींटी रानी चींटी रानी

कर्मठता का ना कोई सानी।

हर पल चलती रुकती ना जो

सतत प्रयत्न की जिसने ठानी।

 

स्वार्थ जिसको छू ना पाता

उसका सहकार से नाता।

जीवन जीने की रीति सुहानी

चींटी रानी चींटी रानी।

 

मिलकर खाती ना उकताती

बीस गुना जो वजन उठाती।

करती ना वो कभी मनमानी

चींटी रानी चींटी रानी।

 

संचय करना जिसे सुहाता

लीक से हट चलना ना आता।

मीठे की जो रही दीवानी

चींटी रानी चींटी रानी।

-व्यग्र पाण्डे

गणतन्त्र दिवस

Hindi Balgeet

जीने का हो एक मन्त्र,

राष्ट्र हमारा रहे स्वतन्त्र।

गणतन्त्र दिवस को पहचानें,

महत्ता इसकी हम जानें,

याद करें कुर्बानी को,

देश हित मिटी जवानी को,

अमर रहे ये गणतन्त्र।।

 

हर वर्ष मनायें ऐसे पर्व,

करें निरन्तर जिसपे गर्व,

घर-घर हर बच्चा हर्षाये,

पुलकित होकर पर्व मनायें।

सफल तभी हो जनतन्त्र।।

 

राष्ट्र ध्वज को फहरायें,

नील गगन में लहरायें,

नमन करें शहीदों को,

रखें दूर विवादों को।

सच्चा होगा लोकतन्त्र।।

 

मिल सभी जन काम करें,

आजादी हित त्याग करें,

जन-जन की भागीदारी हो,

सबकी जिम्मेदारी हो।

राम राज्य हो प्रजातन्त्र।।

-मोती ‘विमल’

रसगुल्ले

Balgeet

 

पापा जब बाजार से आये,

बहुत सारे रसगुल्ले लाये।

रंग सफेद और सब थे गोल,

थे डूबे हुये चीनी के घोल।

 

देखकर मुँह से टपकी लार,

सोच रहे थे मिले जो चार।

दो – दो बाँटे मम्मी जी ने,

बबलू ने चट दो और छीने।

 

पापाजी बोले यह गन्दी बात,

खुद नहीं लगाते बच्चे हाथ।

स्वास्थ्य बिगड़ता जादा खाकर,

फिर क्या फायदा है घर लाकर।

 

दूर से दिख रहे थे ज्यों अण्डे,

खाने में लगे बहुत ही ठण्डे।

चम्मच से तोड़-तोड़ कर खाया,

हम सबको खूब मजा था आया।

 

पहली ही बार में डिब्बा आधा,

दादीजी बोली खाओ न ज्यादा।

-डॉ. सुरेन्द्र दत्त सेमल्टी

गोरैया कहां गई?

Balgeet

प्यारी न्यारी सी गौरैया,

ढूंढ रहे हम कहां गई?

कौन देश, परदेश, डगरिया,

चिड़िया रानी जहां गई?

 

सुबह सवेरे डाली डाली

फुदक फुदक कर उड़ती थी।

ची ची करती चहक निराली,

रस कानों में भरती थी।

 

गली, मोहल्ला, शहर हमारा

कितना सूना बना गई?

कहां रहे वो पेड़ जहां पर

उसका रेन बसेरा था?

 

बंद हुए वो कोटर जिनमें

गौरैया का डेरा था।

खिड़की खिड़की लगी जालियां,

किला घरों को बना गई।

 

नहीं बचा अब दाना पानी

पत्थर के चौबारों में।

रास नहीं आती चिड़िया को

आबो हवा बजारों में।

 

जंगल की शीतल पुरवइया,

शायद उसको उड़ा गई।

उसका कोई ठौर ठिकाना,

बस्ती में तैयार करो।

 

थोड़ा दाना पानी उसका,

आंगन दे हरी द्वार धरो।

फिर शायद आए गौरैया,

लौट वहां से जहां गई।

-धीरेन्द्र कुमार जोशी

चिड़िया रानी

Hindi Balgeet

 

आओ बच्चों सुनो कहानी,

एक है प्यारी चिड़िया रानी।

चूं-चूं कर मुझसे बतियाए,

फुदक-फुदक वो नाच दिखाए।

 

जब भी बैठू खाना खाने,

साथ में मेरे खाना खाए।

दो चार रोज को जाऊं बाहर

परेशान हो मुझे बुलाए।

 

लौट के आऊं जब घर को

झट से कंधे पर चढ़ जाए।

बस मैं कहूं यही कहानी,

वो है मेरी नन्ही रानी।

-अरुण यादव

बालगीत : बरसा पानी

Balgeet Hindi

 

बादल छाये,

हवा चली

बिजली कड़की

बरसा पानी

बूंदे नाची

छम-छमा छम

मेंढक बोले-

बरसा पानी

नदिया हँसी

ताल लहराये

झरना गाये

बरसा पानी

पत्ते नहाये

पेड़ हर्षाये

टहनी बोली

बरसा पानी

आम आये,

जामुन खाये

हरियाली छाये

बरसा पानी

झरने कूदे

नाले गाये

बच्चे नहाये

बरसा पानी

नीड़ बसाओ

नीड़ बचाओ

पंछी अकुलाये

बरसा पानी

कुऐ लबा-लब

सड़कें डूबी

बिजली गायब

बरसा पानी

स्कूल खुले

बच्चे हर्षाये

छाता बोला

बरसा पानी

-दिनेश ‘दर्पण’

बालगीत : तिरंगे को सलाम

Balgeet In Hindi

 

हर छात्र सजा धजा है।

ढमढम बैंड बजा है।।

बिगुल भी अविराम

तिरंगे को फहराया है।।

उसको करें प्रणाम।

अदब से करें सलाम।।

यह कैसा है संयोग।

देख रहे सारे लोग।।

इन्द्रधनुष भी निकला

सतरंगा लिए ललाम।।

उसको करें प्रणाम।

अदब से करें सलाम।।

आजादी के गूंजे तराने।

हम सुन के सीना ताने।।

जोश उमंग उत्साह की।

लहरें उठती उद्दाम।।

उसको करें प्रणाम।

अदब से करें सलाम।।

गफूर ‘स्नेही

पंछी

Hindi Balgeet

देखो जग में ये बेचारे ,

जगह-जगह भटकते पंछी।

पर्वत डाल सरिता गगन

मारे-मारे फिरते पंछी।।

कितने सुन्दर पंख हैं होते,

सबका मन ललचाते पंछी।

एक-एक तिनका जोड़कर ,

सुन्दर सा नीड़ बनाते पंछी।।

जग में जब होती भोर है,

गीत सुहावने गाते पंछी ।

जागो जगत के सारे मानव

उदबोधित तब करते पंछी।।

अपना पेट भले ही खाली हो ,

निवाला बच्चों को लाते पंछी।

ममता की प्रतिमूर्ति बनकर,

अपना धर्म निभाते पंछी।।

प्रदूषण की मार झेलते,

अरि से घिरे रहते हैं पंछी।

नील गगन मे समूह संग मे,

उड़ते बहुत सुहाते पंछी।।

किसी का कुछ नहीं बिगाड़ते,

क्यों कारा मे बन्द हो पंछी ?

प्रकृति जिनकी है स्वच्छन्द ।

करें उन्मुक्त विचरण पंछी।।

इन्हें मारना पाप बड़ा है,

प्रकृति का उपहार है पंछी ।

संरक्षण-संवर्धन कर इनका ,

आशीष सदा देते हैं पंछी।।

शाकाहारी प्राणी मानव

कभी न मारे कोई पंछी।

अपना धर्म निभाना सीखो ,

हर दिन कूककर कहती पंछी।।

डॉ. सुरेन्द्र दत्त सेमल्टी

शिशु गीत : मीठे अनार

Balgeet

अनार का जब

आया मौसम

चीकू पड़ा बीमार।

सोचा खूब मिलेंगे खाने

ताजे मीठे अनार।।

राधेलाल ‘नवचक्र’

आओ बादल जी

Hindi Balgeet Lyrics

घिर-घिर लाओ पानी

आओ बादल जी।

बुला रही है नानी

आओ बादल जी।।

प्यास गले में अटकी

नहीं सहा जाता।

बढ़ती जाती गरमी

मन है अकुलाता।।

तड़पे मछली रानी

आओ बादल जी।

धूल उड़ी है गलियों

सूना आंगन-घर।

सन्नाटा है भीतर

सन्नाटा बाहर।।

आंधी सी मनमानी।

आओ बादल जी।

तुम आओ तो सावन

आए हरियाली।

इन्द्रधनुष उग आए

सतरंगों वाला।।

तुम तो ठहरे दानी

आओ बादल जी।

रामसेवक शर्मा

बालगीत : दर्पण का गीत

Hindi Balgeet

जैसा देखे, वही दिखाए-

दर्पण सच का साथ निभाए।

उजला मन होता दर्पण का,

गोरा तन होता दर्पण का।

नहीं कपट है, छल है थोड़ा,

जमा झूठ को देता कोड़ा।

जो सम्मुख हो उसको

दर्पण सच का साथ निभाए।

चाहे कोई कितना भागे,

रूक जाता दर्पण के आगे।

आंख मिलाकर बातें करना,

निश्छलता की पोथी पढ़ना।

बच्चों जैसा हृदय लुभाए-

दर्पण सच का साथ निभाए।

करें स्वयं को दर्पण जैसा,

भागे अंदेशा ऐसा-वैसा।

माँ से लें खुलकर शाबाशी.

यह जीवन हो मथुरा-काशी।

इतनी-सी बस सीख सिखाए-

दर्पण सच का साथ निभाए।

घमण्डीलाल अग्रवाल

यह धरा है स्वर्ग समान

Hindi Balgeet

कोई आकर कह दे हमसे ,

भारत जैसा किसका देश ?

यहाँ रहते सब हैं मिलकर ,

भले ही पृथक-पृथक हैं भेष।।

पहचान सबका एक तिरंगा ,

सब लेते हैं उसकी शपथ।

ध्वज के रंग और चक्र की ,

जाते सब शिक्षा के पथ।।

इस धरती के वक्षस्थल पर।

सरितायें बहती सतत अनेक।

मन मयूर नृत्य करने लगता

उनके कोटि लाभों को देख।।

हरा भरा रहता सदा ही ,

मातृभूमि का हर कोना ।

इन नदियों की अनुकंपा से

खेतों में उगता चाँदी-सोना।।

षड ऋतुओं के देश भारत मे ,

अन्न फल-फूलों का नहीं अभाव।

होते कई प्रजातियों में ये ,

जिनके पृथक-पृथक हैं भाव।।

इसके गर्भ मे भी छिपा है ,

बड़ा ही महत्वपूर्ण खजाना।

हम तो मात्र अनुमान लगाते

सही ढंग से किसने जाना ?

स्वर्ग समान इस धरती पर ,

जिन्होंने जन्म किया धारण।

कितने पुण्य किये उन्होंने ?

कोई जान नहीं पाया कारण।

डॉ. सुरेन्द्र दत्त सेमल्टी

शिशु गीत : काम नेक हो

Hindi Balgeet

एक-एक दो,

काम नेक हो।

दो-दो चार,

हँस तो यार!

तीन-तीन छः

झूठ नहीं कह!

चार-चार आठ,

रोज पढ़ो पाठ!

पांच-पांच दस,

गीत खतम बस!

डॉ. हरीश निगम

बालगीत : चाॅंद सितारे

Balgeet

दिन ढल जाता, संध्या आती,

संध्या ढलती सब तारे आते,

अंधियारा जब छा जाता है,

‘तब चमकते चाँद-सितारे।

गहन निशा जब छा जाती है,

सन्नाटे में रम जाती है,

सब प्राणी जब सो जाते हैं,

पहरा देते हैं चाँद-सितारे।

पहर सभी ढलने लगते हैं,

सर्द हवा सहने लगते हैं,

दर्द सहेजने वे लगते हैं,

टिमटिमाते हैं चाँद-सितारे।

 दिनेश ‘दर्पण’

गीत खुशी के गाओ

Hindi Balgeet

झूमो नाचो मौज मनाओ।

गीत खुशी के गाओ।

बीत गया है साल पुराना।

नये साल का खुला खजाना

ले लो जितना ले सकते हो

लेकर खुशी मनाओ

नये साल की बात नयी हो।

नया सबेरा रात नयी हो।।

नये साल में सबसे हट कर,

अपना लक्ष्य बनाओ

सागर तल में पैर जमाओ

नभ की ऊँचाई तक जाओ

तुमसे बड़ा नहीं है कोई

दुनिया को दिखलाओ।

झूमो नाचो मौज मनाओ।

गीत खुशी के गाओ।

डॉ. परशुराम शुक्ल

चिड़िया रानी

Hindi Balgeet

बड़ी प्यारी चिड़िया रानी।

गाती गीत बढ़िया रानी।।

मीठी कंठ सुरीली तान।

ये ठहरी बगिया की शान।।

नाचती जैसे गुड़िया रानी।

बड़ी प्यारी चिड़िया रानी।।

टीकेश्वर सिन्हा “गब्दीवाला”

टम टम गाड़ी

Hindi Balgeet

घोड़ा गाड़ी, घोड़ा गाड़ी,

इक्का, ताँगा, टम-टम गाड़ी।

शाही महलों में कहलाती,

घोड़ों वाली बग्घी गाड़ी।।

इनके घोड़े तगड़े न्यारे,

सरपट दौड़ लगाते सारे।

चाबुक का जब मिले इशारा,

टप-टप दौड़ लगाते प्यारे।।

बनी काठ की टम-टम गाड़ी,

सरपट भागे घोड़ा गाड़ी।

कच्ची सड़क रहे या पक्की,

चाहे रस्ता मिले पहाड़ी।।

बंधी घंटियां इस गाड़ी में,

टुन-टुन बजती गाड़ी में।

खुली-खुली सी देखो टम-टम,

सैर कराती गाड़ी में।

लेकिन यह सब बात पुरानी,

अब इसकी है खत्म कहानी।

बाइक, आटो, कार दौड़तीं,

महानगर में मेट्रो रानी।।

इक्का, ताँगा हुआ खतम,

बग्घी भी दिखती अब कम।

ई. रिक्शा अब खूब चले,

दिखता नहीं कहीं टम-टम।।

ओम प्रकाश खरे

स्वच्छ रहेंगे, स्वस्थ बनेंगे

Hindi Balgeet

स्वच्छ रहेंगे स्वस्थ बनेंगे,

हमने मन में ठानी है।

जीवन का आधार सफाई,

बात सही पहचानी है।

नित्य कर्म से निवृत्त होकर,

स्वच्छ वस्त्र ही पहनेंगे।

फिर बालों में कंघी करके,

हम तो प्रतिदिन संवरेंगे।

स्वच्छ हमेशा सुंदर लगता,

यह तो बात पुरानी है।

स्वच्छ रहेंगे स्वस्थ बनेंगे,

हमने मन में ठानी है।।

बर्तन चौंका साफ करेंगे,

धोएंगे हर फल-सब्जी।

धोकर हाथ हमेशा खाएं,

हमको ऐसी क्या जल्दी।।

बिना ढके भोजन रखने की,

ना करनी नादानी है।

स्वच्छ रहेंगे स्वस्थ बनेंगे,

हमने मन में ठानी है।।

साफ रखेंगे गली मुहल्ले,

कीटाणु ना पनपेंगे।

पानी शुद्ध पिएँगे तो फिर,

रोग कई ना फैलेंगे।।

सच्चा मित्र निरोगी काया,

बाकी आनी जानी है।

स्वच्छ रहेंगे स्वस्थ बनेंगे,

हमने मन में ठानी है।।

स्वच्छ बनेंगे हम तब ही तो,

देश स्वच्छ बन पाएगा।

फिर दुनिया के मानदंड पर,

आगे बढ़ता जाएगा।

हमें विदेशी मेहमानों को,

अपनी शान दिखानी है।

स्वच्छ रहेंगे स्वस्थ बनेंगे,

हमने मन में ठानी है।।

थोड़ा-थोड़ा यत्न करेंगे,

मिशन सफल हो जाएगा

और सफाई रूपी जेवर हम,

सब को मिल जाएगा।

अन्य सभी जेवर तो भरते,

इसके आगे पानी हैं।

स्वच्छ रहेंगे स्वस्थ बनेंगे,

हमने मन में ठानी है।।

तन को स्वच्छ करेंगे अपने,

मन की मैल हटाएंगे।

ईर्ष्या, बैर, लोभ, मद, धोखा,

मन में कभी न लायेंगे।

महावीर, टैगोर, तिलक की,

बातें हृदय बसानी है।

स्वच्छ रहेंगे स्वस्थ बनेंगे,

हमने मन में ठानी है।।

कुसुम अग्रवाल

समय

Hindi Balgeet

बच्चो! समय पर दो तुम ध्यान ।

समय की करो सदा पहचान।

समय पर पढ़ना, समय पर खेलना।

समय का दुरुपयोग कभी मत करना।

जैसे घड़ी का काम है समय दिखलाना।

वैसे तुम्हारा काम है समय का महत्व करना।

अगर समय का सदुपयोग किए तुम एक समान।

तो दुनिया में बन जाओगे महान ।

संदीप कुमार

चिड़िया रानी

हिंदी बालगीत

चिड़िया रानी बड़ी सयानी

दाना चुग उड़ जाती है

बैठ डाल पर चोंच हिलाकर

हमको पास बुलाती है

नहीं किसी से वह कुछ माँगे

खुद पर निर्भर रहती है

अपना जीवन खुश हो जीती

ऐसा ही कुछ कहती है

हम भी तो खुश रहना सीखें

बात यही बतलाती है

बैठ डाल पर चोंच हिलाकर

हमको पास बुलाती है

थोड़ी खुशियाँ चोंच में भरकर

नया सवेरा आँखों में

बगिया की खुश्बू पंजों में

पुरवाई भर पाँखों में

बड़े सवेरे खिड़की से वह

हम सब को दे जाती है

बैठ डाल पर चोंच हिलाकर

हमको पास बुलाती है

पेन्टर मदन

Balgeet : बादल

आया बादल छाया बादल।

फिर जल बरसाया बादल।।

नदी नाले ताल-तलैया।

डबडब करता कुआँ भैया।।

आज सबको हँसाया बादल।

आया बादल छाया बादल।।

टीकेश्वर सिन्हा “गब्दीवाला”

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