Top 29+ Best Hindi Poem For Class 7 | हिंदी कविता कक्षा 7 के लिए

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Today in this post we are sharing easy to learn Best 29+ Hindi Poem For Class 7 and Class 7 Hindi Poem. these poems is children can easily understand and easily learn it.

आज के लेख में कक्षा 7 के लिए सबसे अच्छी कविता साझा कर रहा हूँ जो साधारण भाषा में अद्भुत और दिलचस्प है। यह कविता पढ़ने में बहुत ही आकर्षक है। इन कविताओं की सबसे अच्छी बात यह है कि बच्चे इसे आसानी से समझ सकते हैं और साथ ही साथ आसानी से इस कविता को याद भी कर सकते हैं।

यहां पर हिंदी में सुंदर कविताओं का एक विशाल संग्रह प्रस्तुत किया गया है। कक्षा 7 के लिए कविताएं बच्चों को प्राकृतिक सुंदरता और परिवेश की कला सिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कविता के अंदर आमतौर पर अपने अपने विचार होते हैं। जों कविता यहां पर प्रस्तुत किया गया है, वह प्राकृतिक सुंदरता और हमारे आस-पास के वातावरण की सराहना करने में मदद करती हैं।

 

Hindi Poem For Class 7

 

हम पंछी उन्मुक्त गगन के

Hindi Poems For Class 7

 

हम पंछी उन्मुक्त गगन के

पिंजरबद्ध न गा पाएँगे,

कनक-तीलियों से टकराकर

पुलकित पंख टूट जाएँगे।

 

हम बहता जल पीनेवाले

मर जाएँगे भूखे-प्यासे

कहीं भली है कटुक निबौरी

कनक-कटोरी की मैदा से।

 

स्वर्ण-श्रृंखला के बंधन में

अपनी गति, उड़ान सब भूले,

बस सपनों में देख रहे हैं।

तरु की फुनगी पर के झूले।

 

ऐसे थे अरमान कि उड़ते

नीले नभ की सीमा पाने,

लाल किरण-सी चोंच खोल

चुगते तारक-अनार के दाने।

होती सीमाहीन क्षितिज से

इन पंखों की होड़ा -होड़ी,

या तो क्षितिज मिलन बन जाता

या तनती सांसों की डोरी।

 

नीड़ न दो, चाहे टहनी का

आश्रय छिन्न-भिन्न कर डालो,

लेकिन पंख दिए हैं तो,

आकुल उड़ान में विघ्न न डालो।

-शिवमंगल सिंह

 

चिड़िया और चुरुंगुन

Hindi Poem For Class 7

 

छोड़ घोंसला बाहर आया,

देखी डालें, देखे पात,

और सुनी जो पत्ते हिलमिल

करते हैं आपस में बात;

 

मां, क्या मुझको उड़ना आया?

‘नहीं, चुरुंगुन, तू भरमाया’

 

डाली से डाली पर पहुँचा,

देखी कलियाँ, देखे फूल,

ऊपर उठकर फुनगी जानी,

नीचे झुककर जाना मूल;-

 

 

माँ, क्या मुझको उड़ना आया?

“नहीं, चुरुंगुन, तू भरमाया’

 

कच्चे-पक्के फल पहचाने,

खाए और गिराए काट,

खाने-गाने के सब साथी

देख रहे हैं मेरी बाट;-

 

माँ, क्या मुझको उड़ना आया?

‘नहीं, चुरुंगुन, तू भरमाया’

 

उस तरु से इस तरु पर आता,

जाता हूँ धरती की ओर,

दाना कोई कहीं पड़ा हो

चुन लाता हूँ ठोक-ठठोर;

 

माँ, क्या मुझको उड़ना आया?

‘नहीं, चुरुंगुन, तू भरमाया’

 

मैं नीले अज्ञात गगन की

सुनता हूँ अनिवार पुकार

कोई अंदर से कहता है।

उड़ जा, उड़ता जा पर मार;-

 

माँ, क्या मुझको उड़ना आया?

“आज सुफल हैं तेरे डैने,

आज सुफल है तेरी काया’

-हरिवंशराय बच्चन

 

थोड़ी धरती पाऊँ

Hindi Poem For Class 7

 

बहुत दिनों से सोच रहा था,

थोड़ी धरती पाऊँ

उस धरती में बाग-बगीचा,

जो हो सके लगाऊँ।

 

खिलें फूल-फल, चिड़ियाँ बोलें,

प्यारी खुशबू डोले।

ताज़ी हवा जलाशय में

अपना हर अंग भिगो ले।

 

लेकिन एक इंच धरती भी

कहीं नहीं मिल पाई।

एक पेड़ भी नहीं, कहे जो

मुझको अपना भाई।

 

हो सकता है पास, तुम्हारे

अपनी कुछ धरती हो

फूल-फलों से लदे बगीचे

और अपनी धरती हो।

 

हो सकता है छोटी-सी

क्यारी हो, महक रही हो

छोटी-सी खेती हो जो

फसलों में दहक रही हो।

 

हो सकता है कहीं शांत,

चौपाए घूम रहे हों।

हो सकता है कहीं सहन में,

पक्षी झूम रहे हों।

 

तो विनती है यही,

कभी मत उस दुनिया को खोना

पेड़ों को मत कटने देना,

मत चिड़ियों को रोना।

 

एक-एक पत्ती पर हम सब

के सपने सोते हैं।

शाखें कटने पर वे भोले,

शिशुओं सा रोते हैं।

 

पेड़ों के संग बढ़ना सीखो,

पेड़ों के संग खिलना

पेड़ों के संग-संग इतराना,

पेड़ों के संग हिलना।

 

बच्चे और पेड़ दुनिया को

हरा-भरा रखते हैं।

नहीं समझते जो, दुष्कर्मों

का वे फल चखते हैं।

 

आज सभ्यता वहशी बन,

पेड़ों को काट रही है।

जहर फेफड़ों में भरकर

हमं सब, को बांट रही है।

-सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

हम धरती के लाल

Hindi Poem For Class 7

 

देश हमारा, धरती अपनी,

हम धरती के लाल।

नया संसार बसाएँगे,

नया इंसान बनाएँगे।

 

सुख-स्वप्नों के स्वर गूंजेंगे,

मानव की मेहनत पूजेंगे।

नयी कल्पना, नयी चेतना की

हम लिए मशाल-

समय को राह दिखाएँगे।

 

एक करेंगे हम जनता को,

सीचेंगे समता ममता को।

नयी पौध के लिए पहन कर

जीवन की जयमाल-

रोज त्योहार मनाएँगे।

 

सौ-सौ स्वर्ग उतर आएँगे,

सूरज सोना बरसाएँगे,

दूध पूत के लिए बदल देंगे

तारों की चाल-

नया भूगोल बनाएँगे।

नया संसार बसाएँगे।

-शील

पानी और धूप

Hindi Poem For Class 7

 

अभी अभी थी धूप, बरसने

लगा कहाँ से यह पानी

किसने फोड़ घड़े बादल के

की है इतनी शैतानी।

 

सूरज ने क्यों बंद कर लिया,

अपने घर का दरवाज़ा।

उसकी माँ ने भी क्या उसको,

बुला लिया कहकर आजा।

 

जोर-जोर से गरज रहे हैं,

बादल हैं किसके काका।

किसको डांट रहे हैं, किसने,

कहना नहीं सुना माँ का।

 

बिजली के आँगन में अम्मा,

चलती है कितनी तलवार।

कैसी चमक रही है फिर भी

क्यों खाली जाते हैं वार।

 

क्या अब तक तलवार चलाना

माँ वे सीख नहीं पाए।

इसीलिए क्या आज सीखने

आसमान पर हैं आए।

 

एक बार भी माँ यदि मुझको

बिजली के घर जाने दो

उसके बच्चों को तलवार

चलाना सिखला आने दो।

 

खुश होकर तब बिजली देगी,

मुझे चमकती सी तलवार।

तब मां कोई कर न सकेगा,

अपने ऊपर अत्याचार।

 

पुलिसमैन अपने काका को

फिर न पकड़ने आएँगे

देखेंगे तलवार दूर से ही,

वे सब डर जाएँगे।

 

अगर चाहती हो माँ काका

जाएँ अब न जेलखाना

तो फिर बिजली के घर मुझको

तुम जल्दी से पहुँचाना।

 

काका जेल न जाएँगे अब

तुझे मँगा दूँगी तलवार

पर बिजली के घर जाने का

अब मत करना कभी विचार।

-सुभद्रा कुमारी चौहान

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