Top 31+ Best Poem On Environment In Hindi | पर्यावरण पर सुंदर कविता

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Poem On Environment In Hindi | पर्यावरण दिवस पर सर्वश्रेष्ठ कविता (Paryavaran Par Kavita) आओं हम सब मिल कर धरती को हरा भरा बनाएं | Environment day poem in hindi

 

Poem On environment in hindi

 

पर्यावरण

Poem On Environment

 

इंसान की देखो कैसी माया,

पर्यावरण को खूब सताया।

देश को आगे ले जाने,

पेड़ काट उन्हें खूब रुलाया।

 

देश में अनेक कारखाने खुलवाये,

पर नदियों में गंदे जल बहाये।

देखो प्रकृति कैसे असंतुलित हो गई,

ठंडी में गर्मी और गर्मी में बारिश हुई।

 

हुआ बादलों में धुओं का बसेरा,

पता नहीं अब कब होगा शुद्ध सवेरा।

जंगल नष्ट कर जानवरों को बेघर कर दिए,

अपने स्वार्थ में पर्यावरण नष्ट कर दिए।

 

पेड़ काटने एक आदमी आया,

धूप है कहकर उसी के छाँव में बैठ गया।

पेड़ बचाओ कहते हम थकते नहीं,

और एक इंसान को पेड़ काटने से रोकते नहीं।

 

बातों पर अमल कर,

प्रदूषण को दूर भगाएँ।

चलो शुद्ध और,

स्वस्थ पर्यावरण बनाएँ।

-लवली यादव

 

पर्यावरण सुरक्षा

Poem On Environment

 

पर्यावरण सुरक्षित रखना है कर्त्तव्य हमारा।

क्षिति, जल, पावक, गगन, पवन मिल,

पर्यावरण सजाते।

सफल सृष्टि के संचालन को,

ये सन्तुलित बनाते।।

 

वातावरण विशुद्ध न रुकने दे विकास की धारा।

पर्यावरण सुरक्षित रखना, है कर्त्तव्य हमारा।।

जल, ध्वनि, वायु प्रदूषण सब पर,

करना हमें नियंत्रण।

वृक्ष काटकर हम विनाश को,

दें न खुला आमंत्रण।।

 

हो परिवेश हमारा पावन, यही एक हो नारा।

पर्यावरण सुरक्षित रखना है कर्त्तव्य हमारा।।

जीव-जन्तुओं की रक्षा का,

हम दायित्व निभायें।

उनके प्रति अपने अन्तर में,

करुणा भाव जगायें।।

 

कोई प्राणी कष्ट न पाये, हम लोगों के द्वारा।

पर्यावरण सुरक्षित रखना है कर्त्तव्य हमारा।।

क्षरण न हो ओजोन परत का,

हो कल्याण भुवन का।

मानवता का रहे निहित हित,

लक्ष्य बने जीवन का।।

 

रहे संयमिता धरा, सिन्धु,

नभ सुखमय हो जग सारा।

पर्यावरण सुरक्षित रखना, है कर्तव्य हमारा।।

-विनोद चन्द्र पाण्डेय

 

धरती हरा भरा बनाएं

Poem On Environment In Hindi

 

आओ हम सब मिल कर

धरती को हरा भरा बनाएं।

कम से कम एक पेड़

अपने हाथों से लगाएं।

 

गर्मी सूखा आक्सीजन से,

हम सब छुटकारा पाएं।

बाग बगिचा जंगल,

मिल जुल कर लगाएं।

 

विश्व पर्यावरण दिवस का,

आओ हम मान बढ़ाएं।

अपने स्कूल कालेज में,

एक एक पेड़ लगाएं।

 

सड़को के किनारे फिर से,

हम नया पेड़ लगाएं।

हर मुसीबत से हम,

मिल कर छुटकारा पाएं।

 

छांव और ठंडी हवा,

खूब देते हमको पेड़।

हम सब की सारी मुसीबत,

हर लेते हैं पेड़।

 

पांच जून को हर साल,

विश्व पर्यावरण दिवस है आता।

पेड़ लगाने की घूम,

हर जगह मच जाता।

-बद्री प्रसाद वर्मा

 

पर्यावरण-संरक्षण

Poem On Environment

 

हम जिस ‘भौगोलिक’ स्थिति में,

जीवन-यापन करते हैं।

‘बुधियों’ ने दी संज्ञा उसे,

जिसे पर्यावरण हम कहते हैं।।

 

विधि के अनमोल-खजाने में,

हर प्राणी का हिस्सा है।

रवि, शशि, तारे, अम्बर औ वन,

सब कहते अपना किस्सा है।।

 

कलयुग-कल, वाहन-वाष्पो से,

सारे जग में है छाया धुआँ ।

जो जीवन-दायनी थी वायु,

उसमें है कैसा यह जहर घुलाँ?

 

मत दूषित कर अब उसको तू,

मत उसमें और ना दाग लगा।

‘गंगा’ पहले से है ‘मैली’,

अब उसमें और ना ‘मैल’ बढ़ा।।

 

स्वार्थी मानव का कुत्सित मन,

संहार प्रकृति का नित करता।

जब प्रकृति दिखाती रौद्र रूप,

अपनी ‘करनी’ पर वह मरता।।

 

‘मानव’ औ ‘प्रकृति’ की दूरी जो,

दिन प्रति दिन बढ़ती जाएगी।

आएगा, ऐसा एक दिन फिर वह,

जब ‘भूख’ स्वयं को खाएगी।।

-उमा गुप्ता

 

पर्यावरण

Environment Day Par Kavita

 

वृक्ष लगाओ, पर्यावरण बचाओ

ये संदेश फैलाना हैं।

 

पर्यावरण को शुद्ध बना के,

जीवन को स्वस्थ बनाना है।

 

मत काटो पेड़ों को तुम,

इस पर किसी का बसेरा हैं।

 

इसके दम पर सांसे चलती

नित आता नया सबेरा हैं।

 

नयी पीढ़ी से ये अनुरोध,

सब मिलकर वृक्ष लगाओ।

 

पेड़ों की रक्षा तुम करके,

पर्यावरण सुरक्षा में हाथ बढाओं।

 

चारों तरफ हरियाली हों,

हर घर में खुशहाली हों।

 

सुन्दर सा एक दृश्य बनाऐ,

हर घर आँगन वृक्ष लगाऐ।

 

आओ पर्यावरण बचाने का,

मिलकर हम संकल्प उठाऐ।

-प्रतिभा त्रिपाठी

 

पर्यावरण गीत

Poem On Environment In Hindi

 

मन, आंगन निर्मल हो अपना,

पर्यावरण धवल हो अपना।

आओ जीवन ज्योति जगाएं,

वातावरण को स्वच्छ बनाएं।

 

पहले अपने घर से ही शुरुआत करें,

गाँव नगर की स्वच्छता की बात करें।

जिधर भी देखें एक चमक हो,

धरती का कण कण जगमग हो।

 

आज से अच्छा कल हो अपना,

पर्यावरण धवल हो अपना।

साफ सफाई रहेगी तो हम स्वस्थ रहेंगे,

तन्दुरुस्ती रहेगी तो हम मस्त रहेंगे।

 

हम खुद सुधरेंगे तो समाज सुधारेंगे,

आने वाले वक्त को आज सुधारेंगे।

सुरभित राजकमल हो अपना,

पर्यावरण धवल हो अपना।

 

कचरा तो खाद बनाने के काम आएगा,

फिर उवर्रक बनेगा, फूल खिलाएगा।

नयी चेतना वातावरण में लाएंगे,

नयी बहारों से घर द्वार सजाएंगे।

 

अब पूरा होगा ये सपना,

पर्यावरण धवल हो अपना।

-डॉ. योगेश प्रवीन

 

पर्यावरण संरक्षण

Poem On Environment In Hindi

 

प्रदूषित हो रहा वातावरण,

परिवर्तित हो रहा पर्यावरण।

प्रकृति ने भी सुंदरता खोई,

जब जब वृक्ष कटे धरती रोई।

 

कारखानों ने नियम न माने,

निदियों में विषैले जल छोड़े।

जल ने अपनी सुचिता खोई,

स्वच्छ जल की आपूर्ति नहीं।

 

बीमारियाँ हर ओर घिर आईं,

अब शुद्ध हवा न मिल पाती।

साँस हमारी घुटती ही जाती,

आने वाली पीढ़ी को शायद।

 

प्राणवायु भी मिल पाए नहीं,

ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर।

शायद कुछ दिन वो जी पाएँ,

कार, ए.सी, फ्रीज़ चलाकर।

 

नित पर्यावरण का करें अहित,

अब भी न हम जाग सके तो,

समझो आनी प्रलय है निश्चित।

आओ मिलकर ये प्रण लें हम,

रक्षा पर्यावरण की करें हरदम।

-नीलम द्विवेदी

 

पर्यावरण

Poem On Environment In Hindi

 

दोहन करते हैं प्रकृति का,

पर्यावरण दिवस मनाते हैं।

लगाते नहीं दो चार पेड़ हम,

भरपूर ऑक्सीजन चाहते हैं।

 

काट-काट कर वन-जंगल को,

कंक्रीटों का जंगल बनाते हैं।

बिगाड़ रहे प्रकृति का संतुलन,

हम पर्यावरण दिवस मनाते हैं।

 

विकास के नाम पर होती कटाई,

पेड़-पौधों की होती है छटाई।

रेष तालाब-पोखर की हो रही भराई,

तब पर्यावरण कैसे बचेगा मेरे भाई।

 

समतल करें नहीं अब पहाड़ कहीं भी,

फेंके नहीं कचरा कोई नदियों में भी।

पर्यावरण बचाना ही धर्म-कर्म हमारा,

इससे ही वर्तमान सबका भविष्य भी।

-दिनेश चन्द्र प्रसाद

 

विश्व पर्यावरण दिवस

Poem On Environment In Hindi

 

चिलचिलाती धूप उफ्फ ये चुभती गर्मी,

ये तो है ऋतु परिवर्तन के कारण ही है।

लेकिन इसके कारक हम स्वयं हैं,

प्रकृति से चल रही छेड़छाड़।

 

विलासिता सुख भोग की,

मानव की है अब चाह।

मानव कृत प्रदूषण की भरमार,

कटते वन बढ़ती पालीथिन।

 

कल-कारखानों से जनित विषाक्त कचरा,

वाहनों के द्वारा निकलता धुआँ।

ए.सी, कूलर एवम फ्रिजों द्वारा,

उत्सर्जित जहरीली गैसों का प्रभाव।

 

क्षरित होती ओजोन परत, पिघलते ग्लेशियर,

इन सबके पीछे सुखभोगी मानव ही है,

जो हरदम तोड़ रहा है प्रकृति के नियम।

परिणाम झेल रहा है।

 

भीषण ताप यदि यूं ही होता रहा।

प्रकृति के संसाधनों का अतिशय,

शीघ्र ही समझिये धरा का होगा समापन।

एक दिन धरा पर बढ़ जाएगा इतना ताप,

सब कुछ हो जाएगा समाप्त।

-डॉ मीना कुमारी

पर्यावरण

Hindi Poem On Environment In Hindi

 

तरक्की की दौड़ में हैवान,

बन गया है इंसान।

धरती माता का भूलकर एहसान,

कर रहा अपना ही नुकसान।

 

भूला नर पर्यावरण है ईश का वरदान,

नहीं कर रहा धरती का सम्मान।

नष्ट कर रहा पृथ्वी जल और वन,

पेड़ पौधे और पशुधन।

 

वन से संभव है जनजीवन,

हरे भरे हो जब तक वन उपवन।

तब तक है सुरक्षित सबका जीवन,

वसुधा का आवरण यह पर्यावरण।

 

प्रण लेकर करना होगा इसका संरक्षण,

पर्यावरण जब दूषित हो जाएगा।

फिर मानव स्वस्थ कहाँ रह पाएगा,

जब हवा विषैली हो जाएगी।

 

प्राण दायी वायु कहाँ रह पाएगी।,

ओजोन परत फट जाएगी।

धरती सारी मिट जाएगी,

फिर बोलो कैसे जी पाओगे,

अपनी करनी पर पछताओगे।

-रमा बहेड

 

पर्यावरण संरक्षण

Poem On Save Environment In Hindi

 

हे मानव अब तो समझो,

धरा पर अत्याचार मत करो।

पेड़ों की कटाई को रोको,

पेड़ों के महत्व को समझो।

 

पेड़ इस तरह काटते रहे,

तो ऑक्सीजन कहाँ से लेंगे?

पर्यावरण शुद्ध कैसे रहेगा?

प्रकृति पर अत्याचार मत करो।

 

जल को व्यर्थ न बहाओ,

नदियों के जल को दूषित न करो।

प्लास्टिक का परित्याग करो,

प्रकृति का संरक्षण करो।

 

धरा की हरियाली का संरक्षण करो,

अब हरित क्रांति लाएंगे।

जगह-जगह वृक्ष लगाएंगे,

हे मानव तुम संकल्प करो।

 

वर्ष में पांच वृक्ष अवश्य लगाएंगे,

स्वस्थ जीवन के लिए अब हम,

पर्यावरण का संरक्षण करेंगे।

-डॉ. शम्भू पंवार

 

पर्यावरण की व्यथा

Poem On Save Environment

 

साँस थमने लगी, मर रही है हवा,

दम घुटा जा रहा, मिल रही ना दवा।

जीना दूभर हुआ, ख़तरे में ज़िन्दगी,

पेड़ सब कट गए, अब बची ना दुआ।

 

देख लो आज तुम, क्या से क्या हो गया,

खो गया चैन अब, सब अमन खो गया।

कट गए वन, हरापन, सभी लुट गया,

कितना सुंदर था मेरा, वतन रो गया।

 

हम बढ़े आगे पर, पेड़ कटने लगे,

बन गईं बिल्डिंगें, खेत घटने लगे।

यह हुई ना ख़बर, हम रहे नींद में,

अपने हाथों ही हम, अब तो मिटने लगे।

 

पेड़ से दोस्ती, कोई करता नहीं,

माँग धरती की कोई भी भरता नहीं।

दर्द कुदरत का, बढ़ता ही तो जा रहा,

कोई भी इसकी पीड़ा को हरता नहीं।

 

कहीं दरिया प्रदूषित है, कहीं तालाब हैं गंदे,

कहीं है शोर डीजे का, कहीं पन्नी के हैं धंधे।

कहीं है धूल और बढ़ता धुंआ, वाहन करें हल्ला,

हुये बहरे यहाँ, अंधे भी, देखो आज के बंदे।

-शरद नारायण खरे

 

 

 

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