27+ लाल बहादुर शास्त्री पर कविता | Poem On Lal Bahadur Shastri In Hindi

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Poem On Lal Bahadur Shastri In Hindi :- “जय जवान जय किसान” यह सुप्रसिद्ध नारा दिया था। लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर, 1904 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से सात मील दूर एक छोटे से कस्बे मुगलसराय में हुआ था। उनके पिताजी एक स्कूल शिक्षक थे।

जब लाल बहादुर केवल डेढ़ वर्ष के थे, तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। उनकी माँ को अपने तीन बच्चों के साथ अपने पिता के यहाँ जाना पड़ा था। वहाँ से लाल बहादुर को वाराणसी में उनके चाचा के घर भेज दिया गया, ताकि वे शिक्षा प्राप्त कर सकें।

“स्वतंत्रता का संरक्षण केवल सैनिकों का कार्य नहीं है, इसके लिए पूरे देश को मजबूत होना होगा।” ऐसे विचार रखने वाले लाल बहादुर शास्त्री जी भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री थे। लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म के उपलक्ष्य में आज के पोस्ट में हम यहां पर उनके योगदान और भारत की अटुट निष्ठा भावना से सेवा करते रहे हैं। हम यहां लाल बहादुर शास्त्री जी पर (Lal Bahadur Shastri Par Kavita) बहुत ही सुंदर कविता प्रस्तुत कर रहे हैं।

 

Poem On Lal Bahadur Shastri In Hindi

 

लाल बहादुर शास्त्री

Table of Contents

Poem On Lal Bahadur Shastri

 

जय जवान और जय किसान का,

दिया देश को नारा।

स्वाभिमान और सदाचार से,

ऊँचा शीश हमारा।।

 

कभी नहीं भोगा सुविधा को,

रहा फकीरी चोला।

थे वामन अवतार, दिखाता

मुखड़ा भोला-भाला।।

 

खुद प्रधानमंत्री रह कर के,

भवन नहीं ले पाये।

कालिख के घर में रहकर भी,

दाग नहीं लग पाये।।

 

भ्रष्टाचार तनिक भी उनके,

मन को डिगा न पाया।

शिष्टाचार, कर्तव्य, सादगी,

जीवन भर अपनाया।।

 

जन्म हुआ 2 अक्टूबर को,

थे कलियुग के राम।

लाल बहादुर शास्त्री तुमको,

शत शत करें प्रणाम।।

-डॉ० कैलाश गुप्ता

 

दिलों के विजेता

Poem On Lal Bahadur Shastri

 

लाल भी थे, बहादूर भी थे।

देशप्रेम, सेवा में चूर भी थे।

बचपन गुजारी गरीबी में।

पर अशिक्षा ना आई करीबी में।

 

बचपन के नन्हें बने प्रधान।

कहा जय जवान,जय किसान।

हंसोड़, मजाकिया, विनोदी थे।

मातृभूमि की चमकाये गोदी थे।

 

शांत मुखड़ा और टोपी गांधी।

गुजरे उसी दिन जिस दिन गांधी।

अपने नाम को किया सार्थक।

अपने पद को किया सार्थक।

 

उबारा देश को जब था भीषण अकाल।

स्थिति थी देश की अत्यंत विकराल।

जरूरत है फिर ऐसे नेता की।

कर्मठ और दिलों के विजेता की।

-चेतना सिंह

 

व्यक्तित्व था उनका बड़ा महान

Lal Bahadur Shastri In Hindi Poem

 

कद में चाहे छोटे थे,

व्यक्तिव था उनका बड़ा महान।

साहस, सच्चाई रग-रग में,

शास्त्री जी थे आन-बान-शान।

 

सादा जीवन उच्च विचार,

यही थी उनकी पहचान।

उनकी देश भक्ति और निष्ठा,

पर पूरे देश को है अभिमान।

 

जीवन के सूखे मरुथल में,

नित झेले झंझावात कई।

जितने भी बाधा, कंटक आये,

उनसे वे पाये शक्ति नई।

 

1965 की कठिन लड़ाई में,

निर्भयता से हुंकार लगाई थी।

पाक सेना को ललकार,

बड़ी विजय पाई थी।

 

जवानों और किसानों का सम्मान कर,

नारा दिया जय जवान जय किसान।

कद में चाहे छोटे थे,

व्यक्तित्व था उनका बड़ा महान।

-गायत्री पांडेय

 

पहचान

Short Poem On Lal Bahadur Shastri

 

कद छोटा और ज्ञान बड़ा,

मान बड़ा, सम्मान बड़ा।

सहज सरल व्यवहार था,

जरा नहीं अभिमान था।

 

देश के दो खंभों का,

किया सही पहचान था।

जय जवान, जय किसान,

का नारा जितना प्यारा था।

 

देख के अब नजारा ऐसा,

दिल उनका रोता होगा।

खतरे में हैं दोनों नायक,

सीमा पर कोई सड़कों पर।

 

नहीं हुआ कोई दूसरा उन सा,

नरम दिल, भोला भाला सा।

सादा जीवन उच्च विचार,

का आदर्श हमें सीखाया था।

 

मोह नहीं किसी माया से,

चर्चित होने का चाह न था।

स्वयं से पहले देश को देखा,

त्याग का पाठ पढ़ाया था।

-सरिता कुमार

 

देते हमको सुख चैन

Hindi Poem On Lal Bahadur Shastri

 

जय जवान जय किसान,

शास्त्री जी की जान।

जवान देश के प्रहरी हैं,

देते हमको सुख चैन।

 

किसान हमारे अन्नदाता,

देते हमको जीवन प्राण।

शास्त्री जी कहलाते थे,

तभी किसानों के भगवान।

 

शांति का पाठ पढ़ाया,

ईमानदारी उनकी पहचान।

हर दिल में बस जाएं,

हों ऐसे और वीर महान।

 

लाल से तेज चमकता,

उनके चेहरे पर हरदम।

बहादुर से कहलाते थे,

वे बहुत वीर बलवान।

 

व्याख्या उनके नाम की,

होती है अति महान।

अनमोल रत्न हो तुम,

देश की हो शान।

 

जान गंवाकर बचाई,

तुमने भारत की आन।

किए सद्कर्म ऐसे,

जिससे बढ़ाया देश का मान।

 

आजादी की लड़ाई में,

किए बड़े बड़े काम।

भारत में मिला उन्हें,

एक अनोखा सम्मान।

 

छल किया दुश्मन ने और

ले गये उनकी जान।

ऐसे देशभक्त को हरदम,

याद करेगा जहान।

 

ऐसे देशभक्त तो होते हैं,

देश का अभिमान।

जय जवान जय किसान,

शास्त्री जी की जान।

-सुशी सक्सेना

 

ऐसे थे हमारे शास्त्री जी

Lal Bahadur Shastri In Hindi Poem

 

सीमा पर तैनात सैनिक हैं,

जिसने किया उनका वंदन है।

वह महापुरुष शास्त्री जी हैं,

जिनका हम करते अभिनंदन हैं।

 

जय किसान का नारा दिया था,

अन्नदाता का सम्मान किया था।

देश की ज्वलंत समस्याओं का,

चुटकियों में निराकरण किया था।

 

सत्यता, निष्ठा और दृढ़ता वाले,

उज्ज्वल चरित्र के वे स्वामी थे।

सादा जीवन और उच्च विचार थे,

द्वितीय प्रधानमंत्री बड़े महान थे।

 

ताशकंद में समझौता करने गए थे,

मौत का साया मंडराया था।

विमान में लौटा था पार्थिव शरीर,

पूरा देश शोकसागर में डूबा था।

 

जीवन बड़ा ही अल्पकाल था,

मातृभूमि के काम आए थे।

लोगों के हृदयों में शास्त्री जी,

सदा के लिए समा गए थे।

-अर्चना वालिया

 

वतन का लाल

Lal Bahadur Shastri Par Kavita

 

शास्त्री जी को नित सदा,

आओ हम शीश नवाएं।

भारत मां के राजदुलारे,

पर श्रद्धा के फूल चढाएं।।

 

पिता शारदा मात दुलारी,

आंगन वो था मुगलसराय।

थे परिवार में सबसे छोटे,

नन्हें कहके उनको बुलाय।।

 

पैसठ वाली जंग में उनने,

पाक हिन्द से हारा दिया।

जय जवान जय किसान,

का नारा दे सम्मान दिया।।

 

अनाज संकट हुआ देश में,

उनने बागड़ोर थामी थी।

एक वक्त उपवास रहे सब,

कोई कमी नहीं आनी थी।।

 

वतन वैरी को धूल चटा,

कर कर दिया था कमाल।

रहस्यमय समझौते में वो,

सो गया वतन का लाल।।

-जितेन्द्र देवतवाल

 

देश के लाल

Poem On Lal Bahadur Shastri

 

जय जवान और जय किसान,

से गूंज गया था हिंदुस्तान।

है नमन मेरा शत-शत उन्हें,

कहते भारत का लाल जिन्हें।

 

सादा जीवन, उच्च विचार,

सदा करते थे सद्वयवहार।

नहीं करते थे देश-व्यापार,

बाँटा करते थे सबको प्यार।

 

नाम उनका लाल बहादुर,

रहते देशसेवा को आतुर।

समझा अर्थ को क्षणभंगुर,

भले कोई समझे न चतुर।

 

ईश्वर हमें देना वह लाल,

दमके जिसका चंद्रभाल।

भारत हो जिस पर निहाल,

देश के वे बहादुर लाल।

-नम्रता कुमारी

 

जन-जन में जोश

Hindi Poetry On Lal Bahadur Shastri

 

मुंशी जी के घर में जन्मे,

रामदुलारी था मां का नाम।

बचपन में छिना पिता का साया,

शास्त्रीकी उपाधि पा हर्षाया।

 

ललिता से विवाह हुआ,

छह संतानों के पालनहार बने।

भारत सेवा संघ से जुड़कर,

राष्ट्र सेवा को उनके कदम बढ़े।

 

मरो नहीं मारो का नारा,

राष्ट में तुमने प्रचंड किया।

भारत छोड़ो आंदोलन में,

क्रांति का दावानल भड़का दिया।

 

पाक युद्ध में बबर शेर बन,

तुमने सब को हिला दिया।

जय जवान जय किसान नारा दे,

जन-जन में जोश जगा दिया।

-अरुण प्रताप सिंह

 

लाल बहादुर शास्त्री

Lal Bahadur Shastri Poetry In Hindi

 

सादा जीवन उच्च विचार

था जिनके जीवन का सार,

वे लाल बहादुर शास्त्री जी

थे प्रधानमंत्री अति उदार।

 

पैदा हुए थे कुटिया में

था साहस, उद्यम, सदाचार,

इसीलिए तो जीवनभर ही

कुटीजन को ही किया प्यार।

 

शिक्षाओं को वेद-शास्त्र की

वे किए हुए थे अंगीकार,

यही कामना थी हृदय में

परिवार बनें- आर्य परिवार।

 

दुश्मन के हुए हौसले पस्त

मानी थी अपनी हार,

‘ताशकन्द समझौता’ करके

रोका था वह संहार।

 

‘जय जवान, जय किसान’ का

वह मंत्रदाता वह कलाकार,

‘विजयघाट’ में सोया है

वह आर्यावर्त्त का कर्णधार।

-प्रियवीर हेमाइना

 

जय जवान

Lal Bahadur Shastri Poem In Hindi

 

दो अक्टूबर भू पर आए।

लाल बहादुर नाम कहाए।।

करुणा ही हिय सदा समाई।

सादा रह जग रीत निभाई।।

 

जय जवान जय किसान नारा।

शास्त्री जी को सदा प्यारा।।

अनमोल रत्न कहता भारत।

सभी काम में उन्हें महारत।।

 

जनक इनके शारदा महान।

शीश नवाता सारा जहान।।

माता इनकी रामदुलारी।

प्यार करें इन्हें दुनियाँ सारी।।

 

दो अक्टूबर आया प्यारा।

आनंदित हों देश हमारा।।

पद प्रधानमंत्री का पाया।

लालच तनिक ने मन को भाया।।

 

मीत बने थे मानव सारे।

उपाधि शास्त्री दें पुकारे।।

सर्वोपरि था धर्म ईमान।

ताशकंद रुस हुए कुर्बान।।

-अलका जैन

 

जैसे चाँद-सितारा

Poem On Lal Bahadur Shastri In Hindi

 

जय जवान और जय किसान

शास्त्री जी का नारा था।

भारत माता का वह गौरव

जैसे चाँद सितारा था।

 

कुर्ता धोती गांधी टोपी,

मन भी उनका सादा था।

देश – प्रेम और समरसता

अंदर से उनमें जागा था।

 

सन पैसठ की जंग में वो

पाक को धूल चटाए थे।

जग में भारत की ताकत को

देखो वो दिखाए थे।

 

छोटा कद था पर सोच बड़ी

न बाधाओं से डरते थे।

ज्ञान ज्योति के बलबूते वो

बैरी से सीधे लड़ते थे।

 

इतनी बड़ी शख्सियत को हम

कभी भुला नहीं पायेंगे।

कोटि कोटि नमन है उनको

हम भी चमन सजायेंगे।

-रामकेश यादव

 

शास्त्री जी

Short Poem On Lal Bahadur Shastri

 

2 अक्टूबर 1904 को जन्में,

महान सेनानी शास्त्री जी।

उत्तर प्रदेश जन्म स्थान।

स्वतंत्रता की लड़ाई में,

आंदोलन में कीए प्रस्थान।

 

शास्त्री जी 16 वर्ष की आयु में,

पढ़ाई छोड़ कूद पड़े आंदोलन में।

लालबहादुर शास्त्री जी थे,

बहादुर दृढ़ निश्चय वाले।

 

बाहर से विनम्र दिखते,

अंदर से मजबूत चट्टान।

गांधी जी के आंदोलन में,

शास्त्री जी शामिल हुए।

अपनी क्षमता का दिए योगदान।

 

गांधी जी शास्त्री जी के गुरु थे।

शास्त्री जी आदर्शवादी थे।

शास्त्री जी अपने गुरु के,

विचारों को कीए सम्मान।

लालबहादुर शास्त्री जी को,

भारत में मिला श्रेष्ठ पहचान।

-ऋचा कुशवाहा

 

देशभक्त महान

Lal Bahadur Shastri Hindi Poem

 

भारत भूमि के वे देशभक्त महान,

था सादा जीवन और उच्च विचार।

बीता देशसेवा परोपकार में जीवन,

उनके सुन्दर-सरल व्यक्तित्व का प्रमाण।

 

2 अक्टूबर 1904 को जन्म लिया था,

धन्य हुई उत्तर प्रदेश की पावन भूमि।

मुगलसराय बना उनका जन्म-स्थान,

शहर की देश मे बनी एक अलग पहचान

स्वतंत्र भारत के प्रसिद्ध राजनेता महान।

 

शांति की प्रतिमूर्ति लाल बहादुर शास्त्री,

थे आजाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री।

ग्रहण किया काशी विद्द्यापीठ से उपाधि,

छोड़ जातिगत उपनाम बन गए शास्त्री।

 

शारदा प्रसाद रामदुलारी देवी के लाल थे,

कद छोटा ऊँची सोच शास्त्रीजी बेमिसाल थे।

देश मे पड़ा था अकाल भुखमरी के कगार,

शास्त्रीजी ने अन्न छोड़ किया था परोपकार।

 

साधरण धोती-कुर्ता उनका पहनावा था,

साधरण सी वेशभूषा नहीं कोई दिखावा था।

बच्चों को भी संस्कारो से अलंकृत करते थे,

साहस से परिपूर्ण व्यक्तित्व नही कभी डरते थे।

 

करते थे सम्मान किसानों का अन्नदाता कहते थे,

दिया जय जवान और जय किसान का नारा।

-शशिलता पाण्डेय

 

दुश्मन भी घबराया

Poem On Lal Bahadur Shastri

 

जय जवान का नारा देकर

जग का मान बढ़ाया है,

देखकर तेरी ताकत को

दुश्मन भी घबराया है,

मौन रहकर अपनी बात बता डाला,

देखकर तुझको अंग्रेजी हुकूमत थर्राराता है।।

 

जनमानस का तम हर करके,

देश का मान बचाया है,

गलियों गलियों में जा करके,

आजादी का डंका बजाया है।

 

विषम परिस्थिति थी भारत की,

फिर भी हासिल की आजादी,

राष्ट का गौरव बन करके,

देश का मान बढ़ाया है।।

 

जन्म लिया 2 अक्टूबर को,

जो अंग्रेजों का काल हुआ,

वो मेरे जग के प्यारे,

शारदा जी का लाल हुआ।

 

रामदुलारी मां हैं जिनकी,

उल्लेखनीय उनकी बातें हैं,

लाल बहादुर शास्त्री, जिनका,

वाराणसी धाम हुआ।।

 

नन्हा बच्चा जो अपने,

उम्मीदों पर खरा जरूर हुआ,

असहयोग आंदोलन में जाकर,

दुश्मन का नासूर हुआ।

 

दृढ़ता थी चट्टानों सी,

प्रतीकात्मक इशारे ले करके,

अभियानों को धार दे दिया,

दुश्मन भी बेचैन हुआ।।

 

अग्रसर रहा अपने पथ पर,

विचलित कभी न होना था,

मातृभूमि थी उनको प्यारी,

उनके चरणों में सोना था।

 

जय जवान जय किसान का नारा,

ले करके आह्वान किया,

सारे जग में शास्त्री जी का,

गुणगान होना था।।

-प्रभात कुमार

 

भारत मां के लाल

Hindi Poetry On Lal Bahadur Shastri

 

हैं नमन आपको बार बार,

हे दृढ़ संकल्पी शक्तिवान।

जय लाल बहादुर शास्त्री जी,

जय जय जवान,जय जय किसान।।

 

ईमानदार, सिद्धांतवादी,

रहे आप सदा संकल्पवान।

दुर्घटना ट्रेन की होने पर,

छोड़ा मंत्री पद ससम्मान।।

 

दुश्मन को धूल चटाई तो,

व्यक्तित्व चमक उठा महान।

समझौता ताशकंद वाला,

ले बैठा शास्त्री जी की जान।।

 

दायित्व मिला जो भी जैसा,

उसको हिम्मत संग निभा गये।

घबराओ मत, संघर्ष करो,

निज कर्मों से यह बता गये।।

 

सचमुच भारत के लाल आप,

दे गये देश को नव विहान।

जय लाल बहादुर शास्त्री जी,

जय जय जवान,जय जय किसान।।

-डॉ.अनिल शर्मा

 

मातृभूमि का पुजारी

Poem On Lal Bahadur Shastri In Hindi

 

मातृभूमि का पुजारी था वो,

मुगलसराय में जन्मा था वो।

शिक्षक का बेटा था वो,

जन-जन का दुलारा था वो।

 

बचपन में नंगे पैर दौड़ा था वो,

आजादी का उजाला था वो।

जन जागृति था वो,

भारत माता के लिए लड़ा था वो।

 

छोटे कद-काठी का था वो,

लेकिन कर्म से बड़ा था वो।

जय जवान जय किसान नारे का जन्मदाता था वो,

शास्त्री नाम का देशभक्त था वो।

 

भारत की रक्षा के लिए खड़ा था वो,

1965 में भारत का गौरव बना था वो।

समझौता कराने गया था वो,

पाकिस्तान में मौन पड़ा था वो।

 

मिट्टी का लाल मिट्टी में मिल गया था,

भारत माता का सच्चा सपूत था वो।

-श्रीमती राधा दुबे

 

भारत से करते थे प्यार

Short Poem On Lal Bahadur Shastri

 

सादा जीवन उच्च विचार,

जो भारत से करते थे प्यार

कैसा भी संकट आ जाए।

 

रहते थे हरदम तैयार

छोटा कद पर लक्ष्य बड़ा था

जो हर मुश्किल में साथ खड़ा था

हौसला बढ़ाने सैनिकों का।

 

जो सैनिकों के साथ लड़ा थाद्य

जय किसान जय जवान शास्त्री जी ने नारा दिया,

भारत मां के सच्चे लाल है,

शास्त्री जी ने बतला दिया।

 

ताशकंद समझौते में भारत माने

अपने लाल को खोया था।

उस दिन भारत मां का हर बच्चा,

अपने लाल के लिए रोया था।

 

लाल बहादुर शास्त्री जी,

थेद्य भारत मां के अनमोल रतन

आपके आदर्शों पर चलकर,

करते हैं हम तुम्हें नमन।

-दिलीप कुमार शर्मा

 

वो शास्त्री जी ही थे

Hindi Poem On Lal Bahadur Shastri

 

मानवता का पाठ पढ़ाया

सच्चाई का राह दिखाया

वो शास्त्री जी ही थे।

 

जय जवान जय किसान का नारा

लगाया किसानों संग हल चलाया

वो शास्त्री जी ही थे।

 

बने भारत के प्रधानमंत्री मंत्री द्वितीय

भारत का मान सम्मान बढ़ाया

वो शास्त्री जी ही थे।

 

सरल सभ्य मधुर वाणी जिनकी

सादा जीवन विशाल हृदय के थे

वो शास्त्री जी ही थे।

 

धोती कुर्ता पहनते हरदम वो

कद में छोटे पर हृदय विशाल

वो शास्त्री जी ही थे।

 

रग रग में थी देश भक्ति संत

कहलाते वो सादगी सदा रही

वो शास्त्री जी ही थे।

 

थेराजनवो भारत के हरदम

गर्व करते हैं हम सब जिन पर

वो शास्त्री जी ही थे।

-विनोद ढींगरा

 

भारत के लाल दुलारे

Poem On Lal Bahadur Shastri In Hindi

 

भारत के एक, लाल दुलारे,

जन्म हुआ जिनका, मुगलसराय माये।

डेढ़ वर्ष की आयु में,

हुआ था पिता का देहांत।

 

तभी चले शास्त्री जी,

अपनी माता जी के साथ।

उस छोटे से शहर में था,

शिक्षा का अभाव।

 

तभी मां ने भेजा शास्त्री जी को,

वाराणसी अपने चाचा के पास।

ज्यो ज्यो उम्र बढ़ी शास्त्री जी की,

मन आजादी चिंतन हुई।

 

ग्याहर वर्ष की आयु माय,

राष्ट्रीय स्तर चिंतन मन होई‌।

बापू असहयोग आंदोलन माय,

गांधी ने जब आह्वान चलाया।

 

जब शास्त्री जी ने सोहल वर्ष की आयु में,

पढ़ाई मन चिंतन खोया।

लालबहादुर शास्त्री जी की शादी,

सन एक हजार नौ सौ सत्ताईस(1927) माए।

 

धर्मपत्नी है ललिता बाई,

गांव मिर्जापुर के माए।

सन एक हजार नौ सौ तीस (1930) माय

नमक कानून तोड़,

 बापू दांडी पथ जाए।

 

लाल बहादुर शास्त्री जी के मन में,

दृढ़ ऊर्जा के साथ आंदोलन में शामिल हो जाए।

उनके ही दृढ़ अनुशासन से,

पाकट्ठ हिंद से हारा था।

 

जय जवान और जय किसान,

उनका ही तो नारा था।

-उम्मेद दान चारण

 

माँ भारती का लाल

Poem On Lal Bahadur Shastri

 

2 अक्टूबर 1904 मुगलसराय,

में पिता शारदा प्रसाद माता राम,

दुलारी के घर आंगन में जन्मा एक,

लाल लाल बहादुर शास्त्री।

 

बीच कांटों के खिले फूल थे।

भारत की चमन की तुम बहार थे।

सर्वस्व समर्पण कर भारत के लाल थे।

पहचान न सका तुम्हें ऐसे लाल बहादुर थे।

 

करा आवाहन जनता के बीच।

नहीं लेने दूंगा शर्तों पर अनाज।।

रखवाया जनता से एक दिन का व्रत।

लौट आया भारत का खोया सम्मान।

 

भारत का लाल दुश्मनों का काल था।

बना भारत का द्वितीय प्रधानमंत्री था।

दिया नारा जय जवान जय किसान था।

भारत माँ का चमकता सितारा था।

 

ताशकंद समझौते के बाद सो गया,

चिर निंद्रा में भारत का प्यारा लाल।

भारत रत्न से सुशोभित हुआ।

करता भारत तुझको सदा प्रणाम।।

-बिन्दु सिकन्द

 

शास्त्री जी भारत की शान

Poem On Lal Bahadur Shastri

 

सादा जीवन उच्च विचार,

जिनकी रही यही पहचान।

ऐसे लाल बहादुर शास्त्री थे,

भारत माता की शान।

 

जय जवान जय किसान का नारा,

जन जन की आवाज़ बना।

उच्च विचारों से फिर सबके,

दिलों में उन्होंने राज किया।

 

कर्मठता व उच्च विचारों से,

उनको श्रेष्ठ सम्मान मिला।

प्रधानमंत्री बने देश के,

हर भारतीय को गर्व हुआ।

 

लगन और मेहनत से अपनी,

देश का ऊँचा नाम किया।

अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से,

दुश्मन का काम तमाम किया।

 

माँ भारती के लाल को,

हम सब दिल से याद करें।

उनकी कर्मठता व निष्ठा को,

जीवन में आत्मसात करें।

-गीता पांडे

 

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