Top 33+ Best Poem On Republic Day In Hindi | गणतंत्र दिवस पर कविता

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गणतंत्र दिवस हर भारतवासी के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन होता है। सभी मिलकर इस राष्ट्रीय पर्व को बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं। इस दिन 26 जनवरी को ही भारत का संविधान लागू हुआ था जो हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का नियम का संचालित करता है। देश के स्वतंत्र होने पर भारत के संविधान निर्माण के लिए एक संविधान सभा का गठन किया गया था, जिसमें‌ 299 सदस्य थे। संविधान के निर्माता बाबा भीमराव अम्बेडकर और ‌संविधान सभा के अध्यक्ष प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी थे।

इस संविधान के निर्माण में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन का समय लगा था और 26 जनवरी 1950 से यह संविधान बनकर तैयार हुआ। इसलिए हम 26 जनवरी के दिन को हम सब गणतंत्र दिवस के रुप में याद करते हैं। भारत का संविधान भारत का सर्वोच्च विधान है। भारत के संविधान में मौलिक अधिकार दिये हैं और देश की सारी व्यवस्थाएँ इसी के अनुसार चलती हैं।

यह राष्ट्रीय त्योहार स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष एवं बलिदान का हमें परिचित करवाता है। दूसरी ओर हमें भी प्रेरित करता है कि हम भी देश और समाज की उन्नति के लिए, उसके हित के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहें। गणतंत्र दिवस हमारे मन में कर्तव्य बोध जागृत करता है। हम उनकी संघर्ष एवं बलिदान को हमेशा याद करने के लिए Top 33+ Best Poem On Republic Day In Hindi – गणतंत्र दिवस पर सुंदर कविता आपके साथ साझा कर रहा हूं।

 

गणतंत्र दिवस गान

Poem On Republic Day

 

सबसे सुंदर है गणतंत्र हमारा,

बहुत ऊंचा है इस आसमान से।

दुनिया वाले भी समझ जाएंगे,

कोई देखे तो इसको ध्यान से।

 

सर्दी में जब सोता है दिनकर,

गणतंत्र जागता है बड़ी शान से।

सबसे सुंदर है गणतंत्र हमारा,

बहुत ऊंचा है इस आसमान से।

 

सींचा भारत ने महान् गणतंत्र को,

अपने वीर सपूतों के बलिदान से।

अपनी जान भी है प्यारा सबको,

हर भारतीय कहता है अभिमान से।

 

हम सब लोगों की पहचान आज है,

अपने इस गणतंत्र की, पहचान से।

सबसे सुंदर है गणतंत्र हमारा,

बहुत ऊंचा है इस आसमान से।

 

आकाश में तिरंगा झंडा लहराता है,

बहुत सम्मान और स्वाभिमान से।

मोती बरसते हैं इस दिन धरती पर,

आसमान की अलबेली मुस्कान से।

 

बेहतर नहीं है कोई कोना विश्व का,

गांधी के इस महकते गुलिस्तान से।

सबसे सुंदर है गणतंत्र हमारा,

बहुत ऊंचा है इस आसमान से।

 

गया है पैग़ाम घर घर गणतंत्र का,

हमारे विशाल, अनोखे संविधान से।

समझौता नहीं कर सकते हम कोई,

भारत के इस अतुलनीय वरदान से।

 

गूंज उठता है इस दिन सारा भारत,

अपने मनोहर मधुर राष्ट्र गान से।

सबसे सुंदर है गणतंत्र हमारा,

बहुत ऊंचा है इस आसमान से।

-कृष्णदेव प्रसाद सिंह

 

गणतन्त्र दिवस

Poem On Republic Day

 

जीने का हो एक मन्त्र,

राष्ट्र हमारा रहे स्वतन्त्र।

गणतन्त्र दिवस को पहचानें,

महत्ता इसकी हम जानें,

याद करें कुर्बानी को,

देश हित मिटी जवानी को,

अमर रहे ये गणतन्त्र।।

 

हर वर्ष मनायें ऐसे पर्व,

करें निरन्तर जिसपे गर्व,

घर-घर हर बच्चा हर्षाये,

पुलकित होकर पर्व मनायें।

सफल तभी हो जनतन्त्र।।

 

राष्ट्र ध्वज को फहरायें,

नील गगन में लहरायें,

नमन करें शहीदों को,

रखें दूर विवादों को।

सच्चा होगा लोकतन्त्र।।

 

मिल सभी जन काम करें,

आजादी हित त्याग करें,

जन-जन की भागीदारी हो,

सबकी जिम्मेदारी हो।

राम राज्य हो प्रजातन्त्र।।

-मोती ‘विमल’

 

ले आई छब्बीस जनवरी

Poem On Republic Day

 

भारत का गणतंत्र दिवस का दिन,

ले आई छब्बीस जनवरी।

भारत को अंग्रेजों से मुक्ति,

दिलाई छब्बीस जनवरी।

 

लाल किला पर तिरंगा झंडा,

फहराई छब्बीस जनवरी।

घर घर में आजादी का जश्न,

मनाई छब्बीस जनवरी।

 

भारत को अपनी सत्ता,

दिलवाई छब्बीस जनवरी।

भारत का अपना संविधान,

लागू कराई छब्बीस जनवरी।

 

गांधी नेहरु अम्बेडकर की,

जयकारा लगाई छब्बीस जनवरी।

भारत को आजाद मुल्क,

बनाई छब्बीस जनवरी।

-बद्री प्रसाद वर्मा

 

देश का अंदाज रखना

Poem On Republic Day In Hindi

 

जहां समर्पण की गाथाएँ,

गली गली में गुंजित होती।

जहां प्रेम की कविताएं,

हृदय हृदय में संचित होती।

 

ग्रंथों के मंत्रों से गुंजित,

गंगा का हर घाट रखना।

देश बढ़े जितना भी लेकिन,

देश का अंदाज रखना।।

 

देश के कोने कोने से,

स्नेह भरे संदेशा लाएं।

जाने कितने मौसम लादे,

चलें झूमती मस्त हवाएँ।

 

इनकी खुशबू में ऐसे ही,

मिट्टी वाला स्वाद रखना।

देश बढ़े जितना भी लेकिन,

देश का अंदाज रखना।

 

मात्र नाम न मेरा परिचय,

कई हमारा परिचय गाते।

पहनावे, बोली, भाषाएं,

मिलकर अपना हाल बताते।

 

हम एक अनेकों रंगों में,

ऐसे भाव संभाल रखना।

देश बढ़े जितना भी, लेकिन

देश का अंदाज रखना।

 

यह धरती का भाग सदा,

ऋषियों के मन का आंगन था।

सदियों ने गौरव चूमा है,

मिट्टी का हर कण पावन था।

 

माँ की इसी धरोहर को,

उन्नति का आधार रखना।

देश बढे़ जितना भी, लेकिन

देश का अंदाज रखना।

 

जहां समर्पण की गाथाएँ ,

गली गली में गुंजित होती। 

जहां प्रेम की कविताएं,

हदय हृदय में संचित होती।

 

ग्रंथों के मंत्रों से गुंजित,

गंगा का हर घाट रखना।

देश बढ़े जितना भी, लेकिन

देश का अंदाज रखना।

-संदीप द्विवेदी

 

गणतंत्र के गीत गाएं

26 January Par Poem

सबके अधिकारों का रक्षक,

अपना ये गणतंत्र पर्व है।

लोकतंत्र ही मंत्र हमारा,

हम सबको इस पर ही गर्व है।।

कांटों में भी फूल खिलायें,

इस धरती को स्वर्ग बनायें।

आओ, सबको गले लगायें,

हम गणतंत्र का पर्व मनायें।।

नीले नभ में फर-फर फहरे,

विश्व-विजयी तिरंगा प्यारा।

देश शान्ति का बने चमन ये,

चहुँ दिशा फैले उजियारा।।

खुशी मनाएं सब मिलकर के,

गणतंत्र के गीत सुनाएं।

देश की ताकत और बढ़ाने,

भेदभाव सब भूलते जाएं।।

-राजकुमार

तिरंगा

Poem On Republic Day

तीन रंगों से सजा हुआ,

है भारत की शान।

हम सब की पहचान वो,

तिरंगा जिसका नाम।

केसरिया सफेद हरा,

तीन हैं जिसके रंग।

उन्नति का संदेश देता,

चक्र भी जिसके संग।

लहराता आसमान पर,

है निराली शान।

वीर सपूतों की याद दिलाता,

तिरंगा जिसका नाम।

ऐसे न्यारे झंडे पर,

है मुझको अभिमान।

भारतीयों की जान है वो,

तिरंगा जिसका नाम।

-गिरजाशंकर अग्रवाल

ऐसा गणतंत्र हमारा हो

Republic Day Par Kavita In Hindi

जात-धर्म का भेद ना समझे,

देश में सबका प्यारा हो।

दूर करें हर तम जीवन से,

उज्ज्वल गणतंय हमारा हो।

पूरब से पश्चिम को भाए,

उत्तर से दक्षिण को भाए।

बना रहे हरदम अखंड वह,

सारी दुनिया में न्यारा हो।

पराधीनता को वह त्यागे,

न्याय के पथ पर सबसे आगे।

रहे सदा बस इक मशाल वह,

ज्योतिर्मय एक धारा हो।

केंद्र से लेकर दूर परिधि का,

शासन बना रहे बस विधि का।

अन्याय के असुर को मारे,

सहचर सदा हमारा हो।

-श्रवण कुमार सेठ

गणतंत्र दिवस

Poem On Republic Day

26 जनवरी को

मनाते हैं गणतंत्र दिवस

खुशियों से झूमता है

हर भारतीय मानस

वीर बलिदानियों को

याद करते हैं आज

बच्चा-बच्चा शान से

तिरंगा है लहराता

इसी दिन

लागू हुआ था संविधान

इसकी रक्षा करेंगे

चाहे देनी पड़े जान

हर बूढ़े-बच्चे के

चेहरे पर हो अनुपम मुस्कान

आओ झूमें नाचे गाएं

देश का मान बढ़ाएं

गणतंत्र की खूबियां

जन-जन तक पहुंचाएं

-कल्याणमय आनंद

अधिकार और कर्तव्य

Poem On Republic Day

माह जनवरी छब्बीस को हम,

सब गणतंत्र मनाते।

और तिरंगे को फहराकर,

गीत खुशी के गाते।।

संविधान आजादी वाला,

बच्चों इस दिन आया।

इसने दुनिया में भारत को,

नव गणतंत्र बनाया।।

क्या करना है और क्या नहीं?

संविधान बतलाता।

भारत में रहने वालों का,

इससे गहरा नाता।

यह अधिकार हमें देता है,

उन्नति करने वाला।

ऊँच नीच का भेद न करता,

पंडित हो या लाला।।

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई,

सब हैं भाई भाई।

सबसे पहले संविधान ने,

बात यही बतलाई।।

देश हमारा रहें कहीं हम,

काम सभी कर सकते।

पंचायत से एम. पी. तक का,

हम चुनाव लड़ सकते।।

लेकर सत्ता संविधान से,

शक्तिमान हो सकते।

और देश की इस धरती पर,

जो चाहे बो सकते।।

लेकिन संविधान को पढ़कर,

मानवता को जानो।

अधिकारों के साथ जुड़े,

कर्तव्यों को पहचानो।।

-डॉ परशुराम शुक्ल

अपना वतन

Poem On Republic Day In Hindi

मन में महके मिट्टी खुशबू,

तन में चहके इस धरती का रंग।

इस मातृभूमि की सेवा के लिए,

हर दिल में रहे नया जोश- उमंग।

रहे सुरक्षित अपना वतन,

मिल-जुलकर हम करें जतन।

आँख उठाए जो देश के दुश्मन,

कर दें हम उन सबको खतम।

जिएँ सदा इस अभिमान से,

बेटे हैं हम हिंदुस्तान के।

बेटे का फर्ज हम निभाएंगे,

इस मिट्टी का कर्ज चुकाएँगे।

सौ बार जनम लू माँ,

तेरा ही लाल कहाऊँ।

हर जनम सैनिक ही बन,

शत्रु को हर बार हराऊँ।

सागर की लहरों-सा लहराए,

ऊँचे आसमान में फहराए।

अपनी भारत माँ का झंडा,

शान से फहराए तिरंगा।

कभी न चाहा हमने,

लड़ाई, दंगा और अशांति।

रहे सलामत देश-दुनिया में,

सत्य, अहिंसा और शांति।

तन- मन क्या यह जान है अर्पित,

वतन पर हर शान समर्पित।

-दिनेश कुमार चन्द्राकर

गणतंत्र

26 January Par Kavita In Hindi

सफेद, हरा और केसरिया,

इन रंगों के सम्मिश्रण से,

बना राष्ट्रध्वज प्यारा।

इसकी आन बान शान,

और मान-सम्मान पर,

कुर्बान सर्वस्व हमारा।

तब ही कायम रख पाएं,

बेशकीमती और जरूरी,

अपनी आजादी और जनतंत्र।

सब जन तक उसका लाभ,

पहुँचाने हम कटिबद्ध हों,

इस दिवस गणतंत्र।

-सेवा नन्दवाल

पर्व आजाद भारत का

26 January Poem In Hindi

पर्व ये आजाद भारत का,

विश्व में मशहूर है।

पूरे भारतवासी दिल से,

झंडे को देते सलामी।

प्रण करते हैं मर मिटने का,

याद करके दिन गुलामी।

इतिहास के पन्नों में ये दिन,

एक गज़ब का नूर है।

देश सजा है दूल्हे सा,

बाजे-गाजे बज रहे।

चहुँ ओर हैं ढेरों खुशियाँ,

बच्चे- बूढ़े नाच रहे।

नया गीत है- नये रंग हैं,

और निराले सुर हैं।

-प्रतिभा त्रिपाठी

26 जनवरी आई है

Poem On Republic Day In Hindi

अमर रहे गणतंत्र हमारा

यही संदेशा लाई है।

फहराता रहा तिरंगा झंडा

भवनो पर मैदानो में

देशभक्ति का भाव है जागा।

बच्चों बड़ो सयानो में

आज सभी ने मिलकर

भारत माँ की जयकार गुंजाई है।

26 जनवरी आई है

झंडा वंदन करके सबने

जन-गण-मन मिल गाया है।

भारत माँ की रक्षा का

सबने संकल्प दोहराया है

हर आयोजन में बच्चों को

बँटती आज मिठाई है।

26 जनवरी आई है

नौजवान वीर परेड हैं करते

कदम मिलाकर चलते

वीर-साहसी बच्चे

हाथी की सवारी है।

झाँकियो की छटा,

खुशी हर मन में छाई है।

26 जनवरी आई है।

-श्वेता तिवारी

आज पायी सच्ची आजादी

Poem On Republic Day In Hindi

सच्ची आजादी,

आज के दिन हमने पायी है।

तोड़ दी है सारी बंदिशें

खुल के दिल से,

मिलने की बारी आयी है।

चंद लोग थे मतलबी,

आपस में यह कैसी लड़ाई है।

मिल कर जीने की बारी आयी,

आज ही आजादी पायी है।

बलिदान दिया इसके खातिर वीर जवानों ने,

उनकी रुह को तसल्ली आयी है।

आज ही आजादी हमने पायी है

चल छोड़ चले गुजरी बातों को,

आने वाली हर खुशी अब हमारी है।

याद रहे इतना बस,

फिर कोई चूक न होने पाये।

बहुत बलिदानों के बाद,

यह आजादी हमने पायी है।

-सचिन

चमन ये चमन है ये अपना चमन

Heart Touching Poem On Republic Day In Hindi

चमन ये चमन है ये अपना चमन,

इस चमन में खिले हैं लाखों सुमन।

हर सुमन का कथन है ये मेरा वतन,

नहीं सिक्ख ईसाई कोई हिंदू मुसलमान।

हर कोई गा रहे गीत वतन का,

रंग रूप जाति धरम का संगम।

चारों दिशा गूंज रहे जन गण मन,

कहे धरती गगन है ये मेरा वतन-मेरा वतन।

घर-घर लहराया देखो प्यारा तिरंगा,

ये तो निशान बन गया चैन अमन का।

सत्य अहिंसा त्याग प्रेम का परचम,

हर कोई बोल रहे वंदे मातरम।

कहे धरती गगन है ये मेरा वतन-मेरा वतन,

चमन ये चमन है ये अपना चमन।

-त्रिलोकी नाथ ताम्रकार

तिरंगे की शान

Short Poem On Republic Day

भारत की पहचान तिरंगा,

हम सब की है जान तिरंगा।

तीन रंगों से है सुसज्जित,

वीरों की है आन तिरंगा।।

बलिदानों की गौरव गाथा,

और उनका अभिमान तिरंगा।

हिन्दुस्तान के हर कोने पर,

समृद्धि की पहचान तिरंगा।।

झुका कभी न झुकने देंगे,

लहराता मधुमय गान तिरंगा।

जय-जय हिंद के नारों से,

लगता गुंजायमान तिरंगा।।

-यशवंत कुमार चौधरी

गणतंत्र दिवस

Poem On Republic Day

हमारा प्यारा गणतंत्र दिवस,

नया तिरंगा लाया है।

भारत के स्वर्णिम भविष्य की,

इसमें दिखती छाया है।

वर्षों छाया घना अंधेरा,

लड़कर लाए नया सवेरा।

मान रखा इस देश का,

खुद का उजड़ा भले बसेरा।

अब हम भी कर दिखलाएंगे,

देश को ऊपर लाएंगे।

नीले नभ पर चढ़े तिरंगा,

जन गण मन गुंजाएगें।

-तरु सक्सेना

प्यारा देश हमारा

Poem For Republic Day

कितना प्यारा देश हमारा,

सबकी आंखों का है तारा।

आजादी के गीत सुनाता,

वीरों का इतिहास बताता।

लाल किले की प्राचीर से,

लहराता है तिरंगा प्यारा।

यहां पर झर-झर झरते झरने,

यहां पर कल-कल करती नदियां।

प्रकृति ने बड़े ध्यान से,

है देश का रूप संवारा।

कश्मीर की प्यारी धरती,

सैलानी के मन को हरती।

कितना प्यारा दृश्य यहां का,

कितना सुंदर यहां नजारा।

संगमरमर का ताजमहल,

पूर्णमासी में लगे कंवल।

देश के चौड़े माथे पर,

जगमग जैसे एक सितारा।

हिंदू-मुस्लिम,सिख-ईसाई,

हैं रहते सब बन कर भाई।

ऐसा संगम कहीं नहीं है,

अद्भुत है यह एक नजारा।

भिन्न भेष-भाषा है पर,

रहते हैं सब मिलजुल कर।

आपस में नहीं कोई झगड़ा,

बहती है यहां प्रेम की धारा।

काशी, मथुरा, बोधगया,

अजमेर और अयोध्या।

तीर्थ हैं सबकी श्रद्धा के,

इनसे जुड़ा है देश यह सारा।

देश की खातिर सदा खड़े हैं,

दुश्मन से जो नहीं डरे हैं।

सीमा पर तैनात हैं जो,

उन्हें जान से देश है प्यारा।

-मुजलालुद्दीन खान

आई है छब्बीस जनवरी

Republic Day Par Kavita In Hindi

नया जोश बन करके फिर से

आई है छब्बीस जनवरी,

घर-घर फहरे आज तिरंगे,

छाई है छब्बीस जनवरी।

याद करो वीरों की अनमिट,

वह कुरबानी याद करो तुम,

गूंज पुराने इतिहासों की

लाई है छब्बीस जनवरी।

टीस गुलामी की थी मन में

कैसा तूफाँ गरज उठा था,

यही बताने, हमको-तुमको

आई है छब्बीस जनवरी।

फिर कोई दुश्मन आ करके

नहीं बिछाए अपना जाल,

होशियार तुम रहना भाई

आई है छब्बीस जनवरी।

भूल न जाना जिम्मेदारी

देश पुकार रहा है फिर से,

एक नया संकल्प साथ में

लाई है छब्बीस जनवरी।

जनता का शासन होगा अब

जनता की मर्जी से भाई,

सीधी-सच्ची राह बताने

आई है छब्बीस जनवरी।

दूर गरीबी को करना है

होगी तब सच्ची खुशहाली,

यह संदेश सुनाने फिर से

आई है छब्बीस जनवरी।

छोटा-बड़ा नहीं है कोई

सब हैं भाई एक समान,

लोकतंत्र का अर्थ बताने

आई है छब्बीस जनवरी।

नई-नई मन की आशाएँ

नए-नए सपनों की सूरत,

उम्मीदें झिलमिल, झिलमिल सी-

लाई है छब्बीस जनवरी।

नया जोश बन करके फिर से

आई है छब्बीस जनवरी,

घर-घर फहरे आज तिरंगे,

छाई है छब्बीस जनवरी।

-प्रकाश मनु

आओ गणतंत्र दिवस मनाएं

Poem On Republic Day

एक बहुत बड़ी कीमत चुकायी है,

हमने इस आजादी की खातिर न जाने।

कितने वीरों ने जान गंवायी थी,

देश प्रेम की खातिर।

निभा गये वो,

अपना फर्ज देकर अपनी जानें।

निभाये हम भी अपना फर्ज,

आओ आजादी को पहचानें।

देश प्रेम में डूबे वो वीर,

न हिंदू थे, न मुसलमान,

वो भारत के वासी भारत मां के बेटे थे।

उन्हीं की तरह देश की सरहद पर,

हरेक सैनिक अपना फर्ज निभाता है।

कर्तव्य के रास्ते पर,

खुद को शहीद कर जाता है।

आओ हम भी देश के सभ्य नागरिक बनें

हिंदू-मुस्लिम सब छोड़ कर,

मिल-जुल कर आगे बढ़ें।

जातिवाद, क्षेत्रवाद, आतंकवाद,

ये देश में फैली बुराई है।

जिन्हें किसी और ने नहीं,

देश के नेताओं ने फैलायी है।

अपनी कमियों को छिपाने के लिए,

इन्होंने देश को भरमाया है।

जातिवाद के चक्र में,

हम सबको उलझाया है।

अभी समय है इस भ्रम को,

तोड़ कर आगे बढ़ने का।

सब कुछ छोड़ भारतीय बन,

देश का विकास करने का।

यदि फंसे रहे जातिवाद में तो,

पिछड़ कर रह जायेंगे संसार में।

अभी समय है उठ जाओ,

वरना पछताते रह जाओगे।

समय निकल जाने पर,

हाथ मलते रह जाओगे।

भेदभाव को पीछे छोड़,

सब हिंदुस्तानी बन जाएं।

इस गणतंत्र दिवस पर मिलजुल कर,

शान से तिरंगा फहराएं।

-निकिता बुडानियां

नन्हा सिपाही

Poem For Republic Day In Hindi

मैं नन्हा सिपाही भारत का,

देश का मान बढ़ाऊंगा।

हर आफत का कर सामना,

आगे ही बढ़ता जाऊंगा।।

मेरा प्यारा देश महान,

देखो तुम इसकी शान।

खड़ा हिमालय सीना ताने,

शीश झुकाता इसे जहान।।

इस पर तिरंगा फहराऊंगा,

आगे ही बढ़ता जाऊंगा।

गंगा-यमुना और सरस्वती,

निर्मल नदियां हैं बहतीं।।

साधु-संतों की ये भूमि,

मिलकर रहना सबसे कहती।

इसी बात को दोहराऊंगा,

आगे ही बढ़ता जाऊंगा।।

आंधी-तूफान बारिश में भी,

डटे सीमा पर सेना के प्रहरी।

देश की रक्षा की खातिर,

जागते रहते चार पहर ही।

मैं भी दुश्मन को धूल चटाऊंगा,

आगे ही बढ़ता जाऊंगा।।

-नम्रता सरन ‘सोना’

 

गणतंत्र एक बोध

Poem On Republic Day

उठेगा शोर अपने नारों का,

ये बदलता नया दौर गाएगा।

है गणतंत्र विश्व की धरोहर,

जनतंत्र में सिरमौर जाएगा।

फहरता ध्वजा अब कहता,

आशियानें से निकलों तुम।

दशक-दशक को सम्भालों,

वो तस्वीर न हो जाएँ गुम।

किस्से यहाँ नए बन जाते हैं,

हर पल यादगार बन जाता।

लड़ेंगे हर दौर से आगे हम,

जज्बा हिंदुस्तान बन जाता।

अहिंसा को अपनाकर चले,

लहू की कतरे कभी लगाएँ।

इस गगन के नीचे लड़ते रहे,

कभी आराम को शस्त्र बनाएँ।

नहीं जानता दौर क्या हो रहा,

यही जो जगा हिन्द जानता है।

इस सदी में नया उम्मीद जगा,

यही संघर्षी भारतीय मानता है।

याद शहीदों की हर वक्त रहती,

ये अमरत्व धरा की पहचान है।

राष्ट्रीय पर्व पर नया प्रण हो तो,

यही राष्ट्रगान की जय गान है।

युवाओं की बात होनी चाहिए,

बढ़ता राष्ट्र आज उन्हीं का है।

प्रबलता कुछ और बढ़ जाएँ तो,

परिवर्तन की खुमार उन्हीं का है।

नमन धरा को बारम्बार करते हैं,

गणतंत्र बना रहे ये वतन हमारा।

जयघोष विश्व में और इसकी हो,

आओ कदम बढ़ाएँ अब दोबारा।

-केशव विवेकी

26 जनवरी

Poem On Republic Day

है भारत देश ये मेरा,

है लोक तंत्र ये देश मेरा।

न धर्म न जाति में भेद यहां,

संविधान में दिखे समानता जहां।

26 जनवरी को हम,

मनाएंगे गणतंत्र।

है देश मेरा ये लोकतंत्र,

है विविधता से भरा हुआ।

है एकता से सना हुआ,

है देश मेरा ये लोकतंत्र।

है विश्व गुरू मेरा भारत देश,

गुरूओं का गुरू मेरा भारत देश।

अखंड, अनभिज्ञ है मेरा भारत देश।

-मंजू यादव

हमारा तिरंगा

Poem On Republic Day

देश की शान है तिरंगा,

हमारा मान है तिरंगा।

अमर है भारत देश हमारा,

हमारी पहचान है तिरंगा।

तीनों रंगों का अपना,

अलग-अलग है महत्व।

सफेद रंग है शांति का प्रतीक,

केसरिया है बलिदान का प्रतीक।

हरा रंग है खुशहाली,

और प्रगति का सूचक।

बीच में अशोक चक्र है,

धर्म और सत्य का प्रतीक।

यह हमारे भारत की है निशानी,

राष्ट्रीयता व भाईचारा का।

प्रमाण है यह तिरंगा,

हमारी शान है यह तिरंगा।

-स्नेहा कुमारी नुनिया

गणतंत्र

Poem On Republic Day

आओ मिलकर सब खुशियाँ मनाएँ,

अपना गणतंत्र दिवस है आया।

गीत देशभक्ति के गाएँ,

न रखें ईर्ष्या, द्वेष भावना।

एक-दूसरे का हाथ थामकर,

कदम-कदम आगे बढ़ाएँ।

देश गौरव, तिरंगा लहरा कर,

झूमे-नाचे, खुशियाँ मनाएं।

याद करें भारत माँ के,

वीर सपूर्तो को।

जिद्द थी ठानी जिन्होंने,

देश को स्वतंत्र कराने की।

अपनी कुर्बानी देकर,

देश कर गए मुक्त।

ऐसे शहीदों को, मिलकर,

शत् शत् शीश नवायें।

आओ मिलकर सब आज,

समझें गणतंत्र की कीमत,

छिपी पीछे संघर्ष गाथा रखें याद।

अधिकार दिलाए जिसने,

हमें अनेकों गुलामी छोड़।

खुली हवा में सांस,

लेने का उपहार दिया।

अन्याय के विरुद्ध आवाज़,

उठाने का व्यवहार दिया।

ऊँच-नीच के भेद मिटाकर,

एकता का सार दिया।

लोगों को मिला मतदान अधिकार,

देश में बनी जनता की सरकार।

गणतंत्र हमारा महान,

हर भारतवासी की पहचान।

इतिहास रचने का हौसला,

सबको दिया कई प्रकार।

आओ इसके गीत गाएँ,

मिलकर सब खुशियाँ मनाएँ।

-सपना

गणतंत्र दिवस मनायें

Poem On Republic Day In Hindi

आओ फिर से गणतंत्र दिवस मनायें,

इस देश का 72 वां राष्ट्रीय पर्व मनायें।

1950 के सत्र को फिर से दोहरायें,

आओ फिर से गणतंत्र दिवस मनायें।

फिर से देश का राष्ट्रीय ध्वज लहरायें,

अपने देश के राष्ट्रगान का यश फैलायें।

अपने तिरंगे की महानता को दर्शायें,

आओ फिर से गणतंत्र दिवस मनायें।

ध्वजा के रंगों की परिभाषा को बतलायें,

इसमे तीन नही हैं,पांच रंग सबको बतलायें।

केसरिया, सफेद, नीला, हरा शहीदों का लहू,

आओ फिर से गणतंत्र दिवस मनायें।

केसरिया रंग देश के हिंदुत्व को जगाये,

सफेद रंग पवित्रता, शांति को दर्शायें।

है हरा रंग हमारी, हरी धरा को दर्शायें,

आओ फिर से गणतंत्र दिवस मनाये।

नीला, अशोक चक्र 24 तीलियों को दर्शायें,

नीला रंग जो बल, पौरुष, वीरता को दर्शायें,

एक लाल रंग जो शहीदों का लहू बहा,

वह विजय, पराक्रम को दर्शायें।

आओ फिर से गणतंत्र दिवस मनायें।

-अरुण चक्रवर्ती

गणतंत्र दिवस

Poem On Republic Day In Hindi

देशभक्ति का रंग,

जीत जाएंगे हर जंग।

बस फिका ना पड़े,

देशभक्ति का रंग।

देश के नाम है,

ये होठों की मुस्कान।

तिरंगे की शान से है,

शान-ए- हिंदुस्तान,

खाक ना होने देंगे।

उनका इमान गवा दी,

जिन्होंने देश के लिए अपनी जान।

खुदा मुझे भी मौका दे,

देश के लिए कुछ कर पाऊं।

इस मिट्टी की खुशबू से महक जाऊं,

वतन की अस्मत में दुनिया भुलाऊँ।

कोई पूछे देश के बारे में तो,

गर्व से हिंदुस्तान बताऊँ।

बढ़ता रहे साहस बढ़ती रहे उमंग,

बस फिका ना पड़े देश भक्ति का रंग।

जिसे प्राप्त पेड़ पौधों से,

कुदरत नदियों से शोहरत।

पर्वतों से हसरत,

संस्कृति से महारत,

वो हमारा देश है भारत।

मित्रता करे तो वतन से,

देश के लिए जीना-मरना जतन से।

उन्नत रहे हिंदुस्तान,

फर्क नहीं पड़ता अपने पतन से।

दिखावा नहीं जो करे सब मन से,

बेशक दूर क्यों न होना पड़े सदन से।

रहे मिलजुल कर सब संग,

बस फीका ना पड़े देशभक्ति का रंग।

अपना फर्ज न भूलें चाहे,

भारत मां से दूर रहे।

बरकरार सदा ये तिरंगे का नूर रहे,

बस यूं ही नहीं कुछ कर जाने का सुरूर रहे।

जिसे जो कहना कहे पर जरूर रहे,

हिंदुस्तानी होने का गुरुर रहे,

फिर यहीं जन्म लेने की ख्वाहिश करें।

बक्शे हमें ईमानदारी,

ये खुदा से नुमाइश करें।

वतन पर जान हाजिर,

खुशी-खुशी फरमाइश करें।

चूर -चूर हो उनके इरादे,

जो देश के खिलाफ साजिश करें।

करता रहे उन्नति वतन,

बस यही गुजारिश करें।

मिसाल बने भारत,

देखकर हो दुनिया दंग।

बस फीका ना पड़े,

देश भक्ति का रंग।

-प्रिया तंवर

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