Top 13+ Poem On Train In Hindi | रेल पर कविता

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Poem On Train In Hindi :- आज यहां पर 15+ रेलगाड़ी पर सुंदर कविता (Train Par Kavita) साझा किया गया है।

 

Poem On Train In Hindi

 

रेल का खेल

Poem On Train In Hindi

 

लंबी टेढ़ी-मेढ़ी रेल,

आओ हम मिलकर खेलें खेल।

जुड़कर हम सब डिब्बा बन जाएँ,

आज रेल का खेल खिलाएँ।।

 

मुँह से छुक-छुक की आवाज,

मजे करेंगे मिलकर आज।

एक-दूजे का कंधा पकड़ें,

रेल के डिब्बे जैसे जकड़े।।

 

ऐसे मिलकर बन जाएँ रेल,

आओ मिलकर खेलें खेल।

चलते रहने का संदेश,

रेल दे रही है उपदेश।।

 

इक-दूजे से जुड़े रहेंगे,

आगे बढ़ेंगे मज़े करेंगे।।

-रीता मंडल

 

छुक-छुक

Poem On Train In Hindi

 

अपना मुंह जब भी खोलूं,

छुक-छुक, छुक-छुक बोलूं।

पटरी पर चलती जाऊं,

नागिन सी ढलती जाऊं।

 

गांव, शहर सब में डोलूं,

छुक-छुक, छुक-छुक बोलूं।

ठीक समय पर आती हूँ,

लेट हुई पछताती हूँ।

 

मंजिल पाकर खुश होलूं,

छुक-छुक, छुक-छुक बोलूं।

भीड़ देख ना घबराऊं,

खूब सवारी ले आऊं।

 

रंग प्रेम के मैं घोलू,

छुक-छुक, छुक-छुक बोलूं।

-हर प्रसाद रोशन

 

रेलगाड़ी

Poem On Train

 

कब दौड़ेगी रेलगाड़ी,

हाथ हिलाकर छोड़ आऊंगा।

कब दौड़ेगी रेलगाड़ी,

मैं खिड़की से खेतों को देखूगा।

 

कब दौड़ेगी रेलगाड़ी,

नदी में पैसे अर्पण करूंगा।

कब दौड़ेगी रेलगाड़ी,

गर्म चाय की आवाज सुनूंगा।

 

कब दौड़ेगी रेलगाड़ी,

स्टेशन पर डिब्बा पहुंचाऊंगा।

कब दौड़ेगी रेलगाड़ी,

किसी अपने को लेने जाऊंगा।

 

कब दौड़ेगी रेलगाड़ी,

दूर देश घूम-घूम आऊंगा।

कब दौड़ेगी रेलगाड़ी,

उसकी सीटी से मेरा मन डोलेगा।

 

सूनी-सूनी पटरी, सूना-सूना स्टेशन,

कब दौड़ेगी रेलगाड़ी।

-पुरुषोत्तम व्यास

 

सफ़र रेल गाडी का

Poem On Train In Hindi

 

मैं पटरी पर चलती रोज,

लगता मुझे कभी ना बोझ।

जो बैठे सबको ले जाती,

मंजिल पर उनको पहुंचाती।

 

मेरा सफ़र सुहाना लगता,

आना-जाना प्यारा लगता।

मेरी यात्रा सुरक्षित होती,

प्यार के मणियां मैं पिरोती।

 

बच्चों को सुहाती हूँ मैं,

जंगल शहर घुमाती हूँ मैं।

समय बचत करती हूँ मैं,

राज-कोश भरती हूँ मैं।

-व्यग्र पाण्डे

 

रेल

Hindi Poem On Train

 

छुक-छुक आती-जाती रेल,

पों-पों हॉर्न बजाती रेल।

इस डिब्बे से उस डिब्बे में,

आपाधापी ठेलमठेल रेल।।

 

दो पटरी पर चलती रेल,

सरपट दौड़ लगाती रेल।

गेट पर बैठा टाइमकीपर,

लाल, हरी झंडी दिखाती रेल।।

 

खानों से कारखानों तक,

झटपट आती-जाती रेल।

माल ढोकर आती रेल,

ढोकर माल जाती रेल।।

 

बच्चे मन के होते सच्चे,

खेल रेल का खेलमखेल।

मुन्नी बिटिया बड़े मजे से,

सफर करती रेलमरेल।।

 

सामान ढोना हुआ आसान,

आसान हुआ आवागमन।

आय के हैं प्रमुख साधन,

देश की आय बढ़ाती रेल।।

-महेन्द्र साहू

 

छोटी-छोटी गाडी

Tain Par Kavita

 

छोटी-छोटी गाड़ी,

बच्चों की रेलगाड़ी,

चाबी भरो।।

 

दौड़ लगाती किसी,

स्टेशन पर,

नही रूकती।।

 

बच्चों की मीठी बोली-सी,

बड़ी प्यारी रेलगाड़ी।।

 

रूठ कर फिर मान जाता,

फिर दौड़ पड़ती,

रेलगाड़ी।।

-पुरुषोत्तम व्यास

 

रेल

Poem On Train

 

तेज गति से प्यारी रेल,

पटरी पर दौड़ लगाती।

भारत के कोने-कोने की,

सबको सैर कराती।

 

गाँव शहर जंगल खेतों का,

चक्कर रोज लगाती।

दिल्ली हो या कोलकाता,

सबको घर तक पहुँचाती।

 

सर्दी गर्मी और बरसात,

हँस कर समय बिताती।

आंधी तूफानों से देखो,

जरा न ये घबराती।

 

स्टेशन आने पर रुक कर,

थोड़ा सा सुस्ताती।

फिर चल पड़ती अपने पथ पर,

बस चलती ही जाती।

-बद्री प्रसाद वर्मा

 

बच्चों की गाड़ी

Train Par Poem

 

पांच डिब्बों की रेलगाड़ी,

आओ मिलकर साथ खेलो।

छूक-छूक, छूक-छूक बढ़ती जाये,

पों-पों, पों-पों आठ बोलों।

 

बिना डीजल की रेलगाड़ी,

यह है सब पर बिल्कुल भारी।

राजू, सलीम की मेहनत से,

परेशान है दुनिया सारी।

 

आओ जल्दी बैठ जाओ,

चलो स्कूल बच्चों की रेल।

लोग देखकर बोल पड़ेंगे,

देखो बच्चों में अद्भुत मेल।

-मो जमील

 

चलती जाती है

Train Par Kavita

 

मंजिल तक पहुँचाती है,

रेल समय पर जाती है।

चुन्नू, मुन्नू सब बैठो,

सब में मेल बढ़ाती है।

 

हरदम चलती जाती है,

छुक-छुक गीत सुनाती है।

समय गँवाना ठीक नहीं,

सब को पाठ पढ़ाती है।

 

सब नगरों में आती है,

चीजें नई दिखाती हैं।

ज्ञान हमारा बढ़ता है,

इसीलिए यह भाती है।

-राजेंद्र निशेश

 

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