Top 17+ Best Poem On Winter Season In Hindi | सर्दी पर कविता

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Poem On Winter Season In Hindi :- हम आज के पोस्ट में जाड़ा यानि सर्दी ऋतु पर सर्वश्रेष्ठ सुंदर और आसान भाषा में कविता प्रस्तुत किया गया है। यह कविता बेहतरीन लेखक के द्वारा लिखी गई हैं। आओ हम सब सर्दी ऋतु पर कविता का पढ़ कर आनंद उठाएं। इस कविता को अपने दोस्तों और परिजनों के साथ अवश्य साझा करें। उन्हें भी इनके बारे में जानकारी प्राप्त हो सकें। धन्यवाद!!!

 

Poem On Winter Season In Hindi

 

जाड़ा आया

Poem On Winter Season

 

उछलता कूदता जाड़ा आया,

देखो कैसे इतराता जाड़ा आया।

रवि की स्वर्णिम किरणे लेकर,

धूप सजाता जाड़ा आया।

 

ओस की बूंदें हथेली पे रख,

मोती सा बिखराता जाड़ा आया।

गरम-गरम खाने-पीने का,

लाभ बताता जाड़ा आया।

 

स्वेटर मफलर रजाई की

याद दिलाता जाड़ा आया।

-टीकेश्वर सिन्हा गब्दीवाला

 

सर्दी रानी सर्दी रानी

Poem On Winter Season In Hindi

 

सर्दी रानी सर्दी रानी,

मत कर तू मनमानी।

छोड़ दे अब तू प्यार से,

सर्दी की सुई चुभानी।

 

जब जब तू आती,

भारी आफत लाती।

सूरज की धूप हमें,

मिलने भी ना पाती।

 

आसमान को रोज तू,

ओस की चादर से ढक देती।

शीत लहर फैला कर,

नाक में दम कर देती।

 

जाड़े में तो तेरी,

खूब हुकूमत चलती।

तुमसे सब बच्चों की,

टोली हरदम डरती।

 

तेरे आगे सूरज की,

दाल नहीं गलती।

तेरे ही कारण घर घर में,

हीटर, आग है जलती।

-बद्री प्रसाद वर्मा

आई सर्दी

Poem On Winter Season

 

ठंडी हवा लेकर आई सर्दी,

ओस की बूंदें पीकर आई सर्दी।

सूरज निकला हुआ सवेरा,

चिड़ियों ने अपना छोड़ा डेरा।

 

गीत गाए पेड़ झूम-झूम कर,

गुन-गुनाए भौरे घूम-घूम कर।

फूलों में मुस्कान लाई सर्दी,

ठंडी हवा लेकर आई सर्दी।

-टीकेश्वर सिन्हा

 

रौब गांठती सर्दी आई

Poem On Winter Season In Hindi

 

सर्दी आई, सर्दी आई,

रौब गांठती सर्दी आई।

थर-थर कांपे बदन हमारा,

स्कूल की छुट्टी कर दो भाई।

 

बादल छाये, घना है कोहरा,

किट-किट दाँत बाजते हैं।

खेल-कूद सब बन्द हुआ है,

रजाई से चिपके रहते हैं।

 

घर से नहीं निकलना मुन्ना,

मम्मी बहुत डांटती हैं।

हम बच्चों का क्या कसूर है?

जो आँख दिखाती सर्दी आई।

 

इसकी कोई करो शिकायत,

हम पर रौब दिखाती है।

सन-सन चल कर हमें डराती,

मम्मी इसकी नहीं डाँटती है।

-उमेश चन्द्र

ठंडी

Poem On Winter Season

 

देखो भाई ठंडी आई,

प्यारी ओस की बूंदे लाई।

रंग-बिरंगे स्वेटर पहनो,

नरम-गरम ओढो रजाई।।

 

आसमान में बादल छटे हैं,

कोहरा छाया है सब ओर।

थरथर कर सब कांप रहे हैं,

शीत बरसे चारों ओर।।

 

क्या दादी, नानी क्या पोती,

धूप सबको अच्छी लगती।

गरम चाय है सब पीते,

ठंडी अपनी दूर भगाते।।

 

क्या गली और क्या मोहल्ले,

लगे हैं देखो आग सुलगने।

बच्चे, बूढ़े और जवान,

सब मिलकर हैं आग तापते।।

 

सभी किसान खुश हो जाते,

पके फसल देखकर मुस्काते।

मेहनत रंग लाया देखकर,

अपने सारे ख्वाब सजाते हैं।।

-सपना यदु

 

सर्दी आई

Poem On Winter Season

 

ज़रा सँभल कर रहना भाई,

मौसम बदला सर्दी आई।

बंदर टोपी मफलर मोजे,

दस्ताने शॉलें स्वेटर।

 

संदूकों से निकल निकल अब,

अलमारी को देंगे भर।

चादर छोड़ सभी ओढ़ेंगे,

मोटी कम्बल और रजाई,

मौसम बदला सर्दी आई।

 

गरम पकौड़े हलवा पूरी,

भाजी पाव बनायेंगे।

आलू गोभी मेथी पालक,

भरे परांठे खायेंगे।

 

सूप चाय काफी है पर,

आईसक्रीम की रोक लगाई।

मौसम बदला सर्दी आई।

बैडमिंटन फुटबॉल क्रिकेट,

बच्चे खेलेंगे हिलमिल।

 

पिकनिक के प्रोग्राम बनेंगे,

दिल सबके जायेंगे खिल।

धूप सेकती नानी-दादी,

लेकर अपनी ऊन सिलाई,

मौसम बदला सर्दी आई।

-निशा कोठारी

 

सर्दियों का त्यौहार

Poem On Winter Season In Hindi

 

सर्दियों की आ गई बहार,

फूलों से बाग हुआ गुलजार।

ओस धरा पर बिछती रही,

शीत पवन करे अत्याचार।

 

रात की लंबाइयां बढ़ती रहीं,

दिवस छोटा सा मगर गुलजार।

पी रहे हैं वो गरमागरम चाय,

जो करते थे लस्सी से प्यार।

 

गरम वस्त्रों से लदे हैं लोग,

सर्दी का बस यही उपचार।

कर रहे हैं नित्य जो व्यायाम,

वो पाएंगे स्वास्थ्य का उपहार।

 

खाओ पीयो मस्त रहो दोस्तो,

सर्दियों की आ गई बहार।

-महेन्द्र कुमार वर्मा

 

ठण्ड का मौसम

Poem On Winter Season In Hindi

 

ठण्ड का मौसम,

फलों का मौसम।

बच्चों की,

सेहत का मौसम।

 

पालक मैथी,

चने की भाजी,

लाल टमाटर,

मटर का मौसम,

 

गोभी मूली,

नींबू गाजर,

सब कुछ यह,

मिलने का मौसम।

 

पापा मम्मी,

प्लान बनाते।

पिकनिक पर,

जाने का मौसम।

 

सूरज जल्दी,

डूबकर कहता।

रात में दुबको,

रजाई का मौसम।

-जगदीश ‘गुप्त’

 

सर्दी दीदी

Poem On Winter Season In Hindi

 

सर्दी दीदी! सर्दी दीदी,

हालत पतली कर दी दीदी।

भाव धूप के चढ़े गगन पर,

लाओ धरा पर जल्दी दीदी।

 

सर्द हवाएं पिन-सी चुभतीं,

यही आपसे अर्जी दीदी।

सूरज के साथ धूप गुलाबी,

घर को जल्दी चल दी दीदी।

 

नहाते, तो लगता यूं मानों,

बर्फ बदन पर धर दी दीदी।

मार सही न जाती हमसे,

मौसम उफ्! बेदर्दी दीदी।

-अशोक 

 

शरद ऋतु

Poem On Winter Season

 

बीत गई है बरसा ऋतु,

शरद ऋतु अब आई है।

सुबह शाम शीत बरसाने,

ठंड ने पैठ जमाई है।

 

कोहरा और धुंध बरसते,

शरद् ऋतु के मौसम में।

गरम वस्तुएं गरम कपड़े,

खूब भाते इस मौसम में।

 

सुबह सवेरे तकते रहते,

कब आयेगी धूप सुहानी।

अलाव जलाकर बच्चे सारे,

दादाजी से सुनते कहानी।

 

रेनकोट और छतरी की,

हो गई अब तो बिदाई।

स्वेटर, कंबल, मफलर, टोपी,

इन सबकी बारी आई।

-प्रीतम कुमार साहू

 

शरद ऋतु मस्ताई

Poem On Winter Season In Hindi

 

 गरमी, वर्षा चले सैर को,

शरद ऋतु मस्ताई।

सूरज जी भी थके-थके से,

खाएँ दूध मलाई।

 

मौसम अतिशय प्यारा न्यारा,

ना गर्मी, ना ठंडा।

तन-मन को यह लगे सुखारी,

लू का चले न डंडा।

 

रात हो गईं शीतल-शीतल,

चादर हमें उड़ाई।

पंछी सारे खुश होकर के,

गाएं गीत मल्हार।

 

मिल-जुल कर आपस में रहते,

खूब बढ़ाएं प्यार।

सुबह-शाम है बड़ी सुहानी,

पवन लगे सुखदाई।

 

हल्दी पर यौवन है छाया,

पका धान औ मक्का।

कृषक काटते पकी फसल को,

हँसते कक्की-कक्का।

 

ज्वार, बाजरा झूमें पककर,

ईख पर मस्ती छाई।

हवा झुलाए डाल-पात को,

देख नृत्य मन मोहता।

 

मोर मोरनी करें किलोलें,

गीत सुनाए तोता।

खेलें-कूदें योग करें हम,

स्वस्थ बनें हम भाई।

-डॉ. राकेश चक्र

 

आ गया फिर जाड़ा

Poem On Winter Season In Hindi

चलो निकालो स्वेटर कोट,

आ गया फिर जाड़ा।

सर पर मफलर कनटोप लगाओ,

आ गया फिर जाड़ा।

ठंडी खूब बढ़ गई देखो,

आ गया फिर जाड़ा।

बच्चों और बड़ो को सताने,

आ गया फिर जाड़ा।

थर-थर बदन कांपने लगा,

आ गया फिर जाड़ा।

आग जला कर लगे तापने,

आ गया फिर जाड़ा।

रोज कोहरा लगा दिखने,

आ गया फिर जाड़ा।

सूरज की धूप मन को भाए,

आ गया फिर जाड़ा।

ओस रात भर गिरने लगा,

आ गया फिर जाड़ा।

कम्बल और रजाई ओढो,

आ गया फिर जाड़ा।

-बद्री प्रसाद वर्मा अनजान

ठंड की रानी

Winter Poem In Hindi

देखो ठंड की रानी आई,

बगिया अब फूलों से छाई।

चादर ओढ़ के हर कोई बैठा,

सूरज की किरणें शर्माई।।

जले अलाव वहाँ सब बैठे,

सूरज निकला फिर भी लेटे।

स्वेटर शाल की मांग बढ़ी,

ठंडी हवा ने दौड़ लगाई।।

फ्रिज कूलर कोने में दुबके,

सिसक रहे हैं चुपके-चुपके।

ठंड लगी उनको भी भारी,

सोनू ने चादर उढ़ाई।।

घंटी बजी और बच्चे भागे,

इन्हें मौसम का डर न लागे।

सहन करना सीखो इनसे,

घबराओ नहीं ठंड से भाई।।

-कमलसिंह चौहान

सर्दी आयी

Sardi Aayi Sardi Aayi Poem

सर्दी आयी, ओढ़ रजाई

बचो ठंढ से खुद ही भाई

घर में रहो न बाहर जाओ

पढ़ा-लिखो मन को बहलाओ।

पहनो स्वेटर ,जैकेट, कोट

सर्द हवा से ले लो ओट

जीवन-रक्षा पहला काम

घर में बैठ करो आराम।

-हरिनारायण सिंह हरि

जाड़ा बाबा क्यों आया

Poem On Winter Season In Hindi

जाड़ा बाबा क्यों आया है ?

इतनी सर्दी क्यों लाया है ?

गरम-गरम हम चाय पी रहे,

फिर भी ठिठुरन नहीं मिट रही।

कम्बल और रजाई ओढ़ी,

फिर भी ठण्डक नहीं हट रही।

दिन छोटा और रात बड़ी है,

मीना बहन बीमार पड़ी है।

जरा जोर की धूप खिला दे,

मीना को तू जरा हंसा दे।

नन्दू नहाने से डरता है,

काम नहीं कुछ भी करता है।

रोज डांटती जब भी मम्मी,

डर कर दूर भागती पम्मी।

कहना मानो बाबा मेरे,

मत आओ तुम सांझ-सवेरे।

भरी दुपहरी में ही आओ,

साथ बैठकर गप्प लगाओ।

कहीं धूप कहीं छाया है,

जाड़ा बाबा क्यों आया है?

-पूरन सरमा

सर्दी का आनंद उठाओ

Poem On Winter Season In Hindi

खेलो-कूदो धूम मचाओ।

सर्दी का आनंद उठाओ।।

कष्ट तनिक बच्चों तुम सह लो।

नित्य सवेरे उठकर टहलो।।

चंगा रहने की हो हसरत।

करो नियम से योगा-कसरत।।

निज तन को बलवान बनाओ।

सर्दी का आनंद उठाओ।।

पालक-मेथी,मटर-टमाटर।

मूली-बैंगन, गोभी-गाजर।।

भगाओ ठिठुरन जकड़न।

मुँह से भाप निकाल दिखाओ।।

खेलो-कूदो धूम मचाओ।

सर्दी का आनंद उठाओ।।

-श्लेष चन्द्राकर

मौसम जाड़े का

Poem On Winter Season In Hindi

गोभी गाजर लाल टमाटर,

मौसम जाड़े का।

मूली धनिया बैंगन भुर्ता,

मौसम जाड़े का।।

मटर मूंगफली सिंघाड़ा,

औ शाक चने का भी।

दूध जलेबी गरम समोसा,

मौसम जाड़े का।।

अलसी सरसों मीठा गन्ना,

तिल्ली उड़द मसूर,

ज्वार बाजरा, कैथा कॉफी,

मौसम जाड़े का।।

निकले कम्बल, शूट रजाई,

मफलर टोपा भी।

मीठी खीर शकरकन्दी की,

मौसम जाड़े का।।

सूरज खोया बीच बादलों,

और कुहासा छाया।

किट-किट पढ़ते दांत पहाड़ा,

मौसम जाड़े का।।

-प्रमोद दीक्षित ‘मलय’

आ गई ठण्ड

Poem On Winter Season In Hindi

फ्रिज, कूलर, पंखे, सब बंद,

लो भैया आ गई है ठण्ड।

स्वेटर, कोट मफलर, दस्ताने,

पहने सब हो गये मस्ताने।

आईसक्रीम, ठण्डे शर्बत गुम,

गरम मूंगफली ले लो तुम।

थर-थर-थर-थर कांपे तन,

फिर भी भैया खुश है मन।

गई गर्मी झुलसाने वाली,

आ गई ठण्ड हर्षाने वाली।

-सुनील कुमार शर्मा

जाड़े का मौसम

Poem On Winter Season In Hindi

जाड़े का मौसम आया,

सूरज का मन अलसाया।

लिहाफ तान कर सोएं हैं,

देखो सात बजने को आया।

क्या उनको है नहीं पता,

सर्दी सबको रही सता।

क्या किसी से अनबन हुई,

या हुई हमसे कोई खता।

सूरज बाबा गुस्सा छोड़ो,

लिहाफ से बाहर निकलो ना।

थोड़ी सी ही झलक दिखा दो,

प्यार की उष्मा दे दो ना।

सूरज बाबा आंखे खोलो,

बच्चों से हँसकर बोलो ना।

नन्हें-मुन्ने प्यारे बच्चो,

आओ किरणों से खेलो ना।

-मीरा सिंह ‘मीरा’

आई है शरद ऋतु

Poem On Winter Season

आई है शरद ऋतु छाई सिहरन है,

प्रकृति में दिखते छबि कणकण है।

फूल-कली तरुवर दिखते मगन है,

हरीभरी तृण में मोती कणकण है।

बाग में बागीचों में रौनकता आई है,

चहुँ दिसि सुरभित सुषमा समाई है।

डाली-डाली विहंग वृंद चहचहाई है,

तरु में तड़ाग में तटिनी उड़ आई है।

भोर सुरम्य दिखे छबि मनोहारी है,

ओस की बूंदें झलके बड़ी प्यारी है।

फाहों की उड़ती दिखे धरा सारी है,

हिम की धवल धरा दिखते न्यारी है।

जल में सरोवर में फुले दल कमल है,

करते भ्रमण अलि तितली निश्चल हैं।

लगे मनमोहक अतिशय छबि दल है,

करते मकरंद मधु पान में ये मचल है।

-अशोक पटेल

शरद सुहावन

Poem On Winter Season

देखो आया शरद सुहावन,

मन को भाए सुन्दर मौसम।

ठंडी हवा के झोंके बहते,

मंद समीर सुहानी चलती।

रंग बिरंगे फूल खिले हैं,

धरती दुल्हन सी सजी है।

ऋतुओं का राजा शरद,

सबके मन हर्षाने आया।

गुनगुनी धूप सुहानी लगती,

कहीं बारिश की फुहार।

ठंडक का एहसास कराती,

चाय की चुस्की अच्छी लगती।

रिश्तों में गर्माहट लाती,

थोड़ी सावधानी जो बरतता।

बीमारियों को दूर भगाए,

शरद ऋतु का आनंद वो लेता।

खेतों में लहलहाती फसलें,

धरती का श्रृंगार हैं करती।

शरद है ऋतुराज सुहाना,

नाचो गाओ धूम मचाओ।

-अनुराधा प्रियदर्शिनी

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