19+ सरदार वल्लभभाई पटेल पर कविता | Sardar Vallabhbhai Patel Poem In Hindi

Rate this post

Sardar Vallabhbhai Patel Poem In Hindi 31 अक्टूबर : सरदार पटेल जयंती आज जरूरत पुनः देश को, सच्चे पहरेदार की। फिर यादों में हम खोए हैं, लौहपुरुष सरदार की।

 

Sardar Vallabhbhai Patel Poem In Hindi

 

 

लौह पुरुष

Poem On Sardar Vallabhbhai Patel

 

आज जरूरत पुनः देश को,

सच्चे पहरेदार की।

फिर यादों में हम खोए हैं,

लौहपुरुष सरदार की।।

 

धीर-वीर दृढ़ निश्चय वाला,

सिंह पुरुष बलशाली था।

शत्रु डरते वाणी सुनकर,

ऐसा शक्तिशाली था।

सोमनाथ का उद्धारक वह,

शिवशंकर प्रलंयकर था।

ब्रिटिश-पाक दुश्मन के सम्मुख,

वीरभद्र भयंकर था।

काँपे शेख-निजाम कभी,

क्या कहना उस ललकार की।

फिर यादों में हम खोए हैं,

लौह पुरुष सरदार की।।

नीवं का पत्थर बना रहा वह,

नहीं कंगूरा बन पाया।

बड़े-बड़े महलो में रहना,

उसे रास ना आ पाया।

वह मजदूर किसान हितैषी,

जन-जन का सरदार था।

दीन-दुःखी का परम हितैषी,

सबका तारणहार था।

खण्ड-खण्ड भारत को जोड़ा,

जय हो उस दरबार की।

फिर यादों में हम खोए हैं,

लौह पुरुष सरदार की।।

जो जन-मन की पीड़ा समझे,

वही देश का शासक हो।

सत्ता जनता की दासी हो,

शक्ति शत्रु विनाशक हो।

 

हर बच्चा भारत माता का,

देशभक्त बलशाली हो।

हिन्दू राष्ट्र की रक्षा हेतु,

लड़ने की तैयारी हो।

सुखद कल्पना करता था वह,

ऐसी शुभ सरकार की।

फिर यादों में हम खोए हैं,

लौह पुरुष सरदार की।।

ऐक्य शक्ति का भाव जगाकर,

हम पटेल से बन जाएँ।

मातृभूमि की बलिवेदी पर,

प्राण प्रसून चढ़ा पाएँ।

 

सभी संगठित होकर अपने,

बल-वैभव को प्रगटायें।

कीमत हमें चुकानी होगी,

भारत माँ के प्यार की,

फिर यादों में हम खोए हैं,

लौह पुरुष सरदार की।।

-हेमराज पाटीदार

सरदार वल्लभ भाई पटेल

Poem On Sardar Vallabhbhai Patel

लौह पुरुष की ऐसी छवि,

ना देखी, ना सोची कभी।

आवाज में सिंह सी दहाड़ थी,

हदय में कोमलता की पुकार थी।

एकता का स्वरूप जो इसने रचा,

देश का मानचित्र पल भर में बदला।

गरीबों का सरदार था वो,

दुश्मनों के लिए लोहा था वो।

आंधी की तरह बहता गया,

ज्वालामुखी सा धधकता गया।

बनकर गांधी का अहिंसा का शस्त्र

महकता गया विश्व में जैसे कोई ब्रहास्त्र।

इतिहास के गलियारे खोजते हैं जैसे,

ऐसे सरदार पटेल अब ना मिलते पूरे विश्व में।

सरदार वल्लभ भाई पटेल पर कविता

Poem On Sardar Vallabhbhai Patel

भारत के एकीकरण का स्वप्न,

था जिसने साकार किया।

लौह पुरुष सा बनकर वह,

पूरे देश में विख्यात हुआ।

एकता का पाठ पढ़ाया,

मेहनत का सबक सिखाया।

कर्मठता ही जीवन है,

हम सबको यह बतलाया।

धन्य है वह माता,

जिसने ऐसा पुत्र था पाया।

भारत माॅं का लाडला,

वह भारत माॅं में ही समाया।

ना भूलना उसके बलिदान को,

जिसने मरने के बाद भी

भारत रत्न कहाया।

सरदार वल्लभ भाई पटेल पर कविता

Poem On Sardar Vallabhbhai Patel

घर में सबसे छोटे थे,

बड़े हुए तो देश के सबसे सच्चे थे।

चारों और गुलामी पाई

बना स्वतंत्रता सेनानी,

और आज़ादी की गुहार लगाई।

एक जुट होकर बापू संग,‌‌

आंदोलन में हिम्मत दिखलाई।

जोड़े लोग बनाई फ़ौज और

अंग्रेज़ों को अपनी हट दिखलाई।

पाकर ऐसे लौह पुरुष को,

हिन्दुस्तान हुआ महान।

और दे दिया वल्लभ भाई को,

सरदार का सम्मान।

हुआ भारत आज़ाद,

बन भारत का लौह पुरुष।

मिलाई 562 रियासतें,

भारत के साथ।

और इस उपलब्धी के कारण

वल्लभ भाई के जन्मदिवस

को किया राष्ट्रीय एकता

दिवस के नाम।

सरदार वल्लभभाई पटेल पर कविता

Poem On Sardar Vallabhbhai Patel

भारत देश में जन्म हुआ,

सरदार वल्लभभाई पटेल था नाम

वो भारत के सच्चे सपूत थे,

और गुणों में थे बहुत महान।

उन्होंने भारत का एकीकरण किया,

यही उनकी थी पहचान।

उनके अच्छे कार्यों के कारण,

वो भारत की शान हैं।

उनकी देशभक्ति और कार्य निष्ठा पर,

पूरे देश को अभिमान है।

उनके जन्मदिन के शुभ अवसर पर,

उनको कोटि-कोटि प्रणाम है।

सरदार वल्लभभाई पटेल पर कविता

Poem On Sardar Vallabhbhai Patel

वह सरदार पटेल चाहिए,

जो किसानो के हक की बात करें।

इनके दुःख-दर्द मिटाने के लिए लड़े,

जिसकी ईमानदारी और

विनम्रता की बातें सब करें।

वह सरदार पटेल चाहिए,

जो अपनी आखों को क्रोध से लाल करें।

अन्याय के खिलाफ मजबूत हाथों से लड़े,

जिसकी आवाज से दुश्मन भी काप उठे।

वह सरदार पटेल चाहिए,

जो भारत को एकता का पाठ पढ़ाएं।

हर मजहबों को गले मिलने का सबक सिखाएं,

जो हर वक्त सच के साथ खड़ा रहकर दिखाएं।

वह सरदार पटेल चाहिए।

जो देश के लिए कुर्बान हो,

जिसका हृदय विशाल हो,

आने वाली पीढ़ियों के लिए मिशाल हो

वह सरदार पटेल चाहिए।

भारत के लौह पुरुष सरदार

Poem On Sardar Vallabhbhai Patel

31 अक्टूबर 1875 को,

वल्लभभाई पटेल का जन्म हुआ।

गुजरात के नाडियावाड में

भारत का लौह पुरुष पैदा हुआ।

झवेरभाई पटेल पिता और

लाडबा देवी थी माता।

कठिनाई में बचपन बीता,

था संघर्षों से नाता।

बारड्रोली सत्याग्रह से,

सरदार की उपाधि पाई थी।

अपने नाम के आरंभ में,

यही उपाधि अपनाई थी।

1947 में पहले गृह मंत्री बने,

विभाजन का साया मंडराया था।

कुशल रणनीति से उन्होंने,

रियासतों का एकीकरण कराया था।

बिखरे भारतवर्ष की भ्रांतियों को,

तुमने ही तो तोड़ा था।

भारत की 565 रियासतों को,

तुमनें ही तो साथ जोड़ा था।

भारत माता का एकीकरण कर,

उसका श्रृंगार किया।

अखंड राष्ट्र का स्वपन,

तुमने ही तो साकार किया।

1991 में मरणोपरांत,

उन को भारत रत्न मिला।

धन्य है भारत भूमि जहां,

लौह पुरुष सा फूल खिला।

सादा जीवन उच्च विचार,

उनका जीवन दर्शाता है।

भारत के जन-जन को,

जीवन जीना सिखलाता है।

भारत मां के लौह पुरुष

वल्लभभाई कहलाते हैं

इनका वंदन करते हैं,

हम सब शीश नवाते हैं।

भारत के लौह पुरुष सरदार

Poem On Sardar Vallabhbhai Patel

लौह पुरुष हिम्मतवाला था,

भारत का रखवाला था।

गद्दारो की छाती पर,

गड़ने वाला भाला था।

सब सूबो रजवाड़ो को,

एक सूत्र में ढाला था।

राजनीति नभ मंडल में,

वो नक्षत्र निराला था।

उस लोहे ने जिसे छुआ,

उसको पारस कर डाला था।

पल में एक हलाहल था,

पल में अमृत का प्याला था।

लौह पुरुष जो कहलाया,

वो सरदार हमारा था।

संघर्ष किया भारत के खातिर,

अलबेला वो रखवाला था।

सरदार वल्लभ भाई पटेल कविता

Poem On Sardar Vallabhbhai Patel

खंड खंड को जोड़ जिसने,

अखंड राष्ट्र का सृजन किया।

उन शिल्पी वल्लभ को सबने,

लौहपुरुष कह नमन किया।

बापू के अनुयायी थे,

खेड़ा से रण में रखे कदम।

भर हुंकार बरदौली में बोले,

न दे लगान की रत्ती हम।

वाणी में थी सिंह गर्जना,

उर में थे अनुराग नरम।

बढ़ी ख्याति अखिल हिन्द में,

चूर किया सत्ता का भ्रम।

अत्याचार के शासन का,

दृढ होकर जिसने दमन किया।

उन युग शिल्पी को सबने,

लौहपुरुष कह नमन किया।

सदियों से जो नहीं था हुआ,

चंद दिनों में सफल किया।

पांच सौ पैसठ रजवाड़ों को,

कूटनीति से विलय किया।

जूनागढ़ से जनमत लेकर,

कश्मीर से सुलह किया‌।

सबक सिखा करके निजाम को,

हैदराबाद में समर किया।

इस्पात के ढाँचे की सेवा का,

नए रूप में गठन किया।

उन युग शिल्पी वल्लभ को सबने,

लौहपुरुष कह नमन किया।

साहस धैर्य की अनुपम दृष्टि,

हिय में थे संजोय हुए।

धरा से उठकर बने हिमालय,

जिनकी गुरुता गगन छुए।

अतुल त्याग की मूरत थे वे,

लोभ न जिनके निकट गये।

अखंड राष्ट्र एकता हेतु,

तन मन धन से अर्पित भए।

उर में धारण कर सेवा भाव,

फिर कुरीतियों का दमन किया।

उन युग शिल्पी वल्लभ को सबने,

लौहपुरुष कह नमन किया।

कायम रखने राष्ट्र एकता,

उच्च पदों का त्याग किया।

विजयी होकर लोभ क्रोध पर,

देशहित का साथ दिया।

दूरदर्शिता की शक्ति थी,

चीन के प्रति चेताया था।

अमर हुए जब ज्ञात तब,

खुद को घर न बनाया था।

धन्य हो गई धरा हिन्द की,

जो भारत भू पर जन्म लिया।

उन युग शिल्पी वल्लभ को सबने,

लौहपुरुष कह नमन किया।

खंड खंड को जोड़ के जिसने,

अखंड राष्ट्र का सृजन किया।

उन युग शिल्पी वल्लभ को सबने,

लौहपुरुष कह नमन किया।

सरदार वल्लभ भाई पटेल कविता

Poem On Sardar Vallabhbhai Patel

नमन है देश के उस सरदार को,

एक किया जिसने देश की एकता के तार को।

जिसने बारदोली सत्याग्रह की बागडोर ली थी,

सफलता की खुशी में लोगों ने,

सरदार की उपाधि दी थी।

रियासतों के एकीकरण से अखंड भारत बनाया था

लौहपुरुष बनकर राजे-रजवाड़ों को मनाया था

हालांकि आजादी के बाद रियासतों की समस्या भारी थी

पर एक करने वाले सरदार की लीला सबको प्यारी थी।

ना बम गिराया, ना खून बहाया मगर

एक कर दिया हर राजा की तलवार की

नमन है देश के उस सरदार को

एक किया जिसने देश की एकता के तार को

जिसने देश प्रेम को धारण किया था

562 रियासतों को एक करने का प्रण लिया था

नेतृत्व-शक्ति से दूरदर्शिता को अपनाया था।

अखंड भारत के रूप को असली जामा पहनाया था,

संघर्ष की राहों से गुजर कर सबका प्यार पाया था,

गर्व है हमको कि देश में ऐसा देशभक्त आया था।

हालांकि पहेली अनसुलझी देश के लिए हैं कि

क्यों नहीं बनाया प्रधानमंत्री ऐसे दिलदार को,

नमन है देश के उस सरदार को,

एक किया जिसने देश की एकता के तार को।

ऐसे महापुरुष सच्चे देशभक्त कहलाते थे,

हमको देशभक्ति के रंग से नहलाते थे,

जिनकी रग-रग में देश प्रेम बसता था।

दुश्मनों को भी जिनका डर हरपल डसता था,

जिनका त्याग और समर्पण मूलमंत्र था,

सादा जीवन-उच्च विचार जीने का तंत्र था।

उनकी जयंती पर प्रतिज्ञा लेनी होगी हमें कि

कम नहीं होने देंगे राष्ट्रीय एकता की धार को,

नमन है देश के उस सरदार को,

एक किया जिसने देश की एकता के तार को।

सरदार वल्लभ भाई पटेल कविता

Poem On Sardar Vallabhbhai Patel

बिखरी हुई रियासतों का

जिसने एकीकरण किया,

आज़ाद भारत को जिसने

एकता का मंत्र दिया।

है नमन उनको बार-बार हमारा,

आज़ादी के महानायक और

व्यक्तित्व के धनी थे सरदार हमारा।

लड़ी लड़ाई आज़ादी कि,

अंग्रेजों को खदेड़ा था।

एकता का दूत थे वो

रजवाड़ों को जोड़ा था।

देशभक्ति थी जिसके

रग-रग में, महाशक्ति

बने भारत इस जग में,

हृदय में सरलता की पुकार,

आवाज़ में सिंह की दहाड़

लौहपुरुष के नाम से जिसे,

जानता है संसार सारा।

आज़ादी के महानायक और

व्यक्तित्व के धनी थे सरदार हमारा।

खण्ड-खण्ड को जोड़ा जिसने,

अखण्ड राष्ट्र का सृजन किया।

सदियों में जो नहीं हुआ था,

वो चंद दिनों में सम्भव किया।

पाँच सौ पैसठ रजवाड़ों को

कुटनीति से विलय किया।

जिसने अपने कंधों पर उठाया

अखण्डता का भार सारा।

आज़ादी के महानायक और

व्यक्तित्व के धनी थे सरदार हमारा।

जनमत से जूनागढ़ को

सुलह से कश्मीर को।

सबक सीखा के निजाम को

हैदराबाद का विलय किया।

और बदला भारत के तस्वीर को ।

चीन के प्रति भी चेताया था,

दूरदर्शिता थी जिसकी दृष्टि में।

खुद का घर भी बना न सके

जो लीन थे देशभक्ति में।

ऐसे हीं नेता का देश को है दरकार हमारा।

आज़ादी के महानायक और

व्यक्तित्व के धनी थे सरदार हमारा।

है नमन उनको बार-बार हमारा ।

-नीरज कुमार

सरदार वल्लभ भाई पटेल कविता

Poem On Sardar Vallabhbhai Patel

अखंड हिंदुस्तान बनाना जिनका लक्ष्य और काम था,

सरदार वल्लभ भाई पटेल उनका नाम था।

कोई कहे लौहपुरुष कोई कहे अखंड देश का जनक,

जुडा रहे देश सारा यही था उनका लक्ष्य एक।।

हैदराबद के निजाम को देश के सामने झुकाया,

न करे अपने देश से गद्दारी ये उसको सिखाया।

आपने ही तो दिलाया देश को काश्मीर !

सही सलामत रख दिया हिंदुस्तान का सिर !!

ना हुआ और ना होंगा आप जैसा नेता महान !

आपने ही बढ़ाई हिंदुस्थान की शान।

-गोवर्धन वाघ

-लौहपुरुष सरदार पटेल स्पति दिवस

नडियाद के भारतरत्न वीर,

तुम गांधी के अहिंसक तीर।

कौटिल्य नीति के तुम हो धीर,

एक भारत बना तुम्ही कर्म अक्षय क्षीर।

एक सूत्र किया भारत को,

एकता का लेकर संकल्प।

बटे प्रांत के मिटा आक्रांत,

देश एकता एक मात्र विकल्प।।

देश भक्ति शक्ति रख रग रग में,

अनंतकाल का दुःस्वप्न मिटाया।

स्वतंत्रता को अर्थ व्यवस्थित देकर,

जाति पाति का भेद हटाया।

किसानों को भूमिधर बनाकर,

भारत किसान सुदृढ़ बनाया।

नियम नवीन कृषि को देकर,

एक लहलाता भारत सजाया।।

ग्रहमंत्री प्रथम भारत के,

और बनते भारत के प्रधान।

पर काल इन्हें ले गया संग में

छोड़ गया अनेक जटिल समाधान।।

कश्मीर समस्या कभी ना होती

कभी ना होता विभाजित देश

राजनीती होती देश की निति

और सुशासित होती आज कांग्रेस।।

सरदार संदेश यही है हमको

अपने दायित्व सदा पुरे करो।

आप सुधरोगे तो देश सुधरेगा

ले संकल्प यूँ, लौहपुरुष को नमन करो।।

सरदार वल्लभभाई पटेल

Poem on

जब भी मेरे देश की एकता है टूटी,

तभी वहां के लोगों की किस्मत है फूटी।

अखंडता और शांति को बनाये रखना है जरुरी

इसलिए देश के लोगो मे राष्ट्रीय एकता है जरुरी।

आइये सभी मिलकर एकता के सूत्र मे बन्ध जाये,

गिले शिकवे भूलकर एक दूसरे के गले लग जाये।

Leave a Comment

close