Top 29+ Best Poem On Spring Season In Hindi | वसंत ऋतु पर कविता

बसंत ऋतु

Poem On Spring Season

 

खिल गए हैं, फूल तितली पास आई,

पास कर कान में कुछ गुनगुनाई।

सच बताना ऋतु है कैसी आज आई,

इन्द्रधनुषी है छटा हर ओर छाई।

 

और खुशबू से धरा है यह नहाई,

हैं सभी के मन प्रफुल्लित आज भाई।

सच कहूँ ऋतु रंग की है आज आई,

देख जिसको यह धरा है खिलखिलाई।

-रमेशचन्द्र पंत



आ गया वसंत

Poem On Spring Season

 

रंग-बिरंगे पुष्प खिल उठे,

पते भी मुस्काते हैं।

आमों के पेड़ों पर बैठे,

पंछी गीत सुनाते हैं।

 

कहीं गुलाबों की खुशबू है,

कहीं लिली की सुंदरता।

जहां पवन में चंचलता है,

वहीं कुसुम की कोमलता।

 

झूम रही खेतों में देखो,

सरसों भी मतवाली रे।

पगडंडी पर बच्चे दौड़ें,

बजा-बजाकर ताली रे।

 

बदल गई छवि इस धरती की,

जब पतझड़ का हुआ अंत।

चहक-चहककर चिड़िया कहतीं,

लो फिर से आ गया वसंत।

-डॉ. देशबंधु शाहजहांपुरी




आया बसंत

Poem On Spring season In Hindi

 

मन हर्ष, उमंग में,

गदगद होने लगा।

पेड़ नव कलश लिये।

 

खिल उठा,

पौधे भी हरियाली से,

लहलहा उठे।

आसमान में भंवरा भी,

गुनगुनाने लगे।

 

अब पलाश भी खिलने को हैं।

सुबह-सुबह,

कोयल की कूक,

सुनाई पड़ने लगी।

 

सब सखियां भी,

मिल कर गाने लगीं।

सब पर चढ़ा खुशियों का रंग।

 

मन बसंत की भांति,

खिलने लगा।

-नितेश कुमार सिन्हा

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ऋतुओं की रानी

Spring Season Par Kavita In Hindi

 

धरा पर छायी है हरियाली,

खिल गयी हर इक डाली-डाली।

नव पल्लव, नव कोपल फुटती,

मानो कुदरत भी है हंस दी।

 

छायी हरियाली उपवन में,

और छायी मस्ती भी पवन में।

उड़ते पक्षी नील गगन में,

नयी उमंग छायी हर मन में।

 

लाल, गुलाबी, पीले फूल,

खिले शीतल नदिया के कूल।

हंस दी है नन्ही-सी कलियां,

भर गयी है बच्चों से गलियां।

 

देखो नभ में उड़ते पतंग,

भरते नील गगन में रंग।

देखो यह बसंत मस्तानी,

आ गयी है ऋतुओं की रानी।

-सुमित्रानंदन पंत




बसंत ऋतु

Poem On Spring Season

 

आया बसंत झूम-झूम के,

लाया हरियाली चारों ओर।

खुशी मना रहा हर इक जन,

नाच उठे कोयल और मोर।।

 

छेड़े हवाओं ने सुर ताल,

भौंरों से गुंजार किया।

मिलजुल करके सबने सबको,

ऋतु बसंत का उपहार दिया।।

 

आम के पेड़ लदे बौरों से,

पीले पत्ते झड़ गये सारे।

कोयल रानी लगी कूकने,

खुशियों ने है पंख पसारे।।

 

छटा देख मनमोहक झरने,

बहने लगे धरा पर कल-कल।

नदियां बहने लगीं तोड़ तट,

कहा बसन्त ने जरा संभलकर।।

 

सब ऋतुओं में प्रिय बसंत है,

साल में आता है इक बार।

सदा बसंत रहे जीवन में,

‘दीप’ सुखी हो कुल संसार।।

-दीपक कुमार 




वसंत बहार हैं बच्चे

Poem On Spring Season In Hindi

 

जीवन का प्रमुदित प्यार हैं बच्चे।

उत्साह नवल सत्कार हैं बच्चे।।

मधुरिम हास्य का उपहार बाँटत।

सरिता का कलरव, धार हैं बच्चे।।

 

आँखों में शुभ इंद्रधनुष तैरते।

अम्बर अनंत विस्तार हैं बच्चे।।

खुशियों का मकरंद नेह लुटाते।

मधुमास वसंत बहार हैं बच्चे।।

 

मानव मूल्यों के सबल संवाहक।

शुभ संस्कृति के आधार हैं बच्चे।।

हर दिवस उत्सव पावन बन जाता।

उल्लास, उमंग, उजियार हैं बच्चे।।

-प्रमोद दीक्षित मलय

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बसंत

Poem On Spring Season In Hindi

 

शिशिर ऋतु की हुई बिदाई,

बसंत आया धरा पर बधाई।

मंद-मंद हवा चली गांव-गली,

डाल-डाल पर कलिया खिली।

 

कोयल वन-आंगन कूक रही,

तितली रानी हुलस रही।

भौंरों का सुमधुर गीत सुन,

कुमदिनी भी बिहँस रही।

 

हर्षित जन मन, वन-संत,

आया धरा पर प्यारा बसंत।

हरियाली संग खुशहाली देने,

आया ऐश्वर्य – वैभव अनंत।

-गोपाल कौशल



बसंत बहार

Poem On Spring Season In Hindi

 

ऋतुओं में राजा की संज्ञा है जिसे,

प्रेम प्यार की मोहिनी शक्ति है जो,

आम की मंजरियों का मुकुट।

सरसों का पीला फूल,

चारों ओर हो मौसम का खुमार,

लो आ गई बसंत की बहार।

 

कोयल की मोर की आवाज़,

ठिठुरन के अंत की नई शुरुआत।

धरती भरे रंग बिरंगे फूलों से,

फूलों की खुशबू से सारा माहौल,

हो खुशगवार।

लो आ गई बसंत की बहार।

 

अलसी के नीले फूल,

गेहूं की पकती हुई बालियां।

महुए की महक,

प्रकृति को हो जैसे सोलह श्रृंगार।

लो आ गई बसंत की बहार।

 

बसंत जितना वन का है उपवन का है,

उससे कहीं ज़्यादा मन का है।

मनुष्य मन की कोमल,

प्रेम भावनाओं का उभार,

लो आ गई बसंत की बहार।

पुष्पा नायक




प्यारा बसंत

Poem On Spring Season In Hindi

 

नन्हें-मुन्नों का प्यारा बसंत,

दुलारा बसंत, न्यारा बसंत।

 

गुनगुनी धूप और शीतल छाँव,

देता है इन्हें, वो यारा बसंत।

 

स्वच्छ धरती और नीला अम्बर,

निर्मल, पावन, उजियारा बसंत।

 

रंग-बिरंगे कुसुम दल लिये,

खुशबू भरा गलियारा बसंत।

 

सूरज की भीषण गर्मी छाती,

धरती से नौ-दो-ग्यारा बसंत।

-टीकेश्वर सिन्हा 

आया बसंत ऋतुराज

Basant Ritu Par Kavita

 

लेकर हरियाली धरा में,

आया बसंत ऋतुराज।

वन-उपवन में कलियाँ

मुकुलित हो गई।

 

शुभ्र- ज्योत्स्ना सविता की,

पुलकित हो गई।

वृंत- तरु के झूम रहे,

खुश होकर डार-डार।

 

खुमारी ले झूम रहा,

होकर समीर मतवार।

सरसों कुसुमीत हो गई,

खेतों में छाई बहार।

 

गूंज रही उपवन में मधुमय,

भौरों की गुंजार।

बौराए आमतरु,

पुलक उठी अमराई।

 

मनभावन मौसम पाकर,

कोयल ने कूक लगाई।

खिल उठा कमलदल,

और खिल उठा पलाश।

 

लेकर हरियाली धरा में,

आया बसंत ऋतुराज।

-टेकराम ध्रुव “दिनेश”




आई बसंत

Basant Ritu Par Kavita

 

आई बसंत लेकर उमंग,

आई बसंत लेकर उमंग।

चारों ओर छाए बसंत के रंग,

रंग-बिरंगे दिखें उपवन।

 

जैसे सतरंगी छटा छाई,

पेड़ों के कोमल पंखुड़ियां।

और टेसू की नारंगी फूल,

उस पर भँवरे की मंडराई धुन।

 

आम के बौर की महकी खुशबू,

बसंत की आई बहार।

पपीहे की प्यार की तड़प,

चारो दिशा गुंजन गान करें।

 

सब के मन में छाया प्रकृति प्रेम,

बसंत की आई बहार।

आई बसंत लेके उमंग,

आई बसंत लेके उमंग।

-वसुन्धरा कुर्रे

 

ऋतु बसंती

Basant Ritu Par Kavita

 

ऋतु बसंत का दौर,

देख छायी हरियाली।

करते कोयल शोर,

बौर भी लगती डाली।।

 

पीले पीले रंग,

सभी मोहित है होते।

सरसों का है फूल,

खेत में इसको बोते।।

 

हरा भरा चहुँओर,

लगे गेहूँ की बाली।

करते पक्षी शोर,

बैठती डाली डाली।।

 

खुशियाँ चारो ओर,

मोरनी पँख फैलाती।

तोता मैना रोज,

बाग में वह इठलाती।।

 

पुष्पों की मुस्कान,

सभी के मन को भाती।

करे बसंती शोर,

हवायें सर सर आती।।

 

खिलते फूल पलाश,

मनो को लगता प्यारा।

होली बनते रंग,

खेलते हैं जग सारा।।

-प्रिया देवांगन 



वसन्त

Basant Ritu Par Kavita

 

मैंने वसन्त के पुष्पों से,

पूछा – तुम कितने हो सुन्दर?

वे बोले हाँ, हमने पाया,

है विधि से सुन्दरता का वर।

 

हम उपवन में खिलते प्रतिदिन,

प्रतिक्षण हँसते ही रहते हैं।

हम झड़ जाते, मुरझा जाते,

पर, यह न किसी से कहते हैं।

 

मैंने वसन्त के तरुओं से,

पूछा – तुम हो कितने शीतल?

वे बोले हाँ, हममें आए,

हैं नूतन ये पल्लव कोमल।

 

इस मिट्टी को लेकर, देते,

हम फूल और फल मधुर पके।

यह सघन हमारी छाया है,

रह जाते राही जहाँ थके।

 

मैंने वसन्त की लतिका से,

पूछा – तुम हो कितनी कोमल?

वह बोली- हाँ, बढ़ती जाती,

मैं अपने पथ पर हूँ प्रतिफल।

 

संबल का ज्ञान नहीं मुझको,

निज दुर्बलता का ध्यान नहीं।

मैंने सीखा है झुकना बस,

मुझमें छवि का अभिमान नहीं।

 

मैंने वसन्त के विहगों से,

पूछा- तुम कितने हो चंचल?

वे बोले हम गाते रहते,

आनन्द-गीत प्रतिक्षण, प्रतिपल।

 

वन-उपवन में भरते रहते,

अपना कल-गान विकल कूजन।

हममें नव-जीवन का स्वर है,

हममें है भरा नवल-यौवन।

-आरसी प्रसाद सिंह




आया वसंत बहार

Spring Season Par Poem In Hindi

 

वसंत का बहार आया,

फूलों की सौगात लाया।

आमों पर मंजर छाया,

कोयल का दिन बहुराया।

 

सुबह सवेरे सूरज की किरणें,

रोशनी से धरती को नहलाया।

हम बच्चों को उर्जा देकर,

जीवन को बहुमुल्य बनाया।

 

पर्वों-त्योहार का मौसम है यह,

होली से बच्चे करते हैं प्यार।

इसमें बसा सपनों का संसार,

दोस्तों में उल्लास देख कर।

 

मन ही मन मैं भी हरसायी।

बैठ कर यह कविता बनायी,

खुशियों की यह सौगात लाया।

वसंत का बहार आया,

देखो वसंत का बहार आया।

-सफिया रुबाब

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