Top 21+ Best Poem On Makar Sankranti In Hindi | मकर संक्रांति पर्व पर सुंदर कविता

Hello Friends!! Wish you all a very happy and prosperous new year. In this articles, you will find Top 21+ beautiful Makar Sankranti Poem In Hindi. This Makar Sankranti articles is special because Makar Sankranti is the first festival of the year. All Hindus celebrate this festival of Makar Sankranti with great enthusiasm.

Let’s celebrate this festival with this beautiful Makar Sankranti poem on makar Sankranti in Hindi. Kids can learn about festival via this of Makar Sankranti poem in Hindi.

मकर संक्रांति का त्योहार संपूर्ण भारत में मनाया जाने वाला हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है, जो सूर्य के उत्तरायण होने के बाद मनाया जाता है। इस त्योहार की खास विशेषता यह है कि अन्य त्योहारों की तरह अलग-अलग तारीखों को नहीं मनाया जाता है बल्कि यह हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है।

भौगोलिक दृष्टि के अनुसार यह माना जाता है की जब सूर्य मकर रेखा के पास आता है तो वह दिन 14 जनवरी का ही होता है। इसीलिए इस दिन मकर संक्रांति का त्योहार संपूर्ण देश में मनाया जाता है। मकर संक्रांति को ‘स्नान दान’ का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन तीर्थों और पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए दान से देवता प्रसन्न होते हैं।

भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में या त्यौहार अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। आंध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक में उसे ‘संक्रांति’ तमिलनाडु में ‘पोंगल’ के नाम से मनाया जाता है। पंजाब और हरियाणा में इस समय नये फसल का स्वागत मैं ‘लोहड़ी’ के नाम से मनाया जाता है वहीं असम में ‘बिहू’ के रूप में इस पर्व को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

यहां पर हमनें मकर संक्रान्ति पर्व पर सुंदर कविता- Poem On Makar Sankranti In Hindi शेयर किये है। हम उम्मीद करते हैं, कि आपको यह हिंदी कविताएं पसंद आएगी और इसे आगे शेयर जरूर करें।

Poem On Makar Sankranti In Hindi

मकर संक्रान्ति

Poem On Makar Sankranti

मकर राशि में सूर्य है आया,

प्रेम भाव संग अपने लाया।

जन गण का सैलाब है उमड़ा,

नदियों का घाट-घाट हर्षाया।

शीतल पवन संग धूप है बिखरी,

प्रकृति की काया भी निखरी।

नीला अम्बर बना बड़ा अतरंगी,

डोर संग जब उड़े पतंगें सतरंगी।

उत्तरायण की छटा निराली,

सबके चेहरे पर बिखरी लाली।

गुड़,तिल का सब दान हैं करते,

पुण्य कर्म से हैं झोली भरते।

नव वर्ष का यह प्रथम त्योहार,

जीवन में लाए खुशियां अपार।

सबके बीच बड़े प्यार-दुलार,

सबको मुबारक हो संक्रान्ति का त्योहार।

-कल्पना सिंह

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मकर सक्रांति

Poem On Makar Sankranti

नव वर्ष का होता है शुभारंभ,

सक्रांति से होते त्यौहार प्रारंभ।

कोहरा चारों ओर फैलने लगा,

आकाश धुंधला सा दिखने लगा।

कभी-कभी चटक धूप फैलती,

अपनी सुंदर किरणे बिखेरती।

मूंगफली रेवड़ी की है बहार,

खिचड़ी का है यह त्यौहार।

सब तीर्थों में लगी है भीड़ भारी,

गंगा स्नान की करते सब तैयारी।

दान आदि सब करना चाहते,

जितना हो उतना पुण्य कमाते।

मेरे देश के त्यौहार की बात निराली है,

यहां फैली चारों और खुशहाली है।

-एकता शर्मा

मकर संक्रांति

Poem On Makar Sankranti

सुबह -सुबह उठकर बाबा,

नदी नहाने जाते हैं।

हर हर गंगे जपते रहते,

डुबकी साथ लगाते हैं।।

दादी, मम्मी, ताई मिलकर,

लड्डू सभी बनाते हैं।

तिल के लड्डू अच्छे लगते,

बैठ मजे से खाते हैं।।

दान दक्षिणा करते मिलकर,

मन्दिर में सब जाते हैं।

फूल नारियल भोग लगाते,

घर प्रसाद को लाते हैं।।

सभी मनाते मकर संक्रांति,

पतंग साथ उड़ाते हैं।

खुशियों का त्यौहार मनाते,

बच्चे गाना गाते हैं।।

नये -नये सब खेल खिलौने,

दादा घर पर लाते हैं।

मीठी -मीठी तिल की लड्डू

मिलजुल कर सब खाते हैं।।

-प्रिया देवांगन

मकर संक्रांति

Poem On Makar Sankranti

भगवान सूर्य के पुत्र शनिदेव,

मकर राशि के स्वामी हैं।

इस दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव,

से मिलने उनके घर जाते हैं।।

इसलिए इस त्योहार का नाम,

मकर संक्रांति माना गया है।

इस दिन से सूर्य दक्षिण के बजाय,

उत्तर की ओर गमन करने लगते हैं।।

जब तक सूरज पूरब से दक्षिण,

की ओर गमन करते हैं।

तब तक किरणों का असर,

खराब माना गया है।।

जब पूरब से उत्तर की ओर,

सूर्य का गमन होना शुरू होता है।

तब सूर्य की किरणें सेहत शांति,

मानव जाति को लाभ पहुंचाती है।।

मकर संक्रांति के दिन से,

खरमास समाप्त हो जाता है।

शुभ कार्य का योग बनता है,

मोक्ष की सम्भावना प्रबल होती है।।

वेद पुराण भविष्य पुराण के अनुसार,

सूर्य उत्तरायण के दिन व्रती व्रत रखते हैं।

तिल को पानी में मिलाकर,

स्नान या गंगा स्नान करते है।।

सूर्य देव की उपासना की जाती है,

पितरों का ध्यान अर्पण किया जाता है।

गुड़ तिल तेल इत्यादि का दान करते है,

अधिक पुण्यफल की प्राप्ति होती है।।

तिल के लड्डू दही चूड़ा खिचड़ी,

मिठे पकवान बनाकर खाया जाता है।

सुहागिन लड़की के घर खिचड़ी,

का सारा सामान भिजवाया जाता है।।

-प्रियंका पांडेय त्रिपाठी

मकर संक्रांति

Poem On Makar Sankranti

त्योहार अनोखा कहलाए,

मकर संक्रांति जब आए,

धर्म पुण्य में लग जाते हैं,

गजक,रेवड़ी खूब लुभाए।

उत्तरायण का पर्व अनोखा,

सूर्यदेव बदल लेता दिशा,

बूढ़ों को जगाने की प्रथा,

रिवाज दिल दिल में बसा।

भीष्म पितामह प्राण त्यागे,

तभी से दान पुण्य करते हैं,

गौमाता की सेवा कर लो,

पाप कर्म यहां क्यों करते हैं।

परंपराएं चलती ही रहती हैं,

इंसान जग में आएंगे जाएंगे,

बुजुर्ग हमें जो रास्ता दिखाएं,

उन रास्तों में फूल बिछाएंगे।

आग के पास बैठक खुश हो,

भूल रहे जन इस पुराने पर्व,

याद करे बुजुर्गों को लो अब,

मनाएं मिलकर तो होगा गर्व।

-होशियार सिंह यादव

जश्न त्योहारों का

Poem On Makar Sankranti In Hindi

आया महीना माघ का,

लाया जश्न त्योहारों का।

छाया खुशी है चारों ओर,

कट आयी है फसलें घर।

आओ मनाये संग त्योहार,

पोंगल,मकर संक्राति,बिहु ।

लोहरी का जंशन धूम-धाम,

उत्सव ए त्योहारों का।

लाया है अनेकता में एकता चलो,

झूम झूम मनाये पर्व।

रंग-बिरंगे ,तरह-तरह के,

पिठा, लड्डू, तिलकुट, कसार।

बनाये खाये पकवान अनेक,

चलो- चलो सब बच्चे-बुढ़े।

मिल-जुल कर पंतग उड़ाये,

आया महीना संक्राति का।

कर जोड़ करे आराध्य हम,

रहे सलामत हमारी एकता।

बिखरे शांति चारो जहां में,

और हम मनाये सालों साल।

-ममता कुशवाहा

मकर-संक्रांति

Poem On Makar Sankranti In Hindi

सूरज करे प्रवेश है, मकर राशि में आज।

गंगा में डुबकी लगे, जा कर प्रयागराज।।

सूर्य देवता दे रहें, सबको ही आशीष।

अर्घ्य दे रहें हैं सभी, नहिं मन में है टीस।।

नील गगन में उड़ रहे, डोरी संग पतंग।

रंग-बिरंगी हैं सभी, मन में भरे उमंग।।

रवि किरण ये दूर करे, तन के सारे रोग।

भोर काल की धूप में, करते हैं जो योग।।

तिल-गुड़ खाकर दे रहे, सभी बधाई आज।

भारत के त्यौहार पर, हमें खूब है नाज।।

पावन दिन है आज का, कहें सभी संक्रांति।

दान-पुण्य करने लगे, भूले मन के भ्रांति।।

देती हूं सबको यहां, खूब बधाई आज।

ज्यों पतंग ऊपर उड़े, स्वपन बने परवाज।।

-वन्दना नामदेव

मकर सक्रांति

Poem On Makar Sankranti In Hindi

मकर सक्रांति का त्योहार है आया,

दान पुण्य करने का शुभ दिन लाया।

इस दिन दान जो भी करता,

100 गुना होकर हमेशा है लौटता।

आसमान में ऊंची उडे पतंग,

लाल, पीली, हरी और सतरंग।

कोई गंगा में डुबकी लगाए,

करता है शीतल अपना तन-मन।

आओ हम सब मिलकर,

मकर सक्रान्ति का त्योहार मनाएं।

मूंगफली, तिल और गुड़ का भोग लगाएं।

मकर संक्रांति

Makar Sankranti Par Kavita

आओ हम सब मकर संक्रांति मनाये,

तिल के लड्डू सब मिलकर खाये।

घर में हम सब खुशियाँ फैलाये,

पतंगे हम खूब उड़ाये।

सब मिलकर हम नाचे गायें,

मौज मस्ती खूब उड़ाये।

आओ हम सब मकर संक्रांति मनाये,

तिल के लड्डू सब मिलकर खाये।

मूंगफली, गुड़ रेवड़ी संग,

पंजाब लोहड़ी मनाता है।

दक्षिण भारत भी पोंगल मना,

अपने हर ख्वाब सजाता है।

आओ हम सब मकर संक्रांति मनाये,

तिल के लड्डू सब मिलकर खाये।।

मकर संक्रान्ति

Makar Sankranti Poem In Hindi

वैसे तो हर त्यौहार, भारत का प्यारा।

संक्रांति होती बारह, मकर संक्रांति न्यारा।।

मकर संक्रांति का महत्व कुछ ज्यादा है,

सूर्य मिलन पुत्र शनि से,

पिता पुत्र रिश्तों का महत्व बताता है।

सूर्यदेव का मकर से कर्क में जाना,

प्रकाश,ताजगी और ताकत दे जाता है।

नये रूप में रक्त का संचार,

योग का महत्व बताता है।

है प्रतीक उन्नति का,

दिन का पल पल बढ़ना बताता है।

दान,ध्यान,स्नान मिल बैठ,बाँट खाना,

“वसुधैव कुटुम्बकम्”का भाव जगाता है।

उड़ा पतंग,उन्नति और उल्लास को दर्शाता है,

काट फसल किसान खुश हो जाता है।

तिल, गुड़, खिचड़ी का भोग लगा,

सूर्य देव का आभार जताता है।

चैत से पौष और फागुन तक,

हर माह हिंदी का त्यौहार बन जाता है।

गर्मी, सर्दी, वसंत, पतझड़, वर्षा

हर परिस्थिति में खुश रहना सिखाता है।

-गीतांजली वार्ष्णेय

मकर संक्रांति

Makar Sankranti Hindi Poem

कुहरे की चादर सिमटने लगी।

प्रभा से तमस भाव छॅंटने लगी।

मौसम सुहाना अब हो गया,

सूरज की किरणें चमकने लगी॥

वातावरण का देखो यह हाल है।

आकाश होने लगा लाल है।

पूरब‌ में सूरज का अंदाज कुछ,

दिन की अवधि अब बढ़ने लगी॥

कम्बल रजाई धरो दूर अब।

काँटों सी सर्दी हुई दूर अब।

गर्मी गुलाबी के दिन आ गए,

बागों में चिड़ियाँ चहकने लगी।

धनु राशि से अब मकर राशि में।

सूरज चला आता इस आस में।

नव चेतना प्राणियों में जगे,

अंधेरे की ताकत घटने लगी।

ब्रमा कमण्डल से गंगा निकल।

भगीरथ महाराज के पीछे चल।

कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए,

सागर मिलन को मचलने लगी।

भास्कर स्वयं शनि से मिलने गए।

पिता पुत्र के घर टहलने गए।

मकर राशि के स्वामी शनिदेव जी,

दिल में जमी पीर गलने लगी।

इस संक्रांति के दिन महायोग है।

धनु और मकर राशि संयोग है।

संक्रांति, खिचड़ी या पोंगल कहें,

लोहड़ी में प्रकृति थिरकने लगी।

-फूलचंद्र विश्वकर्मा


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