Top 23+ Best Poem On Raksha Bandhan In Hindi | रक्षाबंधन पर सर्वश्रेष्ठ कविता

मंगल-गीत सुनाती राखी

Poem On Raksha Bandhan

भाई-बहन के प्यार के रिश्ते

दिल से खूब निभाती राखी।

कच्चे धागों में बंधे प्रेम को

जीवन भर मुस्काती राखी।

दूर बसे भाई-बहनों को

जोड़े रखती प्यारी राखी।

बहन न होती जिस भाई के

लगती उसको सूनी राखी।

स्वस्थ सुखी रहे भाई मेरा

बहन का भाव जताती राखी।

सावन की रिमझिम बूंदों में

मंगल-गीत सुनाती राखी।

-दिनेश विजयवर्गीय

रक्षा बन्धन

Poem On Raksha Bandhan

रक्षा बन्धन का त्योहार।

भाई बहनों का प्यार।।

रक्षा का बन्धन यह न्यारा।

बन्धता है इसमें जग सारा।।

बहन बांधती इसे कलाई।

रक्षा का व्रत लेता भाई।।

बहनों का यह अनुपम धागा।

बांधा जिसे फिर कभी न त्यागा।।

देनी पड़े भले ही जान।

राखी की बचती है शान।।

आपस में है प्रेम बढ़ाता।

दुनिया को है दिशा दिखाता।।

बन्धन इसका इतना तगड़ा।

भाई बहन न करते झगड़ा।।

-अनामिका प्रजापति

रक्षाबंधन

Poem On Raksha Bandhan

आया रक्षा बंधन भैया,

लेकर सबका प्यार।

है अटूट नाता

इसे दे अनुपम उपहार।।

राखी बाँधे बहना प्यारी,

रेशम की है डोर।

खड़ी आरती थाल लिये अब,

होते ही वह भोर।।

सबसे प्यारा मेरा भैया,

सच्चे पहरेदार।

है अटूट नाता बहनों से,

दे अनुपम उपहार।।

हँसी ठिठोली करते दिनभर,

माँ का राज दुलार।

रखते हैं हम ख्याल सभी का,

अपना यह परिवार।।

राखी के इस शुभ अवसर पर,

सजे हुए हैं द्वार।

है अटूट नाता बहनों से,

दे अनुपम उपहार।।

तिलक लगाती है माथे पर,

देकर के मुस्कान।

वचन निभाते भैया भी तो,

देकर अपने प्राण।।

आँच न आने दूंगा अब तो,

है मेरा इकरार।

है अटूट नाता बहनों से,

दे अनुपम उपहार।।

-महेन्द्र देवांगन “माटी”

रक्षाबंधन

Poem On Raksha Bandhan In Hindi

सावन के इस पुण्य पर्व ने,

मन में प्रीत जगाई है।

अक्षत कुमकुम दीप सुमन से,

थाली आज सजाई है।

टूट नहीं पाता वह बल है,

इस रेशम के बंधन में।

भाल सजा देती है बहना,

रोली कुमकुम चंदन में।

बहना को भाई से अतुलित,

इस राखी में प्यार मिले।

बचपन की यादें है जिसमें,

पावन वह संसार मिले।

जब वापस जाती हैं बहना,

नैना तब भर आई हैं।

अक्षत कुमकुम दीप सुमन से,

थाली आज सजाई है।

अगर बहन आ नहीं सके तो,

भाई को दुख होता है।

आँसू नहीं बहाता पर वह,

मन ही मन में रोता है।

बहना भी अपने भैया बिन,

सुखी कहाँ रह पाती है।

भैया के बारे में सोचती,

बहुत व्यथित हो जाती है।

यह दोनों ही इक दूजे के,

जीवन की परछाई है।

अक्षत कुमकुम दीप सुमन से,

थाली आज सजाई है।

-डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”

रक्षाबंधन

Poem On  Raksha Bandhan In Hindi

रक्षाबंधन आया है,

खुशियाँ ही खुशियाँ लाया है।

खुशियों का त्योहार है,

भाई-बहन का प्यार है।

रंग-बिरंगी राखी है,

डोरी संग बाँधी जाती है।

राखी से सजी कलाई है,

झूम-झूम लहराई है।

भाई-बहन करें ठिठोली हैं,

संग इनके सब हमजोली हैं।

लड्डू, पेड़े, बर्फी, काजू संग,

मम्मी पापा मामा-बुआ संग।

खुशियाँ ही खुशियाँ लाया है,

प्यारा रक्षाबंधन आया है।

छोला पूड़ी और कचौड़ी,

थाली भरकर मिर्च पकौड़ी।

छक-छक कर हम खायेंगे,

नानी के घर जायेंगे।

बुआ को बुलायेंगे,

खूब सजी है प्यारी राखी,

खूब लुभाती न्यारी राखी।

आड़ी तिरछी गोल-गोल है,

बहनें लाती मोल-मोल हैं।

सस्ती महँगी जैसी भी है,

बहनों के मन जैसी ही है।

भरा है इसमें प्यार बहन का,

मीठा-तीखा राग जतन का।

प्रेम बढ़ाओ हिल-मिल गाओ,

आपस में मिल खुशी मनाओ।

-डॉ. आराधना अस्थाना

बहनों की शुभकामना

Poem On Raksha Bandhan

रक्षा बंधन प्रेम का,

हृदय का त्योहार।

इसमें बसती द्रौपदी,

है कान्हा का प्यार।।

कहती हमसे राखियाँ,

तुच्छ है सभी स्वार्थ।

बहनों की शुभकामना,

तुमको कटे सिद्धार्थ।।

भाई-बहना नेह के,

रिश्तों के आधार।

इस धागे के सामने,

हीरे हैं बेकार।।

बहना मूटत प्यार की,

मांगे ये वरदान।

भाई को या-बल मिले,

लोग कटे गुणगान।।

चिठी लाई गाँव से,

जब राखी उपहार।

आँसू छलके आँख से,

देख बहन का प्यार।।

सब बहनों पर हम करें,

मन से सच्चा गर्व।

होता तब ही मानिये,

रक्षा बंधन पर्व।।

-डॉ सत्यवान सौरभ

राखी का त्योहार

Poem On Raksha Bandhan

चुन्नू भैया हाथ बढ़ा कर,

राखी तो बंधवा लो।

रसगुल्ले भी गरम लायी हूं,

जितने चाहो खा लो।

चाबी वाली रेल लायी हूं,

चूं-चूं वाली चिड़िया।

हरे रंग का तोता बोले,

टें-टें कितना बढ़िया।

एक नारियल रखा मम्मा ने,

जो मैं तुमको दूंगी।

सिर पर रखो रुमाल तभी तो,

मैं राखी बांधूंगी।

चिंकी ने राखी बांधी तो,

होने लगे धमाल।

कुछ ने फोटो खींचे,

कुछ ने ली सेल्फी तत्काल।

-प्रभुदयाल श्रीवास्तव

आया रक्षाबंधन

Raksha Bandhan Par Kavita

ढेरों खुशियां ले झोली में,

फिर आया रक्षाबंधन।

राखी संग पेड़ा, रसगुल्ला,

लेकर बहने आयी हैं।

प्यारे भैया के मस्तक पर,

करतीं रोली-चंदन।

ढेरों खुशियां ले झोली में,

फिर आया रक्षाबंधन।

बहनों के नैनों में उमड़े,

नेह-उमंग के बादल।

लंबी आयु मिले भैया को,

करतीं प्रभु से वंदन।

ढेरों खुशियां ले झोली में,

फिर आया रक्षाबंधन।

कच्चे धागे में अदभुत बल,

भाई-बहन को बांधे।

ममता, त्याग, धैर्य, अपनापन,

मधुर प्रीत का बंधन।

ढेरों खुशियां ले झोली में,

फिर आया रक्षाबंधन।

-डॉ देशबंधु शाहजहांपुरी

राखी

Poem On Rakhi

प्यार से गले लगाती है,

देखो यह राखी।

अपना प्यार लूटाती है

देखो यह राखी।

भाई बहन का प्यार,

बतलाती है राखी।

भाई की कलाई पर,

मुस्काती है राखी।

हर बहन को भाई की,

याद दिलाती है राखी।

प्यार के धागों में,

बंध जाती है राखी।

रेशम के धागों से,

बन जाती है राखी।

बाजारों में चहल पहल,

मचाती है राखी।

बहन को उपहार खूब,

दिलवाती है राखी।

भाई की उम्र खूब,

बढाती है राखी।

सारे रिश्तो में मीठास,

घोल जाती है राखी।

भाई बहन का प्यारा,

त्यौहार यह कहती राखी।

-बद्री प्रसाद वर्मा

राखी का बंधन

Raksha Bandhan Par Kavita In Hindi

राखी का त्योहार है आया,

भाई-बहन को खूब झुमाया।

सुबह-सबेरे नहा-धो कर,

कपड़े पहने रंग-बिरंगे।

रोली, अक्षत, चंदन, राखी,

थाली में मिठाई, कंगन।

तिलक लगा कर बांधी राखी,

उतार आरती मिठाई खिलायी।

भाई के रक्षा के वादे से,

बहना बहुत हर्षित हो आयी,

प्यार सलामत भाई-बहन का।

युग-युग से ही सभी को भाया,

राखी का त्योहार आया,

भाई-बहन को खूब झुमाया।

-वृंद पाठक

प्यार का बंधन

Raksha Bandhan Par Poem

रक्षाबंधन लेकर आया,

रिश्तों का उपहार।

इसमें तो छिपा रहता,

भाई-बहनों का प्यार।

बांध कलाई पर राखी बहनें,

खूब दुआएं देती है।

जो उपहार देता है भाई,

खुशी से रख लेती है।

गुनगुनाने का दिल करता,

सुहाना मौसम रागों में।

बड़ी शक्ति होती है,

इन रेशमी धागों में।

दिव्य प्रेम भाई-बहन का,

बहुत सारी कहानी है।

कभी न टूटे यह बंधन,

ऐसी सोच बनानी है।

-सम्राट समीर

रक्षाबंधन का त्योहार

Poem On Raksha Bandhan

रक्षाबंधन का त्योहार आया,

ढेर सारी खुशियां संग लाया।

भाई-बहन का अटूट प्यार छाया,

लो रक्षाबंधन का त्योहार आया।

भाई-बहन का यह अनमोल त्योहार,

पतले से धागे में रहता है छुपा।

भाई-बहन का असीम प्यार,

प्यार ने सारी बगिया को है महकाया।

लो रक्षाबंधन का त्योहार आया,

मेरी प्यारी दीदी मुझे बांधेगी राखी।

दीदी लगायेगी मेरे माथे पर चंदन,

और भी मजबूत होगा हमारा बंधन।

खत्म हुआ मिठाई खाने का इंतजार,

लो रक्षाबंधन का आया त्योहार।

-अरविंद कुमार

राखी का त्योहार

Poem On Raksha Bandhan

राखी का त्योहार है आया,

जीवन का उपहार लाया,

भाई-बहन का प्यार लाया।

राखी संग खुशियां आयी,

बहना जब राखी लायी।

बोली मेरी रक्षा करना,

ढेर सारी मिठाई खिलायी।

मैंने उससे राखी बंधवायी,

शुभ रक्षाबंधन की सबको बधाई।

-विनीत शेखर

रंग-बिरंगी राखी

Poem On Raksha Bandhan

देखो कितनी सुंदर लगती,

राखी रंग-बिरंगी।

पिरो दिये हो इसमें जैसे,

इंद्रधनुष सतरंगी।

कितने रूप रंग ले आये,

मनमोहिनी चितचोरी।

प्रेम व स्नेह जगाये,

हर रेशम की डोरी।

प्यार भरे रंगीन धागों संग,

चमके चंदन, रोली।

खिले-खिले से लगते चेहरे,

महक उठे मन व उपवन।

भाई-बहन के लिए समर्पित,

शुभ हो रक्षाबंधन।

-रेणुका गणेशन

आया रक्षाबंधन

Poem On Raksha Bandhan

रक्षाबंधन पर्व निरला,

भाई-बहनों का यह प्यार।

राखी को न समझना सिर्फ कच्चे धागे,

इससे भाई-बहनों का प्यार जागे।

बहन बांधे प्रेम से राखी ताकि,

करें भाई उसकी रक्षा।

मेरी मानो तो,

यह त्योहार है सबसे अच्छा।

-पिहू राज

राखी का त्योहार

Poem On Raksha Bandhan

राखियों से गुलजार बजार,

आ गया राखी का त्योहार।

मिठाई सजी दुकानों में,

शोरगुल गूंजे कानों में।

रेशमी धागों की भरमार,

राखियों के ढेरों अंबार।

कहीं पर बेसन की बरफी,

कहीं पर काजू की कतली।

कहीं पर रसगुल्ले झक झक,

कहीं पर लड्डू हुये शुमार।

आ गया राखी का त्योहार,

कमलिया राखी लायी है।

थाल में रखी मिठाई है,

साथ में कुमकुम नारियल है।

खुशी का पावन हर पल है,

बहन ने रेशम का धागा।

भाई के हाथों में बांधा,

भाई की आंखों में श्रद्धा।

बहन की आंखों मे है प्यार,

आ गया राखी का त्योहार।

बहन भाई का पावन पर्व,

रहा सदियों से इस पर गर्व।

जरा सा रेशम का धागा,

बनाता फौलादी नाता।

बहन की रक्षा करना धर्म,

भाइयों ने समझा यह मर्म,

बहुत स्नेहिल पावन है।

भाई बहनों का यह संसार,

आ गया राखी का त्योहार।

-प्रभुदयाल श्रीवास्तव

अटूट रिश्ता

Poem On Raksha Bandhan

भाई-बहन का प्रेम ही,

है रक्षाबंधन का त्योहार।

दिल से हम ढेर सारा,

बहनों को दें प्यार।

इन रेशमी धागों में,

होती बड़ी ही शक्ति है।

हमारे लिए बहनें तो,

बड़ा ही ख्याल रखती हैं।

जिस भाई की बहन नहीं,

उन पर क्या गुजरता होगा।

बहन के प्यार के लिए,

दिल टूट-टूट बिखरता होगा।

बड़े से बहना देखो,

बांधती राखी कलाई में।

तुम्हें खूब खुशियां मिले,

ऐसी सोच हर भाई में।

भाई-बहन का ऐसा रिश्ता,

टूटे न कभी भी।

जिसकी डोर कमजोर है वह,

मजबूत बना लें अभी भी।

-सम्राट समीर

अनोखा मनबंधन

Poem On Raksha Bandhan

तोड़े से भी न टूटे,

ऐसा मनबंधन है।

बिन झगड़ा किये रहा न जाये,

मां की डांट से बचायें।

पापा की तरह रखे ख्याल,

ऐसा मनबंधन है।

भाई बन कर डांट भी पड़ जाती,

दोस्त बनकर हंसी भी आ जाती,

जो मेरे लिए हर पल फिक्रमंद रहता है।

जीवन के इस सफर में,

हमसफर भी तुम ही हो।

भाई है तो बेखौफ सड़क पर,

चलने का एहसास है।

राखी और भाई दूज जैसे त्योहार को,

मनाने का एहसास है।

नजाने कब वह इतना बड़ा हो गया,

अब वह मुझे समझाता है।

बहुत हो गयी अब शेरो-शायरी,

सूनो बात मेरी लगा लो।

मक्खन जितना लगाना,

बाद में तो खेलना है तो जरूरी।

तुम सलामत रहना यही दुआ है मेरी,

ला हाथ बांध दूं डोरी रेशम की,

यही है जिंदगी कुछ ख्वाब चंद उम्मीदें।

लेकर अरमान कर लेना पूरे,

ऐसा मनबंधन है।

-निक्की हिसारिया

ला दो न राखी

Poem On Raksha Bandhan

मां ला दो न राखी,

भइया नहीं तो क्या हुआ।

दिदिया को बाधूंगी राखी,

मां देखो न बाजार में।

कितनी रंग-बिरंगी राखियां,

खरीद रही हैं मेरी सहेलियां।

मां अब तो छोड़ो न जिद,

क्यों करती हो मनमानी।

आंखें भर-भर आती हैं,

देख तुम्हारी आना-कानी।

मां-दिदिया को भाई समझ,

बाधूंगी कलाइयों में राखी।

यह रिश्ता बना रहे हमेशा,

न रह जाएं प्यार बाकी।

मां मेरी नादानी को,

तुम बखूबी से समझती हो।

एक बार हां बोल दो न,

अब तो जिद तोड़ दो न।

मां राखी ला दो न,

अब तो कुछ बोलो न।

-मुनटुन राज

भाई बस इतना-सा दो वचन

Poem On Raksha Bandhan

भाई ओ मेरे भाई,

करना अपनी बहनों की रक्षा।

जिंदगी भर करना,

अपनी बहनों की सुरक्षा।

तैयार हो जा तू वीरों की तरह,

निर्भय होकर घूम रहे।

बदमाश हर जगह,

वह बदमाश भी तो भाई होगा किसी का।

तू भी कर एक वादा मुझसे,

किसी भी बहन की,

हर मुसीबत में रहेगा खड़ा।

मुझे विश्वास है तुम रखोगे मेरी,

राखी के धागों का मोल।

नहीं चाहिए कोई गिफ्ट मुझे,

बस कर दो इतना-सा वादा।

जिंदगी भर करेगा रक्षा हर बहन की,

नहीं झुकने दोगे।

कभी किसी बहन का सिर,

रखोगे ख्याल हमेशा।

बहनों के मान-सम्मान की,

भाई बस इतना-सा दो वचन।

-मधुयंका राज

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