Top 37+ Best Poem On Nature In Hindi | प्रकृति पर कविताएं

प्रकृति शक्ति

Poem On Nature In Hindi

जब स्वार्थों से भर जाएंगे घर-घर,

मन-धरा भी जब हो जाएगी बंजर।

तब-तब आसमां भी बरसाएगा अग्नि,

मृत्यु-तांडव सा चहुँओर होगा मंजर।।

तुम प्रकृति का करते रहोगे अति दोहन,

तो कैसे सुरक्षित रह पाएगी यह दुनिया।

गर न माने तो प्रकृति-शक्ति धर रौद्र रूप,

शमशीरें बन मेघों से बरसेगी बिजलियाँ।।

जब-जब मानव ने इसकी हरित देह को,

नोच-नोचकर किया भरपूर अत्याचार।

तब-तब उत्पन्न करने को विभीषिकाएँ,

प्रकृति भी हो गई थी अति लाचार।।

त्यागपूर्वक भोग पुरातन संस्कृति हमारी,

धरा-रक्षण है हम सबकी जिम्मेदारी।

स्वार्थ छोड़ अब बन जाएँ परहितकारी,

आओ मिलकर बचाएँ अपनी प्रकृति प्यारी।।

-ओम माली ‘अंगारा’

प्रकृति के रंग

Poem On Nature In Hindi

किसने पंखों में चुन-चुन के

भरे रंग तितली के?

पानी में रह के भी क्यों न

घुले रंग मछली के?

रंग दी किसने इन्द्रधनुष की

सात पट्टियाँ बोलो?

सुबह सबेरे कौन सूर्य से

कहता आँखे खोलो?

धरा गगन के बीच चाँद को

है किसने लटकाया?

नन्हें-नन्हें तारों को क्यों

इतनी दूर बसाया?

किसने दिया बिखेर पुष्प के

लिए सुगन्ध खजाना?

कौन सिखा जाता कोयल को

मीठे-मीठे गाना?

जरा विचारों इन बातों को

क्या है राज पुराना?

अगर पता चल जायें बच्चों

हमको भी बतलाना।

-अनिल कुमार कश्यप

प्रकृति

Poem On Nature In Hindi

प्रकृति की गोद में पले-बढ़े

हम पर उसके उपकार बड़े,

देकर जीवन का वरदान हमें

खुद मोल लिए खतरे बड़े।

दिनकर ने धरा गरमाई

वृक्षों से प्राण वायु दिलाई,

धरती माँ ने पेट भरा

नदियों ने प्यास बुझाई।।

प्रदूषण का करके विस्तार

प्राणियों पर किया अत्याचार,

जल से लेकर धरती-आकाश

मनुष्य ने मचा दिया हाहाकार।

काट दिए जंगल हरे-भरे

चिड़ियाँ ना अब कहीं कलरव करें,

जानवरों की नस्लें करके तबाह

बढ़ चले हम इंसानियत से परे।।

वादियों में छुट्टियाँ बिताई

समुंदर किनारे नापी गहराई,

जगह-जगह कूड़ा करकट फैला

हमने कहाँ की समझदारी दिखाई।

लालच बहुत बुरी बला भाई

बात क्यूँ समझ ना आई?,

वक्त रहते ना सँभले जो

प्रकृति वसूलेगी मोटी भरपाई।।

-शिवम लिल्हौरी ‘बानगी’

प्रकृति

Poem On 

सूरज से सीखा तेज हमने,

चंद्रमा से शीतल छाया।

पेड़ों से सीखा सहना हमने,

मिट्टी कण कण में समाया।।

चिड़ियों से है उड़ना सीखा,

फूलों से हम मुस्कुराना।

कोयल की कूक से सीखा,

मधुरतम गीत गाना।।

नदियों से है सीखा,

गहरी सोच की धारा।

गगनचुंबी पर्वत से सीखा,

हो ऊँचा लक्ष्य हमारा।।

चींटियों से है सीखा हमने,

मेहनत सदा करते रहना।

समय से है सीखा हमने,

सदा चलते रहना।।

प्रकृति की कण कण में है,

सुन्दर संदेश समाया।

ईश्वर ने इसके द्वारा,

अपना रूप है दिखाया।।

-लवली यादव

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