13+ कोरोना वायरस पर कविता | Corona Poem In Hindi

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corona poem in hindi :- हम आज के पोस्ट में ‘कोरोनावायरस’ विषय पर सुंदर और बेहतरीन कविता आपके साथ साझा कर रहे हैं और यह कविता पसंद आएं तो दोस्तों के साथ साझा अवश्य करें। धन्यवाद!!!

 

corona poem in hindi

 

कोरोना

Corona Poem In Hindi

 

आया कोरोना, आया कोरोना,

सबको बहुत रुलाया कोरोना।

मास्क और दो गज की दूरी पर,

रहना है हमें सिखाया कोरोना।

 

कौन है अपना, कौन पराया,

इसकी पहचान कराया कोरोना।

ऑक्सीजन और स्वच्छ हवा का,

महत्त्व हमें है बताया कोरोना।

 

आत्म निर्भर भारत की ओर,

बढ़ना है हमें सिखाया कोरोना।

भारतीय वैक्सीन के दो डोज से,

अब है यह थर्राया कोरोना।

 

शादी, ब्याह और समारोह में,

खर्चे पर है रोक लगाया कोरोना।

इस मुश्किल के दौर में भी,

थोड़े में जीना सिखाया कोरोना।

 

राजा हो या रंक सभी को,

जीवन का पाठ पढ़ाया कोरोना।

-राकेश बैस

 

कोरोना से मिलकर लड़ना है

Corona Poem In Hindi

 

जीवन पथ पर चलते रहना है।

दीपक की तरह जलते रहना है।

कोरोना आया है सबको डराने,

इस मुसीबत को हंस के सहना है।

 

मुश्किलों से हम नहीं घबराएंगे।

इन तकलीफों को झेल जाएंगे।

ये बुरा दौर भी जल्द ही जाएगा,

अगर हालातों से लड़ते जाएंगे।

 

सुख-दुःख सबके जीवन में आते हैं।

मानव के धीरज को वो आजमाते हैं।

वक्त की परीक्षा में जो नहीं घबराते,

वही लोग दुनिया में सफलता पाते हैं।

 

अपने कोशिश से अब हालात बदलना है।

वीर हैं हम तो धारा के विपरीत चलना है।

इस कोरोना को तो अब जल्दी जाना है,

इस महामारी से सबको मिलकर लड़ना है।

 

इस संकट से हम सब मिलकर लड़ेंगे।

इस महामारी पर भी जीत पा ही लेंगे।

-ओमप्रकाश झा

 

हारेगा कोरोना

Corona Poem In Hindi

 

संभल जाओ हे मानव अब,

विपदा भारी आई है।

कोरोना का संकट देखो,

पूरी दुनिया पे छाई है।।

 

कोई नहीं बचाने वाला,

खुद को तुम्हे बचाना है।

छोड़ो धन के लालच को अब,

दूरी तुम्हें बनाना है।।

 

समझा कर सब हार गये हैं,

शासन और प्रशासन भी।

मंदिर-मस्जिद बंद पड़े हैं,

डोल रहा है आसन भी।।

 

नहीं भीड़ में जाओ अब तुम,

यदि परिवार बचाना है।

बदलो सब जीने के ढंग को,

गुलशन नया सजाना है।।

 

हारेगा कोरोना एक दिन,

बीमारी ये जायेगी।

जीत हमारी निश्चित होगी,

फिर से खुशियाँ आयेगी।।

-महेन्द्र देवांगन

 

जीतेंगे हम

corona poem in hindi

 

घर में ही ठहर कर

सुरक्षित रहना है।

कोरोना को हरा कर

भारत को जिताना है।।

 

दिन ब दिन बढ़ रहा है

कोरोना का संक्रमण।

मानवता के दुश्मनों से

फैल रहा ये संक्रमण।।

 

काली करतूते अभी भी

कुछ लोग किए जा रहे हैं।

इसी कारण से रह-रह कर

नए संक्रमित बढ़ते जा रहे हैं।।

 

किसी से भी नहीं डरें हम

मिलकर एक साथ लड़ें हम।

हर मोड़ पर पहरा मिलेगा

पर आपस में नहीं भिड़ें हम।।

 

छोटी-छोटी जरूरतों पर

घर से बाहर नहीं निकलना है।

पुलिस रोके किसी मोड़ पर

तो हमको नहीं अकड़ना है।।

 

इस सफर में चिकित्सा कर्मी

भगवान का रूप है धरती पर।

जो-जो भी करे दुर्व्यवहार इनसे

बख्शना नहीं है उनको रत्ती भर।।

 

इंसानीयत को खतरे में डाल कर

भेष बदले नए रहनुमा पाएंगे हम।

फिर भी हारेगा कोरोना, जीतेंगे हम

कोरोना पर विजय पाएंगे हम।।

 

विश्व के हर कोने-कोने में

कोविड-19 की ही बात है।

डटकर मुकाबला कर रहे हम

यही भारत की खास बात है।।

 

सबको हंसना-हँसाना है

फिर से खिल-खिलाना है।

पीड़ितों के आंसू पोंछ कर

फिर से भारत को हँसाना है।।

-मंगल कुमार जैन

 

जंग हमें लड़ना होगा

corona poem in hindi

 

कैसे पढ़ें कोरोना में,

समझ नहीं आ रही बात हमें।

शहर में पूरी बंदी है,

गांव में केवल मस्ती हैं।

 

पर गांव के लोग अच्छे हैं,

पूरी सतर्कता बरतते हैं।

पढ़ाई ही आधार है,

खाली रहना बेकार है।

 

पर कोई करे भी क्या,

वायरस बाहर तैयार है।

फिर भी हमें तो पढ़ना होगा,

बहुत जी लिये आम जिंदगी,

अब जंग हमें लड़ना होगा।

-हर्षित पाठक

 

कोरोना का रावण

Corona Poem In Hindi

 

आई देखो विजया दशमी,

रावण खूब जलेगा।

शुरू हुए मस्ती के पल फिर,

मेला बड़ा लगेगा।।

 

मम्मी-पापा संग मेले में,

जाऊँगा इस बार।

झूले पर झूलूँगा मैं तो,

इस बिन सब बेकार।।

 

चाबी वाला बंदर, भालू,

मेले से लाना है।

भेलपुरी, आलू की टिक्की,

पापड़ भी खाना है।।

 

खुशी देखकर, दादा जी ने,

सोनू को समझाया।

वही राम है, जिसने मन का,

दुर्गुण मार भगाया।।

 

स्वच्छ रहेंगे और सतर्क भी,

सभी करें यह प्रण।

मिट जाएगा भारत से तब,

कोरोना का रावण।।

-डॉ० देशबन्धु शाहजहाँपुरी

 

कोरोना का कहर

Hindi Poem On

 

कोरोना का कहर,

छाया है हर पहर।

मानो जीवन मे,

घुल गया हो जहर।

 

न जाने कब थमेगा,

कोरोना का ये लहर।

ऐसा लग रहा है,

इंसान सभी सो गए।

 

जाग उठा है,

सिर्फ कोरोना का कहर।

सुनी बस्ती, सुना उपवन।

 

जाने कब,

पुलकित होगा मन,

स्कूलों और मंदिरो के,

पट हुए बंद।

 

अस्पतालों के द्वार खुले,

गलियां हो गई तंग।

शमशानो मे शवों की ज्वाला है,

मुंह पर लगा मास्क का ताला।

 

ना जाने कितनी जिंदगी बची है,

और कौन जाने वाला है कल।

नित नए आँकड़ों को छूता,

संक्रमण का हैं बोल बाला।

 

दुनिया मे कोरोना है काला चोर,

और वैक्सीन ही रखवाला।

-परवीनबेबी दिवाकर