Top 17+ Best Poem On Flower In Hindi | फूल पर सुंदर कविता

फूल

Poem On Flower In Hindi

बाग-बाग में खिलते फूल

सदा बिहंसते रहते फूल

महक भरी रहती है इनमे

सबको अच्छे लगते फूल

कांटों का कोई मित्र नहीं

कांटों में ही खिलते फूल

अनगिन गुण इनमें होने से

शीष चढ़ाए जाते फूल

फूल सिखाते हंसते रहना

हर मौसम में खिलते फूल

फूल सिखाते भाव जगाना

भौरे गाते गुनगुन गाना

ऐसे प्यारे होते फूल

कभी नहीं हैं रोते फूल

मित्र हमारे होते फूल

बाग-बाग में खिलते फूल

सदा बिहंसते रहते फूल

-चानी एरी

फूल

Poem On Flower

कितना सुंदर है यह फूल,

कितना अच्छा है यह फूल,

रोज सवेरे पानी पीकर,

आँगन में खिल जाता फूल।

माँ की पूजा की थाली में,

सज जाता, इतराता फूल;

मंदिर में माँ के चरणों में,

जाकर खुश हो जाता फूल।

कभी धागा में गूंथकर,

माला बन इठलाता फूल;

कभी मुन्नी के बालों में,

लगकर खुश हो जाता फूल।

आँगन की शोभा बढ़ाता,

दिनभर खुश्बू देता फूल;

सूरज दादा के किरणों में,

झुम झुम हर्षाता फूल।

-ज्योति कुमारी

फूल

Poem On Flower In Hindi

उपवन में मुस्काते फूल,

मधुर सुगंध लुटाते फूल।

सुंदर रंग-बिरंगे हैं,

सबको पास बुलाते फूल।

प्यारी सखी तितलियाँ हैं,

मधुरस उन्हें पिलाते फूल।

भौरे सुना रहे गाना,

झूम-झूम इठलाते फूल।

काँटों में रहकर सीखा,

कभी नहीं भय खाते फूल।

रूप-रंग है अलग-अलग,

सबका साथ निभाते फूल।

गर्मी हो अथवा सर्दी

मौसम से टकराते फूल

निज यश छटा विखेर कर

अंत समय मुरझाते फूल

-गौरीशंकर वैश्य

पुष्प की अभिलाषा

Poem On Flower

चाह नहीं, मैं सुरबाला के

गहनों में गूंथा जाऊं,

चाह नहीं, प्रेमी-माला में

बिंध प्यारी को ललचाऊँ,

चाह नहीं, सम्राटों के शव

पर हे हरि, डाला जाऊं

चाह नहीं, देवों के सिर पर

चढूं भाग्य पर इठलाऊं

मुझे तोड़ लेना वनमाली

उस पथ पर देना तुम फेक

मातृभूमि पर शीश चढ़ाने

जिस पर जावें वीर अनेक।

-माखनलाल चतुर्वेदी

फूल

Poem On Flower In Hindi

सूरज जैसे, चन्दा जैसे,

हमको लगते प्यारे फूल।

सारी दुनिया को महकाते,

लाल, गुलाबी, पीले फूल।

प्रभु के मस्तक पर चढ़ते,

गुलाब, गेन्दा, धतूरा फूल।

प्रेमी गले का हार बनते,

सबका मन लुभाते फूल।

धरती पर ये तारे लगते,

सबका मन हर लेते फूल।

सदा मुसकाने को कहते,

नन्हें रंग-बिरंगे फूल।

-प्रभात कुमार धवन

फूल

Poem On Flower In Hindi

नन्हा फूल पानी पीकर।

खुश होकर मुसकाया।

मुस्करा कर लहराया।

पास वो मेरे आया।

बोला, मिलकर हम खेलेंगे।

घुल-मिलकर सब मित्र बनेंगे।

बाग-बगीचे महका देंगे

आशा का संचार करेंगे

-कृष्णा यादव

सुंदर पुष्प

Poem On Flower In Hindi

लाल नीले बैगनी सब,

आज मन को भा गये।

पुष्प सुंदर लग रहे हैं,

बाग में सब छा गये।।

देख के इस पुष्प को जी,

राग भौंरे गा रहे।

मंद सी मुस्कान लेकर,

बाग में सब आ रहे।।

शीत बरसे मेघ से जब,

मोतियाँ बन जा रही।

फूल से खुशबू निकल कर,

बाग को महका रही।।

रंग इसका प्रेम का है,

ईश को मोहित करे।

हाथ जिसके आय जब वो,

प्रेम से मन को भरे।।

-प्रिया देवांगन “प्रियू”

फूलों की क्यारी

Kavita On Flowers In Hindi

रंग बिरंगी फूलों की क्यारी

खिली खिली लगती है न्यारी

मौसमी पुष्पों की आयी बहार

बगिया सज धज कर गुलज़ार।।

बेला, चम्पा और महकी चमेली

रातरानी की खुशबू खूब निराली

जूही खिलने को हो रही बेताब

गुलाब की अदा, जुदा अलबेली।।

प्रकृति का अनूठा देखो उपहार

रंग- कूची लिए, खड़ा चित्रकार

कैनवास पर, छा गई हरियाली

फूलों को रंगने , आया बेकरार।।

लाल, गुलाबी, नीली लिए आभा

क्यारी की, बढ़ी अनुपम शोभा

पत्तों को भी, अब हुआ गुमान

रजनीगंधा की फैल रही प्रभा।।

आओ प्रकृति से प्यार करें

अब इनका, हम सम्मान करें

पौधों से ही, जीवन है हमारा

बगिया इनसे गुलनार करें।

-कल्याणी झा कनक

फूलों से आई है खुशबू

Phool Poem In Hindi

फूलों से आई है खुशबू

जिंदगी को सजाई है खुशबू

मन को मुग्ध कर आई है खुशबू

प्रकृति को सजाई है खुशबू।

देखो बेला से खुशबू है आई

चंपा-चमेली पुलकित मुश्काई

उपवन भी गुंजित हो आई

भोड़ होते ही रजनीगंधा खिल आई।

कुमूद में कली भर आई

गुलदस्ते की शोभा बढ़ाई

गेंदा तितली के रंग इठलाते

झूम-झूम कर सबको हर्षाते।

कमल कचनार की बात निराली

विजय तिलक की स्वप्न सजाती

ओढ़ौल दिव्य ज्योति जगाती

देवों पर अर्पण को आती।

रात-रानी का बसेड़ा छाया

मन में स्वप्न का दीप जलाया

घर के मुंडेर पर मधुमालती लहराई

चांदनी रात को चकाचौंध कर आई।

गुलाब प्रेम का बोध कराता

ऐहशास को बयां कर जाता

नित्य सवेरे फूलों को देखो

चारो पहर खुशियों में खेलो।

-उत्सव कुमार

फूल

Phool Par Kavita

रंग बिरंगे फूल खिले हैं,

धरती के इस आंगन में।

कलियां प्रेम से मुस्काती हैं,

फूलों के इस प्रांगण में।

रौनक बाग-बगीचों में है,

भौरों के आ जाने से।

झूम रही है कली-कली,

इनके गीत सुनाने से।।

गूंज रही है बाग-बाग में,

कोयल ने जो छेड़ी तान।

फूल खुशी से नाच रहे हैं,

देकर मीठी सी मुस्कान।।

हर इक आंगन खुशियों से,

महक उठा गुलजार हुआ।

‘दीप’ स्वर्णिम नज़ारों से,

हर इक पल यादगार हुआ।।

-दीपक कुमार ‘दीप’

फूल तो फूल है

Poem On Rose In Hindi

खुशबू से विलुप्त एक फूल,

जिसे किसी डाल ने नहीं उगाया।

न उसको हर रोज खाद-पानी,

देकर बड़ा किया गया।

इस फूल को जन्म दिया,

किसी की मासूम नन्ही हाथों ने।

बेकार पड़े उस साम्रगी से,

जो फालतू थी।

भीड़ उमड़ पड़ी है,

खुशबू न दे तो क्या।

फूल तो फूल है।

-श्रेया कुमारी

अच्छे लगते हैं

Poem On Flower In Hindi

‘फूल हमें क्या देते मम्मी

फूल हमें अच्छे लगते हैं,

इंद्रधनुष ज्यों खिला गगन में

कुछ वैसे मोहक लगते हैं।’

‘फूल हमें देते हैं खुशबू,

दुनिया सुरभित कर देते हैं,

मम्मी बोली – ‘इनसे ही तो’

आगे चलकर फल बनते हैं।

इन्हीं फलों के बीच फूल फिर

रूप बीज का धर लेते हैं,

जिनसे पौधे-पेड़ नए बन

एक नई दुनिया रचते हैं।

प्राण-वायु फिर मिलती हमको

और सभी जीवित रहते हैं,

इसीलिए तो फूल सभी को

बहुत-बहुत अच्छे लगते हैं।

-रमेशचन्द्र पंत

फूल खिलाओ

Poem On Flower In Hindi

हँसते गाते समय बिताओ,

खुशियों के पल हरदम पाओ।

जीवन को समझो इक खेला,

इसे झमेला मत बतलाओ।

कल आएगा सुखद सवेरा,

गीत ख़ुशी के मिल के गाओ।

कोयल कुहू कुहू गाएगी,

उसको सुन्दर तुम बतलाओ।

बगिया में आएगी तितली,

उस संग मिल के ख़ुशी मनाओ।

जीवन के हर कठिन समय को,

मिलजुल के सब सरल बनाओ।

तुम अपने मन की बगिया में,

शुभ विचार के फूल खिलाओ।

-महेंद्र कुमार वर्मा

फूलों से आती खुशहाली

Poem On Flower In Hindi

आओ क्यारी एक बनाएँ फूलों वाली,

घर-आँगन को फूलों से महकाने वाली।

गेंदा, जुही, चमेली सबके रंग निराले,

गुड़हल और लिली भी मन को भाने वाले,

रोपें, सींचें, करें सजग होकर रखवाली।

आओ क्यारी एक बनाएँ फूलों वाली।।

बेला की सुगंध से महकेगा हर कोना,

और ग्लैडियोलस का होगा रूप सलोना,

खिले गुलाबों से फूटेगी सुंदर लाली।

आओ क्यारी एक बनाएँ फूलों वाली।।

खुश्बू फैलेगी तो स्वच्छ हवा महकेगी,

भौंरे मँडराएँगे, चिड़िया भी चहकेगी,

नाचेगी तितली सतरंगे पंखों वाली।

आओ क्यारी एक बनाएँ फूलों वाली।।

लाल, गुलाबी, नीले, पीले फूल खिलेंगे,

हौले-हौले सुबह हवा के संग हिलेंगे,

कहते हैं फूलों से आती है खुशहाली।

आओ क्यारी एक बनाएँ फूलों वाली।।

-लायक राम ‘मानव’

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