15+ चींटी रानी पर सुंदर कविता | Poem On Ant In Hindi

 

 

 

नन्ही चींटी

Poem On Ant

 

नन्ही चींटी हमें सिखाती,

बिना रुके बढ़ते जाना।

सर्दी, गर्मी हो या बारिश,

बस यूं ही चलते जाना।

 

आलस का कोई काम नहीं,

रखती अपने काम से काम।

नन्हा-सा ये जीव देखो,

मेहनत का देता पैगाम।

 

अनुशासन है गजब का,

नहीं टूटती कहीं कतार।

अपने वजन से कहीं ज्यादा,

उठा पाती हैं ये भार।

 

हम भी सीखें इस जीव से,

जीवन में कभी न मानें हार।

जो मिला उसे संभालें,

फिर लोहा मानेगा संसार।

-डॉ. अलका जैन

 

चींटी

Poem On Ant

 

देखो- देखो जाती चींटी,

अनुशासन समझाती चींटी।

बिना थके बढ़ती ही जाती,

हिम्मत खूब जुटाती चींटी।

 

इक कतार में चलती जाती,

सबको राह दिखाती चींटी।

अन्न इकट्ठा करने जाती,

अपना फर्ज निभाती चींटी।

 

बरखा आने से पहले ही,

अपना रसद जुटाती चींटी।

छोटी, नन्ही प्यारी-प्यारी,

सबके मन को भाती चींटी।

-जतिन वर्मा

 

प्यारी चींटी

Poem On Ant

 

ओ! प्यारी सी नन्हीं चींटी,

मेहनत इतनी तुम करती हो।

नन्ही-सी तुम गिर-गिर कर भी

कभी आस नहीं खोती हो।

 

ओ! प्यारी सी नन्हीं चींटी,

मेहनत इतनी तुम करती हो।

लक्ष्य एक चुनकर तुम हमेशा,

उसके पीछे चल देती हो।

 

ओ! प्यारी सी नन्हीं चींटी,

मेहनत इतनी तुम करती हो।

हिम्मत कभी न हारने की,

सीख हम सबको देती हो।

 

ओ! प्यारी सी नन्हीं चींटी,

मेहनत इतनी तुम करती हो।

परिश्रम करने का पाठ हमें,

सिखाकर तुम चली जाती हो।

 

ओ! प्यारी सी नन्हीं चींटी,

मेहनत इतनी तुम करती हो।

-प्रिया चतुर्वेदी

 

चींटी

Poem On Ant In Hindi

 

चींटी को देखा?

वह सरल, विरल, काली रेखा,

तम के तागे सी जो हिल-डुल,

चलती लघु पद पल-पल मिल-जुल,

यह है पिपीलिका पाँति।

 

देखो ना, किस भाँति,

काम करती वह सतत,

कन-कन कनके चुनती अविरत।

 

गाय चराती, धूप खिलाती,

बच्चों की निगरानी करती,

लड़ती, अरि से तनिक न डरती,

दल के दल सेना संवारती,

घर-आँगन, जनपथ बुहारती।

 

चींटी है प्राणी सामाजिक,

वह श्रमजीवी, वह सुनागरिक।

देखा चींटी को?

उसके जी को?

भूरे बालों की सी कतरन,

 

छुपा नहीं उसका छोटापन,

वह समस्त पृथ्वी पर निर्भर,

विचरण करती, श्रम में तन्मय,

वह जीवन की तिनगी अक्षय।

 

वह भी क्या देही है, तिल-सी?

प्राणों की रिलमिल झिलमिल-सी।

दिनभर में वह मीलों चलती,

अथक कार्य से कभी न टलती।

-सुमित्रानंदन पंत

 

चिंटी

Poem On Ant In Hindi

 

चिंटी हरदम मेहनत करती,

अपनी धुन में चलती रहती।

क्रम से जाती क्रम से आती,

अनुशासन का पाठ पढ़ाती।

 

चिंटी दिन रात सबको बताती,

कोशिश करना हमे सिखाती।

राहें अपनी खुद वों गढ़ती,

लक्ष्य मार्ग पर आगे बढ़ती।

 

गिरकर उठती उठकर चलती,

बाधाओं से कभी ना डरती।

रगों में चिंटी साहस भरती,

मुश्किलो से डटकर लड़ती।

 

हार कर भी कोशिश करती,

लक्ष्य अपनी प्राप्त करती।

-प्रीतम कुमार साहू

 

आगे बढ़ते जाना

Poem On Ant In Hindi

 

चींटी समय न खोती व्यर्थ,

समझाती जीवन के अर्थ।

 

कितना श्रम ये करती है,

लेकिन कभी न थकती है।

 

चलती रहती सदा निरन्तर,

रुकती कभी नहीं है पथ पर।

 

जोड़-जोड़कर दाना-दाना,

करती जमा बहुत सा खाना।

 

चीनी इसको बहुत सुहाती,

कड़वाहट के पास न जाती।

 

चलती अपने दल के संग,

कभी कतार न करती भंग।

 

इसका तो ये मंत्र पुराना,

आगे हरदम बढ़ते जाना।

-राजकुमार जैन

 

चींटी रानी

Poem On Ant In Hindi

 

चींटी रानी चींटी रानी,

कर्मठता का ना कोई सानी।

हर पल चलती रुकती ना जो,

सतत प्रयत्न की जिसने ठानी।

 

स्वार्थ जिसको छू ना पाता,

उसका सहकार से नाता।

जीवन जीने की रीति सुहानी,

चींटी रानी चींटी रानी।

 

मिलकर खाती ना उकताती,

बीस गुना जो वजन उठाती।

करती ना वो कभी मनमानी,

चींटी रानी चींटी रानी।

 

संचय करना जिसे सुहाता,

लीक से हट चलना ना आता।

मीठे की जो रही दीवानी,

चींटी रानी चींटी रानी।

-व्यग्र पाण्डे

 

दिवस भर चलती रहती चींटी

Hindi Poem On Ant

 

ना पटरी ना इंजन सीटी,

दिवस भर चलती रहती चींटी।

कभी न थकती, कहीं न रुकती,

परिश्रम करने से न चुकती।

 

करती रहती काम से काम,

नहीं चाहती ये कभी आराम।

न बोलती न कुछ कहती,

सदा ही हिलमिल कर रहती।

 

दिखने में लगती बहुत छोटी,

नजर नहीं आता माथा चोटी।

अजब चढ़ती गजब उतरती,

मीठा खाने को टूट पड़ती।

 

यूँ तो लगती सीधी सयानी,

काट खाए तो यादा करादे नानी।

अच्छी सीख चीटी से मिलती,

मिलकर मेहनत से सफलता मिलती।

-नगेन्द्र कुमार मेहता

 

मेहनती चींटियाँ

Poem On Ant In Hindi

 

चींटी रानी, चींटी रानी,

रहती हो हरदम कुछ ढोती,

चलती रहती हो तुम हरदम,

लगता है तुम कभी न सोतीं।

 

श्वेत ही श्वेत तुम्हारे अंडे,

ढोकर इन्हें कहाँ ले जाती,

बिल तो बहुत बड़े गहरे भी,

फिर भी इधर-उधर क्यों जाती।

 

अभी बताई है दादी ने

मुझे असल योजना तुम्हारी

अभी फसल का है यह मौका

खाद्यान्न की मारामारी।

 

आगे मौसम है वर्षा का,

आना-जाना होगा भारी,

ढेरों अन्न इकट्ठा करतीं,

यह वर्षा ऋतु की तैयारी।

 

समझ हमारी में भी आया,

पक्का सबक तुम्हीं से पाया,

मेहनत सदा काम आती है

व्यर्थ नहीं युक्ति जाती है।

-डॉ. आर.बी. भण्डारकर

 

चींटी

Poem On Chiti

 

चींटी चलती पंक्ति बनाकर,

एक-दूसरे को समझाकर।

बातचीत कर-कर वे चलती,

आपस में वे कभी न जलती।

 

कभी न दुश्मन से घबराती,

पूरी ताकत से भिड़ जाती।

जान बचाकर दुश्मन भागे,

टूटें नहीं प्रेम के धागे।

 

भोजन मिलजुल कर लाती हैं,

एक साथ मिलकर खाती हैं।

सदा बड़ों का मानें कहना,

इनसे सीखो मिलकर रहना।

-धर्मेन्द्र सिंह

 

चींटी रानी

Chiti Par Kavita

 

चींटी रानी-चींटी रानी,

कद में तू छोटी लेकिन,

शरारतें तेरी आसमानी।

घर तेरा पेड़-पौधों पर तो,

कभी गहरे गड्ढों में रहती।

 

शहद, मिठाई, चीनी,

जैसी है तेरी खुराकी।

गिरती-संभलती अपना,

लक्ष्य जरूर पूरा करती।

 

बड़े-बड़े पहाड़ों को भी,

तू पैदल पार कर जाती।

जीवन तेरा छोटा लेकिन,

ख्वाब बड़े-बड़े बुनती।

 

छोटी-सी जिंदगानी में तू,

सफलता के शिखर चुनती।

छोटी तेरी काया न तू,

थकती न कभी रुकती।

 

कठिन परिस्थितियों में,

भी तू कतारों में चलती,

चींटी रानी-चींटी रानी।

इस दुनिया में तेरी तो,

है एक अलग कहानी।

-नीक राजपूत

 

नन्ही चींटी

Poem On Ant

 

हाथी दादा हाथी दादा,

जोर-जोर चिल्लाती।

हाथी दादा के कानों में

आवाज न मेरी जाती।

 

कैसे पहुँचे बात मेरी,

सोच-सोच घबराती।

पुरखों के उपदेश को,

क्या हूँ मैं अपनाती।

 

कुछ सोच फिर से नन्ही,

चींटी जोर लगाती।

दम लगा कर

हाथी दादा का नाम पुकारती।

 

हाथी दादा हाथी दादा

फिर से मैं चिल्लाई।

अरे-अरे यह कौन आया,

देखें नीचे भाई।

 

मैंने कहा हाथी दादा

देख-देख के चलना।

पहले की भाँति अपना,

बुरा हाल न करना।

 

छोटी सी चींटी भी अपना,

बड़ा कमाल दिखाती।

अच्छे-अच्छे को अक्सर,

है वह पानी पिलाती।

 

बड़ी शान से हाथी दादा

आगे बढ़ते जाते।

हम जैसे नन्हे-मुन्ने को

भाव नहीं क्यों देते।

 

आँखें चौड़ी करके दादा,

बोले नन्ही चींटी।

ऐसी वैसी बात नहीं

यादें हैं मीठी-मीठी।

 

छोटे बड़े हम सब

मिलकर ही हैं रहते।

दंभ भाव छोड़ दिया,

अब नेहभाव में बहते।

 

सुनकर नन्ही चींटी बोली,

यह हुई ना बात।

हाथी दादा अब रोज

होगी आपसे मुलाकात।

-जयंती खमारी

 

जन्मदिन चींटी का

Poem On Ant In Hindi

 

सुनो-सुनो ओ वन के वासी।

मैं चींटी रानी की दासी।

जन्मदिवस रानी का आया।

सबको है न्यौता भिजवाया।

 

आए कालू भालू और चीता।

डब्लू डॉगी और हाथी मीता।

लोमड़ ढम ढम ढोल बजाए।

और जिराफ भी नाचे गाए।

 

घोड़ा पूंछ उठा कर आया।

आइसक्रीम पर जी ललचाया।

शेर सिंह कुछ शांत पड़ा है।

बन्दर नटखट मगर बड़ा है।

 

चींटी अब आई सज-धज कर।

नेकलेस निज गले पहन कर।

ऑरेंज फ्लेवर केक मंगाया।

कैंडल केक पे रख के जलाया।

 

काटा केक कैंडल को बुझाया।

ताली बजा हैप्पी बर्थड गाया।

नाचा मोर पंख फैला कर।

सबने बधाई दी जा जा कर।

 

क्वीन बनी चींटी मुस्काती।

आज खुशी से है इतराती।

फिर टेबल पर खाना आया।

लेकर स्वाद सभी ने खाया।

 

चींटी ने अतिशय सुख पाया।

जन्मदिवस क्या खूब मनाया।

चींटी ने शुभ आशीष पाकर।

विदा किया आभार जता कर।

-रिपुदमन झा

 

चींटी चली बाजार

Short Poem On Ant In Hindi

 

नहा-नहा साबुन शैंपू से,

सजधज चींटी हुई तैयार।

चुन्नी लहँगा लगा लिपस्टिक,

ऊँची सैंडल पहन कर हार।

 

तोता, कौआ, मोर, कबूतर,

सभी अचंभित देख श्रृंगार।

बजा-बजा कर टन-टन घंटी,

चींटी करने चली बाज़ार।

 

आलू, गोभी, पालक, भिंडी,

गाजर और, टमाटर, मूली।

चीनी, चावल, शहद, मिठाई,

था कुछ और जिसे मैं भूली।

 

खुद से बातें करती जाती,

बाल सँवारती बारंबार।

बजा-बजा कर टन-टन घंटी,

चींटी करने चली बाज़ार।

 

हाथी दादा मिले बीच में,

सूट बूट में खड़े तैयार।

बैठा ले मुझको भी बहना,

होगा तेरा बहुत उपकार।

 

लेती चलती हाथी दादा,

पर हूँ थोड़ी आज बीमार।

बजा-बजा कर टन टन घंटी,

चींटी करने चली बाज़ार।

 

कुत्ता, बिल्ली, बकरी, पूछे,

पूछा धीरे नटखट बंदर।

कहो कहाँ जाती हो आंटी,

परियों-सी तुम बनकर सुंदर।

 

आँखों पर है काला चश्मा,

अजब रूप में लाया निखार।

बजा-बजा कर टन-टन घंटी,

चींटी करने चली बाज़ार।

-विमल कुमार

 

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