13+ कोयल पक्षी पर कविता | Koyal Poem In Hindi

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Koyal Poem In Hindi :- आज के पोस्ट में हम यहां पर 13+ कोयल पक्षी पर सुंदर कविता (koyal par kavita) लेकर आए हैं। यह पक्षी अपने मधुर स्वर में अपना संदेश सुनाती हैं। इसकी आवाज सभी को प्रिय लगता है। इसे अपने दोस्तों के साथ अवश्य ही साझा करें। धन्यवाद !!!

 

Koyal Poem In Hindi

 

कोयल रानी

Koyal Poem In Hindi

 

कोयल रानी, कोयल रानी,

कुहू कुहू गीत सुनाओ न।

आओ बैठो न पास हमारे,

मीठी-मीठी अपने बोली से।

 

मन हमारा बहलाओ न,

सूरत तुम्हारे काली है।

फिर भी लगती बहुत ही

तुम प्यारी प्यारी हो।

 

इस पेड़ से उस पेड़ पर,

उड़ उड़ कर तुम जाती हो।

अपनी मीठी बोली से,

सबका मन मोह लेते हो।

-सुरेखा नवरत्न

 

कोयल

Poem On Koyal In Hindi

 

देखो कोयल काली है पर,

मीठी है इसकी बोली।

इसने ही तो कूक-कूक कर,

आमों में मिश्री घोली।

 

कोयल-कोयल सब बतलाना,

क्या संदेशा लाई हो।

बहुत दिनों के बाद आज फिर,

इस डाली पर आई हो।

 

क्या गाती हो किसे बुलाती,

बतला दो कोयल रानी,

प्यासी धरती देख मांगती,

हो क्या मेघों से पानी?

 

कोयल यह मिठास क्या तुमने,

अपनी मां से पाई है?

मां ने ही क्या तुमको मीठी,

बोली यह सिखलाई है?

 

डाल-डाल पर उड़ना गाना,

जिसने तुम्हें सिखाया है।

सबसे मीठे-मीठे बोलो,

यह भी तुम्हें बताया है।

 

बहुत भली हो, तुमने मां की,

बात सदा ही है मानी।

इसीलिए तो तुम कहलाती,

हो सब चिड़ियों की रानी।

-सुभद्रा कुमारी चौहान

 

काली कोयल

Poem On Cuckoo

 

काली काली कोयल है,

पर कितनी मीठी बोली है।

इसने ही तो कूकू-कूकू,

आमों में मिश्री घोली है।

 

यही आम जो अभी लगे हैं,

खट्टे-खट्टे हरे हरे।

कोयल कूकेंगे हो जाएंगे,

पीले-पीले रस भरे-भरे।

 

हमें देखकर टपक पड़ेंगे,

हम खुश होकर खाएंगे।

ऊपर गायेगी कोयल,

हम नीचे उसे बुलाएंगे।

 

कोयल कोयल सच बतलाओ,

क्या संदेशा लाई हो।

बहुत दिनों के बाद आज फिर,

इस डाली पर आई हो।

 

क्या गाती हो किसे बुलाती हो,

कह दो कोयल रानी।

प्यासी धरती देख मांगती हो,

क्या मेघों से पानी।

 

अथवा कड़ी धूप में हमको,

दुखी देख घबराती हो।

शीतल छाया भेजो यह,

बादल से कहने जाती हो।

-विरेन्द्र कुमार चौधरी

 

कोयल गीत सुनाती

Poem On Cuckoo

 

रानी मनु यश बिट्टू,

मैं तुम्हें बताऊँ साथी।

कोयल बगिया में गीत,

आखिर क्यों सुनाती।

 

शीतल हवा के बहने पर,

सूरज के उगने पर।

पूरब में लाली छाती,

कोयल गीत सुनाती।

 

आम शाखा पर बैठकर,

पका हुआ फल खाकर।

मन ही मन मुस्काती,

कोयल गीत सुनाती।

 

कोयल को लगता जब,

सारा बाग उसका अब।

बड़ी शान से इठलाती,

कोयल गीत सुनाती।

-टीकेश्वर सिन्हा 

 

कोयल

Koyal Poem In Hindi

 

काली कोयल बोल रही है,

डाल-डाल पर डोल रही है।

 

कुहू कुहू का गीत सुनाती,

कभी नही मेरे घर आती।

 

आमों कि डाली पर गाती,

बच्चों के दिल को बहलाती।

 

कूक-कूक कर किसे बुलाती,

क्या अम्मा की याद सताती?

 

यदि हम भी कोयल बन जाते,

उड़ते फिरते, गीत सुनाते।

-पुष्पा शुक्ला

 

कोयल रानी

Poem On Cuckoo In Hindi

 

कोयल रानी कोयल रानी,

तुम हो कितनी सयानी।

डाल डाल पर चहकती,

लगती हमें बड़ी सुहानी।

 

कोयल तुम हो एकदम भोली,

मीठी लगे तुम्हारी बोली।

तुम्हारी मीठी वाणी ने,

कानों में सबके मिश्री घोली।

 

तुम्हारे किस्से रोज सुनाती,

मुझको मेरी नानी।

कोयल रानी कोयल रानी,

तुम हो कितनी सयानी।

 

कुहू कुहू कर आवाज लगाती,

मीठी मीठी तान सुनाती।

अम्बुआ के पेड़ पर बैठ,

मीठे मीठे हमें गीत सुनाती।

 

रोज नींद से हमें है जगाती,

तुम्हारी मधुर वाणी।

कोयल रानी कोयल रानी,

तुम हो कितनी सयानी।

 

मीठी बोली से सबको लुभाती,

खेतों में कीड़े खा,फसल बचाती।

कौवे के बनाए घोंसले में,

चुपचाप अपने अंडे रख आती।

 

कभी करती तुम चतुराई,

कभी अल्हड़ नादानी।

कोयल रानी कोयल रानी,

तुम हो कितनी सयानी।

 

साधारण हो या हो कोई विशेष,

कड़वे बोल से लगती ठेस।

मीठे शब्दों से जग जीतो,

कोयल देती तुम यह प्यारा संदेश।

 

नव युग की यह रीत नहीं,

सीख यह बहुत पुरानी।

कोयल रानी कोयल रानी,

तुम हो कितनी सयानी।

-संगीता चौबे पंखुड़ी

 

कोयल

Poem On Cuckoo In Hindi

 

मधुर स्वर घुल गया,

बसंत ऋतु के आने पर।

निक्कू, निक्की झूम उठे,

कोयल के गीत गाने पर।

 

कोयल का गीत,

लगता है बड़ा प्यारा।

आम्र कुंज में छिपकर,

गाये दिन सारा।

 

खुलती है नींद जब,

बसंत के भोर में।

लगे प्रकृति सराबोर है,

कोयल की कूक की शोर में।

 

मन को मोह लेती है,

कोयल की प्यारी आवाज।

सबसे न्यारा होता है,

प्यारी कोयल का अंदाज।

-रघुवंश मिश्रा

 

कोयल

Koyal Poem In Hindi

 

कोयल काली होती लेकिन,

मधु रस घोलें बोल।

उसकी मधुमय वाणी समझो,

सचमुच है अनमोल।

 

जब-जब मधु रितु है आती तब-तब,

कोयल है गाती।

अपनी मीठी वाणी से वह,

दिल है जीत लेती।

 

मीठी वाणी की महिमा का,

पाठ हमें समझाती।

जब भी बोलो मधुरस घोलो,

बात यही बतलाती।

 

रंग रूप की नहीं सदा ही,

गुण की होती पूजा।

कोयल जैसा मीठा बोले,

और नहीं है दूजा।

 

हम भी यह संकल्प आज लें,

मीठा ही बोलेंगे।

सुनने वालों के कानों में,

मिसरी सी घोलेंगें।

-श्याम सुन्दर श्रीवास्तव

 

कहती कोयल

Koyal Poem In Hindi

 

चढ़ी धूप है,

कड़ी धूप है,

कैसे गाऊँ गाना।

पेड़ कटे हैं,

छाँव नहीं है,

कैसे पाऊँ खाना।

 

हवा नहीं है,

बेचैनी है,

कैसे गाऊँ गाना।

कहती कोयल,

पेड़ लगाओ,

तब गाऊँ मैं गाना।

 

बादल लाओ,

पानी लाओ,

सब खुश हो जाना।

तब गाऊँ मैं,

कू कू स्वर में,

मिसरी जैसी गाना।

-डॉ. सतीश चन्द्र भगत

 

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