21+ कृष्ण जन्माष्टमी पर सुंदर कविता | Poem On Krishna Janmashtami In Hindi

Short Poem On Krishna Janmashtami In Hindi कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर सर्वश्रेष्ठ कविता का संग्रह, Poem On Lord Krishna In Hindi कान्हा तेरी सावली सूरत सबको है भाती। सिर पर मोर मुकुट का ताज पहने हो तुम। Krishna Kavita.

आज के पोस्ट में हम यहां पर श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव पर्व पर सुंदर कविता लेकर आएं हुए हैं।

 

poem-on-krishna-janmashtami-in-hindi

 

कृष्ण जन्माष्टमी 

Poem On Krishna Janmashtami In Hindi

 

जिन्हें देवकी ने जन्म दिया,

यशोदा ने पाला है।

वसुदेव का पुत्र और,

नन्द जी का लाला है।

 

पूतना का वध किया,

और ब्रजवासियों को मोहा है।

गोपियों संग रास रचाया,

और गायों को दूहा है।

 

यमुना तट खेले वह,

ब्रज का जो बाला है।

वसुदेव का पुत्र और,

नन्द जी का लाला है।

 

हमेशा जो कहते कि मैया,

मैंने माखन नहीं खाया है।

क्रोध में आकर मैया ने,

जिनपर गुस्सा दिखलाया है।

 

ऊखल से बंधा वह बालक,

मीरा का गोपाला है।

नन्दगाँव का छोरा,

नन्द जी का लाला है।

 

जिन्होंने दुराचारी,

कंस के हैं लिए प्राण।

कौरवों की भरी सभा में,

द्रौपदी का रखा मान।

 

महाभारत के युद्ध में

गीता का दिया ज्ञान।

गोकुल का जो ग्वाला है

नन्द जी का लाला है।

-दीपक कुमार रंगारे

 

कान्हा तेरी सावली सूरत

Poem On Krishna Janmashtami In Hindi

 

कान्हा तेरी सावली सूरत,

सबको है भाती।

सिर पर मोर मुकुट का ताज,

पहने हो तुम।

 

बांसुरी बजाकर सबका दिल,

जीत लेते हो तुम।

नटखट अदाओं से सबका,

मन भाते हो तुम।

 

माखन चोर कहलाते,

हो तुम।

गोपियों के संग रास,

रचाते हो तुम।

 

माँ देवकी की कोख,

का अभिमान हो तुम।

माँ यशोदा की जान,

हो तुम।

 

कंस को मारने वाले,

वीर हो तुम।

ब्रज की शान हो तुम,

गोकुल की जान हो तुम।

 

हम सबको प्यारे,

हो तुम।

हे कृष्ण कन्हैया हम,

सबको प्यारे हो तुम।

 

तेरी यादें

Poem On Krishna

 

जैसे सूरज की किरणों से,

गर्मी हमको मिलती है।

और भोर की लाली में ही,

कली डाल में खिलती है।।

 

बागों में भी फूल देखकर,

तितली भी इठलाती है।

वैसे ही मन चहक उठे जब,

याद तुम्हारी आती है।।

 

जैसे कलियाँ देख देखकर,

भौरे गाना गाते हैं।

फूलों की खुशबू को पाकर,

लोग सभी सुख पाते हैं।।

 

बारिश की पहिली बूंदों से,

सौंधी खुशबू आती है।

वैसे ही मन चहक उठे जब,

याद तुम्हारी आती है।।

-महेन्द्र देवांगन

 

कृष्ण लीला

Poem On Krishna Janmashtami In Hindi

 

माखन मुख लिपटा हुआ,

मैया पकड़े कान।

बालरूप में कृष्ण,

पाते सभी का सम्मान।।

 

बैठे कदंब के पेड़ पर,

करे राधिका तंग।

सुनाते मुरली मधुर,

बैठ गोपियों के संग।।

 

कृष्ण प्रेम की बांसुरी,

है राधा के नाम।

पावन सच्चा प्रेम है,

जैसे चारों धाम।।

 

गीत प्रेम के गा रहे,

सारे मिलकर आज।

दौड़ आई राधा,

छोड़कर अपने काज।।

 

धड़कन में है राधिका,

नस-नस में है प्रीत।

वृदावन गूँजता,

कृष्ण का ही संगीत।।

 

भोली-भाली राधिका,

पनिया भरने जाय।

छेड़े मोहन राह में,

गोपियाँ भी शरमाय।।

 

राधा बैठी राह में,

लिए कृष्ण की आस।

छलिया मन को छल गया,

कैसे करूं विश्वास।।

-प्रिया देवांगन

 

मधुर मुरलिया रहा बजाए

Poem On Krishna Janmashtami In Hindi

 

नटखट कान्हा,

मधुर मुरलिया रहा बजाय।

खींची जाएँ जब गोपियाँ,

कदंब ऊपर चढ़ जाय।

 

इत-उत ढुंढे बावरी हो,

वह पत्तों में छिप जाय।

छलिया, नटखट, कृष्णा,

सबको बड़ा सताय।

 

कान्हा के मोहनी मुस्कान से,

भला कौन बच पाय।

मुरली की मधूर धुन में,

भला कौन न खो जाय।

 

जमूना तीर, कदंब के नीचे,

कृष्णा जब बुलाय।

कौन होगा वो बावला,

जो इस बुलाने पर ना जाय।

 

कान्हा तेरा चाँद सा मुखड़ा,

हर पल मुझे सताय।

बता मुझे तू, तेरे सिवा मुझे,

कुछ और क्यों न भाय।

 

तुझ संग प्रीत लगाके मोहन,

मन बड़ा पछताय।

तेरे चरण-कमल का भौरा बना,

मन अब कहाँ जाय।

 

नटवर है रास-रचैया,

सबको उँगलियों पे नचाय।

वो भी नाचे तेरी धुन में,

जो कभी नाच ना पाय।

 

तेरी मोहनी माया व्यापे सबको,

कोई बच ना पाय।

इस माया से वही उबरे,

जिसको मोहन तू ले बचाय।

 

प्राण पखेरू तुझसे मिलने,

पंख रहे फड़फड़ाय।

लाख करे ये जतन,

पर ये पिंजड़ा तोड़ ना पाय।

 

धीरज धर जी में अपने,

सखियाँ रही समझाय।

पाने तेरा शांति भरा आलिंगन,

मन रहा छटपटाय।

 

अंत समय आया कृष्णा मेरा,

सुध -बध रहा गँवाय।

बता क्या के मैं जतन,

जो मुझे तेरे दरस हो जाय।

 

देर न कर दे दर्शन प्यारे,

प्राण-पखेरू ना उड़ जाय।

तेरे दर्शन पाकर कान्हा,

जीवन मेरा धन्य हो जाय।

-लोकरश्वरी कश्यप

 

राधा नाचे कृष्ण नाचे

Poem On Krishna Janmashtami In Hindi

 

राधा नाचे कृष्ण नाचे,

नाचे गोपी जन।

मन मेरा बन गया,

सखी री सुंदर वृंदावन।

 

कान्हा की नन्ही,

ऊंगली पर नाचे गोवर्धन।

राधा नाचे कृष्ण नाचे,

नाचे गोपी जन।

 

मन मेरा बन गया,

सखी री सुंदर वृंदावन।

श्याम सांवरे, राधा गोरी,

जैसे बादल बिजली।

 

जोड़ी जुगल लिए गोपी दल,

कुञ्ज गलिन से निकली।

खड़े कदम्ब की छांह,

बांह में बांह भरे मोहन।

 

राधा नाचे कृष्ण नाचे,

नाचे गोपी जन।

वही द्वारिकाधीश सखी री,

वही नन्द के नंदन।

 

एक हाथ में मुरली सोहे,

दूजे चक्र सुदर्शन!

कान्हा की नन्ही,

ऊँगली पर नाचे गोवर्धन।

 

राधा नाचे कृष्ण नाचे,

नाचे गोपी जन।

जमुना जल में लहरें नाचें,

लहरों पर शशि छाया।

 

मुरली पर अंगुलियां नाचें,

उंगलियों पर माया।

नाचें गैय्यां, छम छम छैंय्यां,

नाच रहा मधु-बन।

 

राधा नाचे कृष्ण नाचे,

नाचे गोपी जन।

मन मेरा बन गया,

सखी री सुंदर वृंदावन।

-नरेन्द्र शर्मा

 

बांसुरी

Poem On Krishna Janmashtami In Hindi

 

बांसुरी वादन से खिल जाते थे कमल,

वृक्षों से आंसू बहने लगते।

स्वर में स्वर मिलाकर,

नाचने लगते थे मोर।

 

गायें खड़े कर लेतीं थी कान,

पक्षी हो जाते थे मुग्ध।

ऐसी होती थी बांसुरी तान।

 

नदियां कल-कल स्वरों को,

बांसुरी के स्वरों में मिलाने को थी उत्सुक

साथ में बहाकर ले जाती थी।

 

उपहार कमल के पुष्पों के,

ताकि उनके चरणों में,

रख सके कुछ पूजा के फूल।

 

ऐसा लगने लगता कि,

बांसुरी और नदी मिलकर,

करती थी कभी पूजा।

 

जब बजती थी बांसुरी,

घनश्याम पर बरसाने लगते,

जल अमृत की फुहारें।

 

अब समझ में आया,

जादुई आकर्षण का राज

जो आज भी जीवित है।

 

बांसुरी की मधुर तान में माना हमने भी,

बांसुरी बजाना पर्यावरण की

पूजा करने के समान है।

 

जो कि‍ हर जीव में प्राण फूंकने की

क्षमता रखती, और सुनाई देती है,

कर्ण प्रिय बांसुरी।

-संजय वर्मा

 

जन्माष्टमी पर्व पर कविता

Krishna Janmashtami Par Kavita In Hindi

 

चारों ओर उत्सव है छाया,

संग अपने जन्माष्टमी का त्योहार लाया।

मेरे कान्हा का जन्म दिवस है आया,

बरखा के संग हरियाली लाया।

 

जन्माष्टमी के पावन अक्सर पर,

सबका मन हर्षाया।

कान्हा के माखन मिश्री का भोग लगाकर,

खूब झूला झूलाया।

 

घर को साफ सुथरा बनाया

पुष्प मालाओं से खूब सजाया

आज हम सभी ने मिलकर

जन्माष्टमी का त्योहार मनाया।

 

जन्माष्टमी पर्व पर कविता

Krishna Janmashtami Par Poem In Hindi

 

देखो फिर जन्माष्टमी आयी है,

माखन की हांडी ने फिर मिठास बढ़ाई है।

कान्हा की लीला है सबसे प्यारी,

वो दे आपको खुशियां सारी।

 

माखन चुराकर जिसने खाया,

बंशी बजाकर जिसने नचाया।

खुशी मनाओ उसके जन्म की,

जिसने दुनिया को प्रेम सिखाया।

 

जन्माष्टमी पर कविता

Hindi Kavita On Janmashtami

 

माखन चोर नन्द किशोर,

बांधी जिसने प्रीत की डोर।

हरे कृष्णा हरे मुरारी,

पूजती जिन्हें दुनिया सारी।

 

आयो उनके गुण गाये,

सब मिलकर जन्माष्टमी बनाएं।

हाथी घोडा पालकी,

जय कन्हैया लाल की।

 

 

 

 

 

Leave a Comment

close button