Top 23+ Best Poem On Father In Hindi | पिता पर सुंदर कविता

“धरती-सा धीरज दिया और आसमान-सी ऊंचाई है, जिन्दगी को तराश के खुदा ने, ये तस्वीर बनाई है, हर दुख बच्चों का, खुद पे वो सह लेते हैं, उस खुदा की जीवित प्रतिमा को हम ‘पिता’ कहते हैं।” आज के पोस्ट मेंं Top 23+ Best Poem On Father In Hindi – पिता पर सुंदर कविता साझा किया गया है।

पिता का साया

Poem On Father In Hindi

जीवन में पिता का साया,

सुकून भरी छाया।

पिता से है जो प्यार पाया,

जीवन में आनन्द समाया।

पिता हैं बच्चों का साया,

जो बुरी नजरों से बचाया।

जिसने प्यार सदा लुटाया,

तभी पिता वो कहलाया।

पिता ने गिरने से बचाया,

अपने को बैसाखी बनाया।

पिता ने चलना सिखाया,

गिरते हुए हृदय से लगाया।

पिता ने मुझे खड़ा कराया,

मंजिल का राह दिखाया।

पिता ने कष्टों को भगाया,

मेरे बोझ कंधों से उठाया।

-अशोक पटेल

मेरे पिता

Poem On Father In Hindi

घर के हैं आधार पिता,

खूब लुटाये प्यार पिता।

हर-हसरत पूरी करते,

होते खेवन-हार पिता।

सही सीख सिखाये पिता,

सच्ची राह दिखलाये पिता।

जीवन में उजियारा लाने,

दीप-सा जलता जाये पिता।

सदा सिर पर रखते हाथ पिता,

सुख-दुख में देते साथ पिता।

पग-पग करते पथ प्रदर्शन,

मेरे तो है सच्चे नाथ पिता।

मेरी आन-बान-शान पिता,

मेरा सब दीन ईमान पिता।

मेरे असली जीवन दाता,

मेरे तो हैं भगवान पिता।

-भूपसिंह भारती

मेरे पापा

Poem On Father In Hindi

सारा जहान हैं मेरे पापा,

और आसमान हैं मेरे पापा।

कोई महापुरुष नहीं हैं पर,

सबसे महान हैं मेरे पापा।

दादा-दादी का दुलारा-सा,

हम सबके मान हैं मेरे पापा।

अपना घर तो एक मंदिर है,

इस घर के भगवान हैं मेरे पापा।

प्रेम-खिलौना मिल जाता है,

खुली दुकान हैं मेरे पापा।

-टीकेश्वर सिन्हा “गब्दीवाला”

एक वरदान पिता

Poem On Father In Hindi

मेरी ताकत मेरी हिम्मत,

सच मेरी पहचान पिता।

मेरी दौलत मेरी चाहत,

मेरा हर अरमान पिता।

कड़ी धूप में शीतल छाया,

सावन की रसधार पिता।

मुश्किल में चट्टान सरीखे,

जीवन की पतवार पिता।

गिरकर उठना और संभलना,

सीख, हिदायत, ज्ञान पिता। ।

मेला, उत्सव और तमाशे,

खुशियों की हैं खान पिता।

संग-संग होना साहस-संबल,

मेरा असली मान पिता।

आन-बान और शान हमारी,

मानो एक वरदान पिता।

-नरेन्द्र सिंह नीहार

लौट आओ पापा

Poem On Father In Hindi

उंगली पकड़ के चलना,

आपने मुझे सिखाया।

छोटी सी चोट लगने पर,

आपने मुझे उठाया।।

खेल खेल में,

पढ़ना-लिखना सिखाया।

हर परेशानियों का,

सामना करना सिखाया।।

कहाँ खो गए पापा आप,

इतनी भी क्या जल्दी थी,

दूर जाने की पापा।।

बहुत कुछ बचा है,

आपसे ज्ञान पाने को पापा।

मेरी हर गलती को माफ कौन करेगा?

मेरी हर ख्वाहिश पूरी कौन करेगा?

कदम से कदम मिलाकर

चलना कौन सिखाएगा।

बेटी-बेटा एक समान,

कभी फर्क नहीं कराया।।

क्यों चले गए इतने दूर हमसे पापा।

कहाँ खो गए पापा आप,

जल्दी से लौट आओ न पापा।।

-प्रिया देवांगन “प्रियू”

पिता

Poem On Father In Hindi

मेरे पूज्य पिता,

जीवन के आधार।

मुझे संवारने में,

आप कभी न माने हार।

उन्होंने मुझे संभाल कर,

सुन्दर रास्ता दिखाया।

मेरे जीवन निर्माण में,

संपूर्ण जिन्दगी बिताया।

वे देखे गरीबी,

हौसला न छोड़ा।

परिश्रम के बल पर,

सफलता है पाया।

वे मुझे देते आशीष,

मैं उन्हें करता नमन।

वे रहेंगे मेरी धरोहर,

जन्म दर जन्म।

-दुर्गेश मोहन

पापा प्यारे

Poem On Father In Hindi

पापा मेरे भोले-भाले।

लेकिन भारी हिम्मत वाले।।

नहीं किसी को कभी सताते।

उलझ पड़े तो चपत लगाते।।

हम बच्चों के सबल सहारे।

लगते पापा प्यारे-प्यारे।।

घर भर के वे हैं रखवाले।

जिम्मेदारी बड़ी सँभाले।।

पापा गुस्से में जब आते।

मन ही मन देखा मुस्काते।।

गलती हो तो डाँटा करते।

पर बच्चों पर सच में मरते।।

नहीं पढ़ा तो गाल फुलाते।

घोड़ा बनकर पास बुलाते।।

कहें खेल अच्छा है खेलो।

लेकिन साथ कष्ट भी झेलो।।

काम रात-दिन करते पापा।

खुशियों से घर भरते पापा।।

कभी हमारा साथ न छोड़े।

विपदाओं का वो मुख मोड़े।।

पापा हैं तो ठाठ हमारी।

रहें सदा इनके आभारी।।

पापा हैं बच्चों की दुनिया।

हँसते रहते मुन्ना-मुनिया।।

-कन्हैया साहू “अमित”

सबसे अच्छे मेरे पापा

Poem On Father In Hindi

सबसे अच्छे मेरे पापा,

ऑफिस से घर जब आते।

चॉकलेट व टॉफी ले आएं,

आकर झट मुझे बुलाते।

जब मैं आता तो ही पापा,

अपने गोदी में मुझे उठाते।

चॉकलेट और टॉफी देकर,

मुझसे खूब प्यार जताते।

नित सुबह मुझे जगाकर,

बैठा के खूब मुझे पढ़ाते।

हो सवाल हल ना मुझसे,

अच्छे से वह समझाते।

पढ़ने से अच्छा बन जाऊं,

यह भी अक्सर मुझे बताते।

महापुरुषों और वीरों की,

गाथाएं नित मुझे सुनाते।

कभी-कभी शाम समय को,

पापा मार्केट मुझे ले जाते।

मनपसंद खिलौने व चीजें,

झट खरीद मुझे दिलाते।

स्कूल में जब हो लंबी छुट्टी,

मम्मी सग हम बाहर जाते।

घूम घूम नई जगह को देखें,

छुट्टी में खूब मौज मनाते।

-लाल देवेंद्र कुमार

मैं भी एक पिता हूँ

Poem On Father In Hindi

सुख साधन जुटाता हूँ,

दुख में अंदर से रोता हूँ।

आँसू नहीं दिखाता हूँ,

तिनका जोड़ घर चलाता हूँ।

मैं भी एक पिता हूँ,

परिवार के लिए जीता हूँ।

अपना सुख त्याग कर,

सारी जरूरतें पूरी करता हूँ।

पसीने से नहाता हूँ,

खुद अभावों में जीता हूँ।

मैं भी एक पिता हूँ,

परिवार के लिए जीता हूँ।

परिवार की खुशी में,

अपनी खुशी ढूँढता हूँ।

उनके हंसने से मैं भी हंसता हूँ,

अपना गम छुपाता हूँ।

मैं भी एक पिता हूँ,

परिवार के लिए जीता हूँ।

मेरा भी दिल पिघलता है,

घर के हालात देख दहलता है।

फिर भी बाहर से,

पत्थर दिल ही रहता हूँ।

मैं भी एक पिता हूँ,

परिवार के लिए जीता हूँ।

थकान से बदन कराहता है,

फिर भी आह न करता हूँ।

संग सबके बैठ जाता हूँ,

तो दर्द में भी मुस्काता हूँ।

मैं भी एक पिता हूँ,

परिवार के लिए जीता हूँ।

जिम्मेदारी बखूबी निभाता हूँ,

मेहनत से कमाता हूँ।

अनुशासन का पाठ पढ़ाता हूँ,

गर्व से कहता हूँ।

मैं भी एक पिता हूँ,

परिवार के लिए जीता हूँ।

-मनोज कुमार पाटनवार

पिता “गृह कि छत”

Poem On Father In Hindi

गृह कि नींव हैं माँ,

तो पिता गृह कि छत।

सुख चाहे संतान कि,

इसी कामना में रत।।

साहस और बल है,

वात्सल्य भी है अपार।

पिता ईश्वरतुल्य हैं,

कहे सकल संसार।।

धूप भी शीतल लगे,

जब हो पिता कि छाँव।

आह न करे कभी,

हंसकर चले खार में पाँव।।

परिश्रम और शौर्य का,

कैसा अदभुत मेल।

पिता बिन सब नीरस है,

जीवन लगता जेल।।

शीश पितृ चरण में हो,

सेवा है हमारा फर्ज़।

अमर है ये ऋण सदा,

जिसका न उतरे कर्ज।।

-निमिशा कुरै

पिता

Poem On Father In Hindi

पिता परिवार का आधार है,

परिवार का पालनहार है।

बच्चों के लिए पिता श्रृंगार है,

बच्चों को बांटता सच्चा प्यार है।

पिता के बिना संसार अधूरा है,

पिता है तो जीवन पूरा है।

पिता जीवन का पथप्रदर्शक है,

सारे परिवार का वो संरक्षक है।

पिता है तो संतान की पहचान है,

पिता जीवन की आन बान और शान है।

पिता से ही तो सारा ज़हान है,

पिता समस्त परिवार की आस है।

पिता हिमालय की तरह दृढ़ विश्वास है,

पिता ही जीवन का निरंतर विकास है।

पिता ऊपर से कड़क अंदर से नर्म है,

उसके दिल मे दफन अनेक दुख और मर्म है।

पिता हिम्मत और होंसले की दीवार है,

पिता के बिना सब कुछ बेकार है।

उसकी हर डांट मे छिपा होता प्यार है,

हममें सदा भरता अच्छे संस्कार है।

हर मुसीबत मे डटकर देता साथ है,

पिता है तो हम सनाथ हैं।

पिता के बिना हम अनाथ हैं।

-अशोक शर्मा वशिष्ठ

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पिता

Poem On Father In Hindi

शाम ढले वो कुछ अलकसाया सा था,

दिन भर की थकन से मुरझाया सा था।।

अजीब सी बेचैनी चेहरे पर तैर रही थी उसके।

जिम्मेदारियों से वो कभी भी ना घबराया था।।

आज एक तरफ ही उसका ध्यान था।

बच्चे परेशां क्यों थे उसके वो हैरान था।।

कभी अपने दर्द पर एक बार भी जो ना रोया था।

बच्चों के अन्जान दर्द पर वो आज बहुत रोया था।।

अंकुरित करता रहा जीवन भर उनके लिए फसल।

भरी धूप में काम करने से वो कभी ना घबराया था।।

अचानक उसकी रूह ने उसका साथ छोड़ दिया।

ऐसा क्या सुना जो दर्द से विकल हो बच्चों को छोड़ गया।।

पास रखना ना चाहते थे बच्चे बीमार पिता को।

इसलिए उनकी खुशी के लिए उन्हें छोड़ गया था।।

-नीरज त्यागी

पापा

Poem On Father In Hindi

पापा तुम्हारे प्यार के छाँव में,

रख लो मुझे फूल बनाके।

टूट के बिखर न जाऊँ मैं कहीं,

मुझे रख लो अपनी बगिया में सजा के।

सुन्दर खुशबू मैं बिखराऊँगी,

तुम्हारी बगिया की शान मैं बढाऊँगी।

बनके ताज तुम्हारे पगड़ी की,

गर्व से मैं इठलाऊँगी।

पापा तुम्हारे चरणों की धूल,

माथे अपने मैं लगाऊँगी।

तुम्हारे हर कदमों में पापा,

फूल बन मैं बिखर जाऊँगी।

तुम्हारे प्यार की छाँव में पापा,

हर मंजिल तक मैं पहुँच जाऊँगी।

पापा तुम्हारे प्यार की छाँव में,

मुझे रख लो फूल बना के।

टूट के बिखर गई कभी तो,

फिर कभी खिल न पाऊँगी।

-सरिता लहरे ‘माही’

पिता हमारे

Poem On Father In Hindi

पिता हमारे पेड़ सरीखे,

छाया देते हैं।

खुद दुख सहकर, हमको

हर्ष सवाया देते हैं।

पिता नहीं ईश्वर से कम हैं,

पालनहारे हैं।

हमें पालते, हम उनकी

आंखों के तारे हैं।

पिता मित्र हैं, गुरु हैं, हमको

राह दिखाते हैं।

पिता हमारे सपनों का

संसार सजाते हैं।

पिता कभी कुछ नहीं मांगते,

क्या उनको दें हम?

कभी हमारे कामों से हो

नहीं पिता को गम।

-डॉ. नागेश पांडेय संजय

मेरे प्यारे पापा

Poem On Father In Hindi

मेरे प्यारे पापा

जब मैं छोटी थी,

मुझे अपनी गोदी में बैठा के खिलाते थे।

जब माँ मारने आती तो माँ को रोकते थे।

जब मैं चलते- चलते थक जाती,

तब कंधे में उठाते थे।

चुपके से चॉकलेट खरीद देते थे।

मेरे प्यारे पापा।

जब बारिश के समय में एक छतरी होता तो

मुझे दे देते छतरी।

जब माँ पढ़ने के लिए डांटती तो,

माँ को चुप कराते।

जब कोई मुझे मारता तो उनको डांटते।

बस में जब एक सीट मिलती तो

मुझे बिठाते खुद खड़े रहते।

मेरे प्यारे पापा।

आप मेरे लिए हीरा हो।

अब मैं सोचती हूँ हॉस्टल में कैसे रहूँ

आपके बिना।

मेरे प्यारे पापा।

-अन्जुश्री मन्ना

पापा

Poem On Father In Hindi

पापा है मेरे दुनिया से प्यारे,

जिनकी बाहों में मैं खेली हूं!

हर इच्छा मेरी पूरी करते,

हर पल मेरा ध्यान रखते!

समझाते हर बात प्यार से

बताते हर बात बुनियाद से!

उनसे है मेरी पहचान,

उन पर है मुझको अभिमान!

उन्होंने बनाया इस काबिल मुझको,

कि कर सकू लक्ष्य अपना मैं हासिल!

ऐसे हैं पापा मेरे महान,

रखूगी उनका मैं हमेशा मान!

कर उनके चरण स्पर्श,

शत-शत है उनको मेरा प्रणाम।

-ओजस्वी रावत

मेरे पापाजी

Poem On Father In Hindi

बात-बात पर गुस्से में

न डांटो हमको पापाजी

हम बच्चों के मन में क्या है

यह भी समझो पापाजी।

बचपन में तो कभी आप भी

करते होंगे शैतानी जी

थोड़ा-बहुत बहानेबाजी

थोड़ी-सी आनाकानी जी।

कोरोना ने छीनी हमारी मस्ती

यूं ही बीत गयी गर्मी की छुट्टी

सुबह-शाम बस सहते रहते

डांट आपकी और मम्मी की।

टाला-टूली अब करो न हमसे

न चलाओ अपनी मनमानी

कब जायेंगे बाहर खेलने

सच-सच कह दो पापाजी।

-स्पर्श पांडेय

मेरे पापा

Poem On Papa

हर मुश्किल को आसान बना दे।

सही गलत की पहचान करा दे।

इस निराली दुनिया में।

जीना हमको सिखा दे।

वो हैं मेरे पापा

वो हैं मेरे पापा

अपने गम भुला कर हमारे गम लेने वाले।

अपने आंसू छुपा कर हमको हंसाने वाले।

छोटी से बड़ी हर ख्वाइश पूरी करने वाले ।

दुनियादारी की हर समझ सिखाने वाले ।

वो हैं मेरे पापा

वो हैं मेरे पापा

मेरी हर जीत पर जश्न मनाने वाले ।

मेरी मुस्कुराहट पर मुस्कुराने वाले।

हमारी खुशियों पर खुश होने वाले।

मेरी जिंदगी को आसान बनाने वाले।

वो हैं मेरे पापा

वो हैं मेरे पापा

माँ के माथे का सिंदूर हैं पापा।

हर घर की आभा हैं पापा।

बेहतरीन जिंदगी की सीढ़ी हैं पापा।

जितना भी कहूं कम हैं पापा।

आप बड़े अनमोल हैं पापा।

-सामभवी सानू

पापा

Poem On Father In Hindi

जो हमें अपनी पहचान दे कर

दुनिया में हमारी पहचान बनाते हैं।

थाम हमारी नन्हीं उँगली

चलना हमें सिखलाते हैं।।

हमारे उज्वल भविष्य के लिए

मेहनत मजदूरी कर खून पसीना बहाते हैं।

दिन भर घर से दूर होकर

रात को थके-हारे आते हैं।।

हमारी आँखों में अपने सपने देखकर

बेतोड़ परिश्रम करते हैं।

आये न कोई परेशानी हम पर

खुद सुरक्षा कवच बन जाते हैं।।

हमारे भविष्य को उज्वल बनाकर

अमृत सा फल पाते हैं।

चाहे वो खुद होके अनपढ़

हमको शिक्षा दिलवाते हैं।।

आँखों में हमारे नमी देख

वो अधिकाधिक अश्रु बहाते हैं।

चेहरे पे हमारे मुस्कान देख

अपना दर्द भूल जाते हैं।

-रेशमा आर्या

मेरे पापा

Hindi Poem On Father

जब परिस्थितियां खराब होंगी,

तो मुकाबला करना सिखाया है।

जब चीजें मन के मुताबिक न हो

तो धैर्य रखना सिखाया है।।

जब कोई मुझ पर हंसा,

तो उन्होंने हंसना सिखाया है।

जब मैं कभी रोया,

तो मुझे मजबूत बनाया है।।

जब मैंने फैसले लिए,

तो मुझ पर विश्वास दिखाया है।

फैसलों के नतीजे गलत हुए,

तो कमजोरी से अवगत कराया है।।

दुनिया में समय समय पर,

अलग-अलग जगह पर,

तरह तरह के व्यक्ति विशेष,

भिन्न-भिन्न वस्तु विशेष,

जीवन का सुर और ताल सिखाया है।

वास्तव में जीना तो पापा ने सिखाया है।।

इसीलिए ईश्वर ने अपना एक स्वरूप,

अगर मां में दिखलाया है।

तो दूसरा,

पिता में दिखलाया है।।

-अर्पित जैन

पिता मील का पत्थर

Poem On Father In Hindi

पिता वह मील का पत्थर है,

जो सच्चाई की राह बताते हैं।

पिता वह पहाड़ है,

जो ज़िन्दगी के उतर-चढाव समझाते हैं।

पिता वह जौहरी है,

जो शिक्षा के हीरे तराशते हैं।

पिता वह पिंजरा है,

जो रिश्तों को जीवन भर पालते हैं।

पिता वह भगवान है,

जो पत्थर को तराश पूजे जाते हैं।

पिता वह सपना है,

जो रोज़ मेरी नींद में आते हैं।

पिता वह रक्षक है,

जो मेरे लिए जान तक कुर्बान करते हैं।

पिता वह सूरज है,

जो देते यादों के उजाले हैं।

पिता मेरी वह दुआएं हैं,

जो हमेशा चलते साथ मेरे हैं।

पिता वह आंसू हैं,

जो मेरी आँखों में बसे हैं।

-शिबासिश प्रहराज

पिता

Poem On Father In Hindi

जिसने न कभी किया विश्राम

स्वेद बहाकर हमें दिया पहचान

दिखाया नहीं कभी अपना दुलार

पर दिल में छुपा के रखा प्यार

हर दर्द को सीने में छुपाये।

जमाने के झंझावतों से हमें बचाये

आँखों में गुस्सा, हृदय में अनुराग

ऐसा है मेरे पिता का प्यार

ऊँगली पकड़कर चलना सिखाया

ज़माने में हमें जीना सिखाया।

हसरतें अपनी भुलाकर

हमारी ख्वाइशों को पर लगाया

अपने सपनों को हममें जिन्दा देखा

उस पिता को आज पिता बनकर समझ पाया

अपनी यादों में वही कठोर सीना लाया हूँ।

जो था तो कठोर पर मुलायम

मेरे निर्माण के लिए

आज सर झुका है मेरा

उस निर्माता मेरे भगवान के लिए

इस जन्म में तेरा पुत्र बना।

हर कर्तव्य को निभाऊँगा

संस्कारों से आपके

अपने संतानों को सजाऊँगा।

-अविनाश तिवारी

 पिता

Hindi Poem On Father

पिता धर्म है,

पिता कर्म है,

पिता स्वर्ग,

सुख धाम है।

पिता सत्य है,

पिता पुण्य है,

पिता मोक्ष कल्याण है।

पिता शक्ति है,

पिता भक्ति है,

पिता मुक्ति का धाम है।

पिता मान है,

पिता ज्ञान है,

पिता ध्यान, अभिमान है।

पिता ऋद्धि है,

पिता सिद्धि है,

पिता जीवन का गान ।

पिता छाया है,

पिता माया है,

पिता गौरव का गान है।

पिता प्रीति है,

पिता रीति है,

पिता मंगल गान है।

पिता फूल है,

पिता मूल है,

पिता देव गुणगान है।

-जितेन्द्र कुमार

न्यारे पापा करे

Poem On Father In Hindi

जो है पापा से परे दो,

शब्द जिसमें भरे।

वह कोई और नहीं है,

प्यारे पापा मेरे।

दिन रात काम जो करें,

मेहनत करने से जो ना डरे।

वह कोई और नहीं है,

प्यारे पापा मेरे।

बच्चों के लिए जुगाड़ जो करें,

अन्न जल लाकर पेट जो भरे।

वह कोई और नहीं हैं,

प्यारे पापा मेरे।

मेरे अधिकारों का रखें जो ख्याल,

हल कर देता जो मेरा हर सवाल।

वह कोई और नहीं हैं,

प्यारे पापा मेरे।

जिनसे मनवाती हूं हर बात,

करते हैं जिद पूरी चाहे दिन हो या रात।

वह कोई और नहीं हैं,

प्यारे पापा मेरे।

मेरे कठिन समय का ढूंढते जो हल,

सामने पाती उन्हें में हर पल।

वह कोई और नहीं हैं,

प्यारे पापा मेरे।

मिला जिनसे संस्कारों का ज्ञान,

सिखाया जिसने पाते हैं,

कैसे आत्मसम्मान।

वह कोई और नहीं हैं,

प्यारे पापा मेरे।

मेरी हर गलती पर टोकते मुझे,

भूल ना कर जाऊं कोई रोकते मुझे।

वह कोई और नहीं हैं,

प्यारे पापा मेरे।

जिन्होंने मुझे लगाकर पर,

आसमां में सिखाया उड़ना।

इस जालिम दुनिया से,

सिखाया लड़ना।

या कोई और नहीं हैं,

प्यारे पापा मेरे।

आज मैं जो भी हूं पाऊं,

अपनों पर खड़ी हूं।

-कल्पना गुप्ता

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