[29+ Best] प्यारी बेटी पर सुंदर कविता | Poem On Daughter In Hindi

Poem On Daughter In Hindi :- अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस 24 सितम्बर पर को मनाया जाता हैं। इस खास अवसर पर हम यहां पर 29+ प्यारी बेटी पर सुंदर कविता का अनोखा संग्रह लेकर आए हैं। कृपया कर इस लेख को अपने दोस्तों के साथ अवश्य साझा करें। धन्यवाद

 

बेटी

Poem On Daughter In Hindi

 

देखो मम्मी नन्ही बिटिया,

तुमको आज बताती।

जब तुम रोतीं, रात-रात भर,

मुझको नींद न आती।।

 

दोष तुम्हीं को सब देते हैं,

भीतर बाहर वाले।

दोषी से हमदर्दी सबको,

कैसे खेल निराले।।

 

घबराती हो ताने सुनकर,

फिर भी तुम चुप रहतीं।

मर जाती पैदा होते ही,

कभी-कभी तुम कहतीं।।

 

हिम्मत करो और फिर देखो,

एक बात बतलाऊँ।

बेटी नहीं किसी से कम है,

तुमको मैं समझाऊँ।।

 

माँ मेरी मुझको अवसर दो,

जग में कुछ करने का।

मेरे सर पर हाथ धरो तुम,

गया समय डरने का।।

 

पढ़ लिख कर मैं बनूँ डॉक्टर,

सबकी जान बचाऊँ।

बनूँ इन्दिरा मैं भारत की,

सत्ता पर छा जाऊँ।।

 

अगर कहो तो बन व्यापारी,

लाखों-लाख कमाऊँ।

बेटा कभी नहीं कर सकता,

वह कर के दिखलाऊँ।।

 

इस बेटी को समझो मम्मी,

आज कसम यह खाती।

साथ बुढ़ापे तक दूंगी मैं,

यह विश्वास दिलाती।।

डॉ. परशुराम शुक्ल

 

 

बेटियां

Beti Par Kavita

 

बेटियों से घर की पहचान 

इनका रखना सदा ध्यान।

 

गौरव घर का ये बढ़ाती

मेहनत से आगे बढ़ जाती,

हौसले सदा इनके बढ़ाएं

ये परिवार का नाम बढ़ाएं।

 

बेटे-बेटियों में करना न अंतर,

भलें मुश्किलें आएं निरंतर।

परवरिश इनकी तुम करना ।

मिटा देंगी ये विपदाएं तुम्हारी।

 

प्यार-स्नेह बांटतीं ये

हैं सारे जग की शान।

इनसे बढ़ता घर का मान

कुल की हैं पहचान।

 

हौसला बढ़ाएं इनका,

पढ़ाइए अपनी बेटियां।

रोकिए न आगे बढ़ने से

बेटों से बढ़कर बेटियां।

 

जो जुल्म इन पर ढाता

वह सिर्फ मुश्किलें पाता।

करना सदा इनका सम्मान

मिलेगा जग में मान।

 

दो कुलों को ये बनाती

त्याग-तपस्या का है गहना।

गौरव की ये अधिकारी

अब तो सबका यह कहना।

ऋषि मोहन श्रीवास्तव

 

 

बेटी

Poem On Daughter In Hindi

 

जन्म लेते ही बोझ बन जाती है बेटी

दहेज-दानव से रोज कुचली जाती है बेटी

रोज सहती है मार डांट, फटकार बेटी

हमेशा तरसती है पाने को दुलार बेटी

 

गाय से भी सीधी होती है बेटी

घर का सब काम करती है बेटी

पा जाती मौका एक बार भी बेटी

प्रधानमंत्री भी बन के दिखाती है बेटी

 

राष्ट्रपति की शोभा बढाती है बेटी

कल्पना चावला, लक्ष्मीबाई बनती है बेटी

सीमा पर दुश्मन से लड़ती है बेटी

रेलगाड़ी, वायुयान उड़ाती है बेटी

 

देश को आगे बढ़ाती है बेटी

कभी मां कभी बहन बनती है बेटी

सृष्टि को कायम रखती है बेटी

सब के सपने सजाती है बेटी

 

बेटों से जरा भी कम नहीं है बेटी

बड़े किस्मत वाले होते हैं वे लोग

जिनके घर में जन्म लेती है बेटी

धर्मेन्द्र साह

 

 

बिटिया रानी

Poem On Beti

 

मेरी बिटिया रानी

कर पढ़ाई तू मन से

डरना मत

कभी भी किसी से

 

तू भी एक दिन

तारों की तरह चमकेगी

भी एक दिन

मुश्किलों से जीतेगी

 

मेरी बिटिया रानी

जीवन के हर मोड़ पर हंसना

चाहे हो मुश्किल

तुम मुस्कारते रहना

 

मेरी बिटिया रानी

तुम्हारी जिंदगी में भी

आयेंगी बाधाएं यकीनन

पर रखना यह विश्वास खुद पर

 

बाधाएं होती हैं

चंद दिनों की मेहमान

रखना इस बात का सदैव ध्यान.

संदीप कुमार

 

 

बेटी और मंजिल

Poem On Beti

 

मैं कुछ कहना चाहती हूं

अपनी सोयी तकदीरों को

जगाना चाहती हूं

सोचा क्यों न शुरू करूं

 

अपनी मां की यादों से

क्योंकि मेरी जिंदगी

शुरू होती है मां की दुआओं से

जब लाया मुझे मां ने इस दुनिया में

 

थी मैं एक नन्ही-सी परी

न आता था खाना

न आता था चलना

मां ने थामा हाथ

 

और बताया क्या है जिंदगी

यह न कहा कि बेटी

तू ढल जाना इस जिंदगी में

बल्कि यह कहा कि बहुत कम है यहां

सुनने वाले बेटियों की पुकार को

 

पर तू ढाल लेना

जिंदगी को खुद में

मौके मिलेंगे हजार

आज मुझे जब समझ आया

 

तो कह दिया मैंने भी

अपनी किस्मत की लकीरों को

पाने के लिए अपनी मंजिल

तोड़ दूंगी बनी जंजीरों को।

हिना अंजुम

 

 

बेटियां

Poem On Daughter In Hindi

 

बेटियाँ होती हैं खास,

होती हैं बेटियाँ आस।

जिस घर में बेटी का वास,

उस घर में है दुर्गा निवास।

 

बेटियाँ होती घर की शान,

बेटियाँ होती हैं स्वाभिमान।

हर रिश्तों की तुम पहचान,

तुम हो बुलंदियों की उड़ान।

 

क्या-क्या तेरी गाथा गाऊँ

कहाँ से करूं कहानी शुरू।

कहाँ-कहाँ तेरा नाम नहीं ,

सारे जहाँ में तू महान बेटी।

 

तू है दुर्गा,तू भवानी,

तू ही है सिंहवाहिनी।

तू है झाँसी की रानी,

बेटी तेरी अमर कहानी।

 

तू ही है भारत माता,

तू वीरों की जन्मदाता।

तू है गौरव की गाथा,

तू ही है माँ धरती माता।

 

धरा से लेकर अम्बर तक,

चाँद से लेकर तारों तक।

गाँव से होकर शहर तक,

पहचान तेरी चारों तरफ़।

पहचान है तेरी चारों तरफ़।।

सुमन किमोठी

 

 

बेटी

Poem On Beti

 

रखती घर में चिड़ियों सी फितरत बेटी।

लेकर आती घर-घर में बरकत बेटी।।

 

आते ही हर लेती है हर पीड़ा को।

मौला ने दी है ऐसी दौलत बेटी।।

 

हरसिंगार जुही चम्पा केसर जैसी।

आँगन को कर देती है जन्नत बेटी।।

 

नम कर देती है सबकी ही आँखों को।

जिस दिन घर से होती है रुखसत बेटी।।

 

पीहर की जब याद बहुत तड़पाती है।

अश्क बहाती जब पाती फुर्सत बेटी।।

 

दोनों ही मेरी आँखों के तारे हैं।

बेटा चन्दन है तो है अक्षत बेटी।।

 

अपने अरमानों की बलि देकर ‘प्रतिभा’।

पूरी करती है सबकी हसरत बेटी।।

प्रतिभा गुप्ता ‘प्रबोधिनी’

 

 

बेटियाँ

Poem On Daughter In Hindi

 

खिलने से पहले अब मुरझा रही कलियाँ,

माँ के गर्भ में आजकल मर रही बेटियाँ,

सड़क किनारे, झाड़ियों में मिल रही बेटियाँ,

समाज के कुचक्र में फँस रही बेटियाँ।

 

माँ की लोड़ियों को भी सुन न सकी बेटियाँ,

जन्म लेते वक्त ही नमक चाटी बेटियाँ,

नन्ही – नन्ही काया को तज बैठी बेटियाँ,

गृह प्रवेश से पहले संसार छोर गई बेटियाँ।

 

कत्ल करते बेटियों का कत्ल होती बेटियाँ,

स्कूल, कॉलेज, समाज कहीं सुरक्षित नहीं बेटियाँ,

घर में भी प्रतारित होती वेदना सहती बेटियाँ,

माप-तौल कर हँसती-बोलती तहज़ीब सिखाती बेटियाँ।

 

रोज सुबह अखबार में छपता, मारी गई बेटियाँ,

दहेज के लिए उलाहना देकर जलाई गई बेटियाँ,

मायका में कहलाती मम्मी-पापा की परी बेटियाँ,

ससुराल में बनकर रह जाती महज दासी बेटियाँ।

स्नेहिल कान्त ‘स्नेही’

 

 

जीने दो बेटियों को

Beti Par Kavita

 

मां के गर्भ से लेकर यौवन तक,

जिस पर सदैव लटकती हरदम तलवार।

कैसे आएगी खुशियाँ घर -घर में,

कहती बेटी कर करके चीत्कार।

 

अगर मार दोगे मुझको जन्म लेने से ही पहले,

तो कैसे बढेगा यह संसार।

संतान हूं इंसान की ही तो अरे इंसान!

फिर क्यों करता है नादानी तूं।

 

गर्भावस्था में ही मार कर बेचारी बेटी को,

बनता है बड़ा हिंदूस्तानी तूं।

देश को भारत मां कह पूजता है,

लेकिन बेटी को कहे दुर्भाग्यशाली।

 

नासमझ! सोच बिटिया बिन कैसे बसेगा,

घर-परिवार और कैसे होगी खुशहाली?

ब्रह्मा जी ने भी पुरुष और स्त्री को उत्पन्न

करके ही सृष्टि की रचना कर डाली।

 

पुरुष का क्या वजूद रहेगा अगर,

जन्म देने वाली मां से धरती होगी खाली।

बेटियां मुस्कुराती है,

खुशियां घर में आती है,

 

फिर बेटी क्यों नहीं चाहिए?

बेटियां शुभकामनाएं हैं,

बेटियां पावन दुआएं हैं।

इस लिए जीने दो बेटियों को।।

प्रेम लता कोहली

 

 

बेटी है अनमोल

Poem On Beti In Hindi

 

बेटी है अनमोल,बेटी है अनमोल

मत बाँधों इसे बनाने में बस रोटी गोल।

 

क्यूँकि बस ज़माना बदला है,

बदला नहीं अभी दहेज़ वाला झोल।

 

खुले आम दहेज़ लेना हुआ व्यापारों सा,

विवाह का पवित्र मंडप अब लगता बाजारों सा।

 

आँवाजे उठती है,घुटती है, हो जाती है मौन,

मूक बना बैठा है मानव,

 

बेटी का अस्तित्व बचाए कौन??

टीचर ,पॉयलट ,डॉक्टर बन बैठी है ये,

 

कौन कहता है इसे अभी-भी कमजोर।

किसके मुख से निकले है ये बेतुके से बोल?

 

कब समझोगे इसका मोल ??

बेटी है अनमोल, बेटी है अनमोल।

संगीता यादव

 

 

बेटी

Poem On Beti In Hindi

 

बेटी कैसी भी हो

वो प्यारी ही होती है

मां बाप की वो

दुलारी ही होती है।

 

हर समय की वो

साथी होती है

बाबुल के आंगन की वो

चिड़िया होती है।

 

चहकती खिलखिलाती

सबको प्रफ्फुलित करती है

अपने दुख भूल

सबको सुख देने वाली होती।

 

वो एक प्यारी सी

कहानी होती है

बेटी कैसी भी हो

वो प्यारी ही होती है।

कु.कीर्ति सिंह

 

 

ओ मेरी प्यारी बेटी

Beti Par Kavita

 

घर में भी सुना पड़ा, 

बेटी का निकाह हुआ

दुल्हन के संग जाने , 

क्यों ये संहार हुआ।

 

जाने कितने सपने, 

सजाई थी वो शादी के

मेहंदी वाले हाथों को,

स्याही से प्यार हुआ।

 

मिला नही गाड़ी जब, 

दहेज के समान में

बेटी पर बैलों जैसा, 

क्यों अत्याचार हुआ।

 

सुन ताने साँसु माँ के, 

भरे ले पेट अपना

एक रोटी के लिए क्यों, 

दुर्व्यवहार हुआ।

 

फूल जैसी नर्म नर्म, 

हाथों को जब देखा तो

मोतियों के फफोले थे,

तेल से वार हुआ।

 

बाई जैसा काम कर,

दिन रात एक किया

नही मिला उसे कुछ, 

हाथों से प्रहार हुआ।

 

मिला नही सुख चैन, 

दुःखों का पहाड़ टूटा

जेल जैसा घर में भी,

क्यों व्यवहार हुआ।

अविनाश सिंह

 

 

बेटी

Beti Par Kavita

 

पूछते है अक्सर सभी, 

कौन हूं मैं, क्या हूं।

पुराने से किस्सों का, 

जवाब एक नया हूं।

 

माँ की आँखों की खुशी,

पिता का स्वाभिमान हूं।

दुनिया के लिए बोझ सही,

पर अपने घर की जान हूं।

 

मासूम हूं और चंचल भी,

हूं सौम्य मैं और खंजर भी।

सीता का मैं दर्द हूं,

द्रोपदी का अपमान भी।

 

दर्द हँस कर सह सके,

वो कला की खान हूं।

पुरुषत्व पर जो दंभ भर रहे, 

उनकी दुर्बलता की पहचान हूँ।

 

अंधेरी रातों में उठती, 

हैवानियत की आवाज हूं।

औछी सोच के बीच पनपे,

बदलाव का आगाज हूं।

 

मत पूछ कि मैं कौन हूं, 

टूटे दिलो का देष हूं।

न समझना किसी से कम मुझे,

ना हि सर्वश्रेष्ठ हूं।।

 

आम इंसान हि तुम समझो मुझ,

बस सम्मान की हकदार हूं।

खत्म कर दो अब इस खेल को,

बाटे जो मन के प्रेम को।

 

बेटा है कुल की शान तो,

मैं भी घर का अभिमान हूं।

बेटा नहीं हूं घर का मैं,

ना बेटे जैसा बनना चाहती हूं।

 

हूं मैं एक बेटी और 

बस बेटी रहना चाहती हूं।

बस बेटी रहना चाहती हूं।

ज्योत्स्ना जोशी

 

 

बेटियाँ

Beti Par Kavita

 

लाड़ली हैं सबकी, घर की आन हैं।

बेटियाँ संसार का अभिमान हैं।।

 

त्याग,करुणा, कर्म,धीरज के वसन।

बेटियों के दीप्ति का परिधान हैं।।

 

चाँद तारों को गगन को छू रही।

बेटियाँ हिंदोस्ताँ की शान हैं।।

 

राष्ट्र की प्रहरी सजग बाँधे कफन।

बेटियाँ होने चली बलिदान हैं।।

 

मान मर्यादाओं की चूनर पहन।

बेटियाँ माँ-बाप की मुस्कान हैं।।

तामेश्वर शुक्ल ‘तारक’

 

 

बेटियाँ

Poem On Beti In Hindi

 

गुलाब सी कोमल होती है बेटियाँ

बाबुल के घर की रौनक होती है बेटियाँ

 

चिड़ियों सी चहकती है बेटियाँ

पूरे घर को महकाती है बेटियाँ

 

माँ के दर्द पर मरहम लगाती है बेटियाँ

पिता का माथा जो सहलाये वो होती है बेटियाँ

 

छोटे भाइयों बहन के लिए,

माँ का स्वरुप होती है बेटियाँ

 

लक्ष्मी का स्वरुप होती है बेटियाँ

फिर क्यों पराया धन होती है बेटियाँ

 

पल में दहलीज पार कर जाती है बेटियाँ

चुटकी भर सिंदूर मिलते ही,

क्यों बदल जाती है बेटियाँ

 

बेटी से बहू, बिन्दनी बन जाती है बेटियाँ

आज्ञाकारी बहू बन जाती है बेटियाँ

 

मायके से सासरे का सफर पल में,

पार कर जाती है बेटियाँ

 

आँखों का नूर थी जो बेटियाँ

आज साजन का घर महकाती है बेटियाँ

 

माता पिता का नाम रोशन करती बेटियाँ

अपने संस्कारों से प्रेरित सब को करती बेटियाँ

 

घर, बाहर दो नाव की सवारी करती बेटियाँ

बेटियों के बिन घर आंगन सूना

 

घर से ही महकती है बगिया

चार दीवारी को घर बनती है बेटियाँ

 

जीवन के अंतिम सांस तक सब की

खुशी की कामना जो करें वो है।

मोना चोपड़ा नाभा

 

बेटी

Poem On Daughter In Hindi

 

हर इंसान के वास्ते सम्मान है बेटी ।

सबके दिलों का दुनिया में अरमान है बेटी।

 

इंसान के जीवन का खजाना यही तो है ।

ममता का मोहब्बत का तराना यही तो है।

 

और सब के घर आंगन की शान है बेटी

सबके दिलों का दुनिया में अरमान है बेटी।।

 

इस पर ना करो जुल्म ये मासूम बहुत है।

इसको ना तुम जलाओ यह मासूम बहुत है।

 

ईश्वर का इस जमीन पर वरदान है बेटी।

सबके दिलों का दुनिया में अरमान है बेटी।।

 

ये बेटियां हमारी तो बेटों से कम नहीं

माता-पिता के वास्ते सम्मान से कम नहीं।

 

बेटा अगर फूल तो गुलदान है बेटी ।

सबके दिलों का दुनिया में अरमान है बेटी ।।

 

आवाज़ जब भी बेटों को अपने लगाएंगे,

आएगी पहले बेटी।

अपने बड़ों की सेवा में कुर्बान है बेटी ।

 

हां यह बिल्कुल सच है ,

घर समाज और देश ही नहीं,

पूरे संसार के लिए मिसाल है बेटी।

 

क्या आप सब मेरे साथ कहेंगे ?

सबके दिलों का दुनिया में अरमान है बेटी।।

कविता कुसुमाकर

 

मोती का सागर है बिटिया

Beti Par Kavita

 

हर पल सुख सागर है बिटिया।

ममता की गागर है बिटिया ।।

 

माँ का गौरव मान पिता का ।

घर का भी आदर है बिटिया ।।

 

घर को खुशियों से भर देती ।

मोती का सागर है बिटिया ।।

 

घर की रौनक घर की बरकत।

घर में नटनागर है बिटिया ।।

 

रहती घर वालों के मन में ।

दिल से कब बाहर है बिटिया ।।

 

नफरत की इस दुनिया में अब।

प्रेम भरे आखर है बिटिया ।।

 

मात पिता का मान बढ़ाती ।

ऊँचा करती सर है बिटिया ।।

 

उस घर रहता अपनापन है ।

जिन लोगों के घर है बिटिया ।।

 

किस्मत वालों के घर आती ।

धन्य नलिन पाकर है बिटिया ।।

नलिन खोईवाल

 

 

भारत की बेटी

Poem On Daughter

 

पढ़ रही हूँ बढ़ रही हूँ

नभ तक जाऊंगी,

आसमान के सारे तारे

तोड़कर लाऊंगी।

 

वीर बनूं में धीर बनूं,

कुछ कर दिखलाऊंगी,

भारत की बेटी हूं,

जग में नाम कमाऊंगी।

 

मुझको चिड़िया मत समझो,

जो बंद रहे पिंजरे में,

कठपुतली न समझो,

जो नाचूंगी मैं उंगली में।

 

रंग-बिरंगी तितली हूँ मैं,

बस उड़ते ही जाऊंगी,

भारत की बेटी हूं मैं,

जग में नाम कमाऊंगी।

 

चित्रकार बन चित्र बनाऊं,

मैं झांसी की रानी के,

गीतकार बन गाथा गाऊं,

मैं तीलू रौतेली की।

 

अपने मन के सब सपने,

मैं सच कर दिखलाऊंगी,

भारत की बेटी हूं

जग में नाम कमाऊंगी।

 

टीचर, डॉक्टर बनूं मैं,

चाहे इंजीनियर बन जाऊं,

एस्ट्रोनट बन चांद और

मंगल पर भी मैं जाऊं।

 

सैनिक बनी तो दुश्मन को

मैं सबक सिखाऊंगी,

भारत की बेटी हूं

जग में नाम कमाऊंगी।

 

बछेदी दीदी को देखो,

पर्वत पर चढ़ बैठी,

ग्यारह वर्ष की राखी देखो,

बाघ से भी लड़ बैठी।

 

निडर बनूं में अपनी

रक्षा खुद कर पाऊंगी,

भारत की बेटी हूं

जग में नाम कमाऊंगी।

पूर्वाशी ध्यानी

 

 

बेटियां

Daughter Par Kavita

 

छोटी छोटी चीजों से

खुश हो जाती बेटियां

खिलते फूलों के जैसी

मुस्कुराती बेटियां

 

सुनकर भी नहीं है

समझते लोग जहां

बिन बोले हर बात

जान जाती बेटियां

 

उसकी चीज भूलो तो

ज़रा सा नाराज हुई

सॉरी बोलो तो झट से

मान जाती बेटियां

 

जाने लगती हैं स्कूल

बचपन में जब वो

किस्से दिनभर के वो

है सुनाती बेटियां

 

हर सामान रखती

बड़े ही सलीके से वो

घर पर मां सा हुक्म

है चलाती बेटियां

 

थक-हार कर शाम

घर लौटकर आओ

बड़े प्यार से सर को

सहलाती बेटियां

 

सब खरीदें सामान

अपनी जरूरत का

पापा के लिए खरीद

कुछ लाती बेटियां

 

कहीं और जन्म लेती

पलकर बड़ी होती

फिर किसी और की है

बन जाती बेटियां

 

खुशियों का खजाना है

जमाने में फिर भी तो

जाने कितनी कोख में

मर जाती बेटियां

सौरभ दीक्षित “मानस”

 

 

बेटी नहीं बोझ

Poem On Beti In Hindi

 

दो लड़की पहले ही घर में

बाबा हाथ उठाये

अबकी भगवन देना बेटा

बेटी घर न आये

 

लेकिन दाता ने दी बिटिया

मुस्काती इठलाती

कभी रूठती कभी मानती

तितली बन उठ जाती

 

पढ़ने में अव्वल बिटिया ने

हरदम बाजी मारी

बिटिया को लख हर्षित बाबा

बेटी नहीं बेचारी

 

अम्मा बाबा दोनों बूढे

बिटिया बनी सहारा

लड़की से घर, घर लगता है

बिटिया है जग सारा

 

सुता जन्म पर आखिर क्यों

आता है तुमको रोना

बेटी नहीं बोझ है जानो

वो है सच्चा सोना ।।

दीपा गुप्ता

 

बेटियां

Poem On Beti In Hindi

 

हम भारत की बेटियां

भारत का मान अभिमान हैं

हम ही धर्म और मजहब

हम बेटियां ही ईमान हैं।

 

हम ममता की मूरत

हम खूबसूरती की मिसाल

कई बार हम हैं बनी

युद्धों में सीमाओं की बल।

 

बस एक बेटे की चाह में

क्यों हमको मारा जा रहा

क्यों जिंदा ही आखिर

हमको दफनाया जा रहा।

 

हमने भी तो खायीं हैं

अपने सीने पर गोलियां

हमने भी तो बोली हैं

आजादी वाली बोलियां।

 

क्यों हमको देनी पड़ती है

हर समय अग्नि परीक्षा

क्यों हमको ही देनी पड़ती

हर एक कुर्बानी की शिक्षा।

श्वेता बिष्ट

 

 

बेटियाँ

Poem On Beti In Hindi

 

जिस घर में बेटियों की चाह होती है

भगवान का भी वहाँ वास होता है

 

दे जाती हैं खुशियाँ सौगातों में

थोड़ा सा प्यार साथ ले जाती हैं

 

हर दिन को त्यौहार सा

खुशनुमा बना जाती हैं

 

छोटी सी उम्र में बड़ी वो हो जाती हैं

पापा की परी, मम्मी की जान होती हैं

 

भाई के सारे राज अपने तक रखती हैं

ससुराल में बड़े दिल से

 

सबका ख्याल रखती हैं

फिर भी क्यूँ ये बेटियों

 

पराये घर की लगती हैं

थोड़े से प्रेम थोड़े से सम्मान के लिए

 

ये रात दिन एक करती हैं

फिर क्यूं दहेज के नाम ये बलि चढ़ती हैं

 

कोई तो इनके मन की व्यथा को समझो

थोड़े अपनेपन से इनका आंचल भर दो।

रीना अग्रवाल

 

 

बेटी

Poem On Daughter In Hindi

 

भूल जाओ ना तुम बेटी को

वह ईश्वररुप करुणामयी को

 

जल सी तरल

अग्नि प्रज्ज्वल

मिट्टी की सोंध

पुष्प सी सरल

 

जब लौटे तुम थक हार कभी

ले आयी भाग लोटे में जल

देख उसके ममतामयी नयन

सच बोलो

 

ना बहता प्रेम अविरल?

फिर क्यों सोचो वह पढ़े नहीं

 

कुछ करे ना

आगे बढ़े कहीं

उसकी कोमल हथेली पर

 

तुम प्रेम सजा कर दो

उसको रसोई की कलछी नहीं

उसको कलम तुम लाकर दो

 

फिर देखो बेटी भी

बेटे सा बल तुम्हें देगी

 

पीढ़ी नहीं

पूरे कुल को

वह नतमस्तक ना होने देगी।

श्यामली वाजपेई

 

 

 

बेटियाँ

Poem On Beti In Hindi

 

परमात्मा के घर से

खुशियों का पैगाम

है बेटियाँ।

घर में दिल-ए-अज़ीज़

होती है बेटियाँ।।

 

जाने किस देश से,

परियों के वेश में

आती है बेटियाँ।

बड़े नसीब वाले होते है,

जिनके घर पैदा

होती है बेटियाँ।

परमात्मा के घर से..।

 

ईश्वर भाग्यशाली

माँ बाप को,

अनुपम सौगात में

देती है बेटियाँ।

 

परिवार का नाम

रोशन हो,

ऐसा काज निज

करती है बेटियाँ।

परमात्मा के घर से..।

 

कभी पिता की बेटी

कभी भाई की बहिन,

कभी पति की भार्या

कभी ममता की सूरत

होती है बेटियाँ।

परमात्मा के घर से..।

 

कभी सुरस्वती,

वैष्णवी गायत्री।

कभी काली सी,

दुर्गा सावित्री ।

श्रद्धा और संस्कार

होती है बेटियाँ।

परमात्मा के घर से..।

महेन्द्र सिंह कटारिया

 

 

चोटियाँ चढ़ेगी बेटियाँ

Beti Par Poem

 

पढ़ने दो, इनको पढ़ने दो,

पढ़-लिख कर आगे बढ़ने दो,

अगर पढ़ी ये, तभी बढ़ेगी बेटियाँ !

नई-नई चोटियाँ चढ़ेगी बेटियाँ !

 

ये हैं करुणा, ये हैं ममता,

और त्याग का यही रूप हैं,

गर्मी में हैं शीतल छाया,

सर्दी की गुनगुनी धूप हैं,

 

इन्हें सहेजो, इन्हें सराहो,

दिल की गहराई से चाहो,

हर मुश्किल से तभी लड़ेंगी बेटियाँ !

नई-नई चोटियाँ चढ़ेगी बेटियाँ !

 

पैदा होने दो, मत मारो,

आने दो, जग में आने दो

इनके प्रति हालात सुधारो

गीत जिन्दगी के गाने दो,

 

मानो, इनकी क्षमता मानो,

इनकी प्रतिभा को पहचानो,

बुलन्दियों पर रत्न जड़ेंगी बेटियाँ !

नई-नई चोटियाँ चढ़ेगी बेटियाँ !

 

बेटी से सारे उत्सव हैं,

बेटी से ही सब खुशियाँ हैं

बेटी से घर-आँगन चहके,

बेटी जन्नत की परियाँ हैं,

 

इन्हें प्यार दो, इन्हें मान दो,

इनके सपनों को उड़ान दो,

राह प्रगति की तब पकड़ेंगी बेटियाँ

नई-नई चोटियाँ चढ़ेगी बेटियाँ

अशोक ‘अंजुम’

 

 

बेटियाॅं

Beti Kavita In Hindi

 

गुस्सा करता हूँ तो,

खामोशी से सिमट जाती हैं

प्यार करता हूँ तो

बाँहों में लिपट जाती हैं ।

 

बेटियाँ हैं तो देखकर ही

वो समझ जाती हैं

पूरे घर का ख्याल,

कितनी शिद्दत से करती हैं ।

 

मासूमियत भरी नजरें,

अपनों के लिए वो रखतीं हैं

और अपनी पर आ जाएँ तो,

झाँसी की रानी बन जाती हैं।

 

अपने छोटे बड़ों का खयाल,

वो खूब करतीं हैं

एक अजब सा सुकून

दिल को दे ही जाती हैं।

 

फिर भी बेटियाँ दूसरों की,

मेहमान समझी जाती हैं

और अपने ही घर में,

बेगानी सी समझी जाती हैं ।

 

जब तक वो रहती हैं,

आँगन की खुशियाँ बनी रहती हैं

रिश्तों में दिलों की दूरियों को,

हर दम मिटाया करती हैं।

 

घर छोटा हो या बड़ा ,

सब निभा लेती हैं

सबके दिए दर्दो को भी,

बेहिसाब सह लेती हैं।

कमलेश संजीदा

 

बेटियाँ

Poem On Daughter In Hindi

 

पराए घर को

अपना घर बनाने की

जद्दोजहद में जीवन भर

लगी रहती हैं बेटियाँ।

 

 

ससुराल में पराये घर से आई है

मायके में कल पराये घर जाना है

सुनते-सुनते

जीवन काट लेती हैं बेटियाँ।

 

 

नजरों के उल्कापात झेलती

सलीके और संस्कारों की बातें सुनती

उलझे सपने सुलझातीं

लक्ष्मण रेखाओं में

बँधी रहती हैं बेटियाँ।

 

 

पिता की राजकुमारी

भाई की दुलारी

माँ की आँख का तारा

फिर भी सलीब पर

चढ़ी रहती हैं बेटियाँ।

 

 

सबके गुनाह अपने सिर ले

मौन, निस्पंद, होंठों में सिसकती

पलकों में आँसू रोकती

अपने पाँव पर खड़े होने की कोशिश करती

आँख की किरकिरी

बन जाती हैं बेटियाँ।

 

 

उनके जिस्म पर कुछ अपने

सेंक लेते हैं राजनीति की रोटियां

बेटी से देह बनी

जल जाती हैं बेटियाँ।

 

 

देह के सौदागर

बेच लेते हैं राख भी

मगरमच्छी आँसू बहा

अस्मिता का सौदा करते हैं

इस प्रकार बिक जाती हैं बेटियाँ।

सुधा गोयल

 

 

बेटी

Emotional Poem On Daughter In Hindi

 

बेटी के,

सम्भलने से पहले,

उसे पराया धन कहा गया।

 

उसके पढ़ने और

आगे बढ़ने से पहले,

उसकी शादी की चिन्ता हो गई,

तुरन्त वर देखा और

शादी कर दी गई।

 

उसके कुछ बोलने से पहले,

उसकी आवाज बन्द कर दी गई।

 

पिता के आँगन की

खुशियाँ बनने से पहले,

ससुर के आंगन का

बोझ बना दी गई।

 

सुहागरात मनाने से पहले,

उसे दहेज में तोल दी गई।

 

पल भर मुस्कुराने से पहले,

जहर भरी बोली बोल दी गई।

 

स्टोव जलाने से पहले,

उसे जला कर फूक दी गई।

 

‘पृथ्वी’ तेरा इंसान जागने से पहले,

उसे हमेशा की नींद सुला दी गयी।

पृथ्वीसिंह बैनीवाल बिश्नोई

 

 

 

बेटी देश की शान

Beti Par Kavita In Hindi

 

बेटी हूँ मैं बेटी हूँ, 

बेटी हूँ कोई ओर नहीं,

बेटी हूँ मैं बेटी हूँ, 

बेटी हूँ कमजोर नहीं।

 

पढ-लिखकर जीवन में, 

रोशन कर दूं जग को,

फूल बिछा दूँ पलकों के, 

जग-मग कर दूं जग को।

 

ज्योति से ज्योति जला, 

सबको मार्ग दिखलाती हूँ,

राह में पत्थर आए तो, 

मैं रत्न उन्हें बनाती हूँ।

 

रात को न रात कहूँ, 

रात को भी दिन बनाती हूँ,

कर्तव्य-पथ गमन कर, 

जीवन उन्नत बनाती हूँ।

 

दो परिवार पढ़ाकर मैं, 

जीवन सफल बनाती हूँ,

तप-साधना-संयम से, 

लक्ष्य तक बढ़ जाती हूँ।

 

न हारती न हारने देती, 

ऐसे कदम बढ़ाती हूँ,

स्वाभिमान का जीवन जीती, 

फिर भी झुक जाती हूँ।

 

सुख-दुख में समान रहती, 

मंजिल पाकर न इतराती,

सबका पेट भरकर मैं, 

भूखी भी रह जाती।

 

घर की रोशन दीपक हूँ, 

करती हूँ मैं उजियारा,

जब मैं ठान लेती हूँ, 

तो मुट्ठी में है लक्ष्य सारा।

 

बेटी हूँ कोई और नहीं, 

पूरे करूँगी सबके अरमान,

नादान हूँ कमजोर नहीं, 

नाप लूंगी महि आसमान,

 

गर्भ में हूँ पर जोर नहीं, 

नहीं हूँ मैं अनजान,

लड़की होना पाप नहीं, 

समझ ले ऐ इंसान।

 

शान्ति बन दिखलाऊँगी मैं, 

करूँगी जीवन कुर्बान,

मैं किसी से कम नहीं, 

बनाऊँगी भारत महान।

 

रक्षक रहो, भक्षक नहीं, 

लड़का-लड़की दोनों समान,

मैं न रही तो तुम न बचोगे, 

या इसका नहीं है ध्यान।

महीपाल सिंह ‘खरडिया’

 

 

बेटियां

Poem On Daughter In Hindi

 

चाहत बेटों की बहुत

उम्मीद पे खरी उतरती हैं बेटियां

 

गड्डियां बेटों पे वारते

तमगे जीतकर लाती हैं बेटियां

 

सूरज-चंदा बोलते हैं बेटों को

उजाला फैलाती हैं बेटियां

 

खुला आसमां मिलता बेटों को

पंख फैलाती हैं बेटियां

 

लक्ष्मण रेखा को चीर, 

सात जहां को जीत

बाजी मारती हैं बेटियां।

नीतू अग्रवाल

 

 

बेटी

Poem On Daughter In Hindi

 

हर माँ का प्रतिबिंब है बेटी, 

शीतल सम पुरवाई है।

 

बेटी है तो रुंझुन पायल, 

बेटी से शहनाई है।

 

गुड़िया गुड्डे खेले है जिससे, 

पकला बेलन बर्तन हैं।

 

बिन बेटी वो हर घर सूना, 

मुरझाए मन से (दर्पण) है।

 

लाख सजा लो घर को अपने, 

त्योहारों और तीजों में।

 

बिन बेटी रौनक ना कोई,

लाखों की भी चीजों में।

 

है रब की रहमत ये बेटी, 

बेटी से संसार है

 

लाखों में किरमत पाओ तो, 

मिलता ये उपहार है।

अर्चना पाण्डेय

 

बेटी नहीं पराया धन

Poem On Daughter In Hindi

 

बेटी पावन दुआएँ है,

माँ की आस है बेटी,

पापा का दुलार है बेटी,

जो आने अपर थकान उतार दे बेटी,

 

ऐसी भोली सी पहचान है बेटी,

बेटी न हो तो घर है सूना

घर की पहचान है बेटी,

हर रंग में रंगने वाली,

 

सबके दिलो की जान है बेटी,

फिर क्यों बेटी को न समझा जाता,

क्यों पैरों से रोंदी जाती बेटी,

क्यों उनका दर्द न समझा जाता,

 

जब होती है वो विदा घर से,

क्यों पापा का दिल भर जाता,

ससुराल में क्यों नहीं समझा जाता,

बेटी बहु बनते ही,

 

क्यों उनका मान न होता,

बेटी और बहु में क्या अंतर,

बेटी जब होती पापा के घर में,

तो माँ क्यों कहती बेटी है पराया धन,

 

बेटी कभी परायी न होती,

दोनों घर का मान है बेटी,

बेटी को न समझो कम,

सबका है मान है बेटी।।

गरिमा लखनवी

 

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