Top 7+ Best Poem On Bhagat Singh In Hindi | भगत सिंह पर कविता

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Poem On Bhagat Singh In Hindi :-Shahid Bhagat Singh Poem in Hindi शहीद भगत सिंह पर कविता हिंदी में, Heart Touching Poem For Bhagat Singh in Hindi

सरदार भगत सिंह का नाम आते ही खून में गर्मी सी आ जाती है। उनका जोश, पराक्रम और मातृभूमि के प्रति प्यार जो हमेशा हम लाखों नौजवानों को देश और अपनी मातृभूमि के प्रति कर्तव्य पालन पूरी निष्ठा करने की सीख देता है। क्रांतिकारी, देशभक्त सरदार भगत सिंह के शौर्य और पराक्रम का कोई जोड़ ना था। उनके कर्मों और बलिदान के ऊपर हम यहां पर भगत सिंह पर सुंदर कविता आपके साथ साझा कर रहे हैं।

 

Poem On Bhagat Singh In Hindi

 

निडर थे भगत सिंह

Poem On Shahid Bhagat Singh In Hindi

 

हँसते हँसते शूली पर चढ़ने वाले,

नज़र नहीं आते अब वैसे मतवाले।

स्वतंत्रता संग्राम के सच्चे सेनानी,

भगत सिंह थे फौलादी सीने वाले।

 

फिरंगियों से ऐसा जम कर युद्ध हुआ,

राजगुरु सुखदेव का सच्चा संग हुआ।

संसद में बम फेंक डरे न भागे वो,

देख वीरता उनकी दुश्मन दंग हुआ।

 

खुला किया विद्रोह ब्रिटिश साम्राज्य हिला,

आजादी की घुट्टी सबको दिया पिला।

युवकों के आदर्श निडर थे भगत सिंह,

सांडर्स को मारा गोरों को सबक मिला।

 

देश है अब आजाद स्वतंत्रता दिवस मनाएं,

वीर शहीदों को पर न कभी भुलाएं।

कायम रखना आजादी को हर कीमत पर,

प्रण कर लें जीवन भर ऐसा हम कर पायें।

-हरजीत निषाद

 

शहीद भगत सिंह

Poem On Shahid Bhagat Singh In Hindi

 

सुनो जम्बू के वीर लाल,

गाथा वर्णन एक भरत बाल।

रग-रग में जिसके इंकलाब,

जीवन जैसे क्रांति मशाल।

 

जननी जिसकी विद्यावती,

पिता सरदार किशन सिंह।

जन्मे 1907 में,

नाम पाया भगत सिंह।

 

बारह बरस में देख रक्तपात,

अपने ही परिवार का।

ठाना भगत ने लूँगा प्रतिशोध,

जलियाँवाला बाग का।

 

त्याग कर लड़कपन की अठखेलियाँ,

पोथी शुर-वीरों की पढ़ने लगा।

काटकर परतंत्रता की बेड़ियाँ,

आज़ादी का स्वप्न गढ़ने लगा।

 

पगड़ी बाँध, भर जोश हृदय में,

नौजवान काफिला उसने बनाया।

निराश हो चौरा-चौरी कांड से,

सशस्त्र क्रांति का मार्ग अपनाया।

 

क्षुब्ध हो लाला जी की हत्या से,

की प्रतिशोध की जंग शुरु।

संगठित किया क्रांति वीरों को,

प्रमुख जिनमें चंद्रशेखर और राजगुरु।

 

फेका बम असेम्बली में उस स्थान,

जहाँ न खड़ा था कोई इंसान।

जो स्वार्थ में बिक जाये वो देशभक्त नहीं,

जो डरकर भाग जाये ऐसा भगत सिंह नहीं।

 

कहकर बटुकेश्वर संग अपने पैर जमा दिए,

और इंकलाब जिंदाबाद, इंकलाब जिंदाबाद,

उद्धोष संग सारे पर्चे उड़ा दिए।

 

फिर आयी शाम तेईस की,

मार्च का था महीना।

सीने में भरकर जोश जोशीला,

चले जवान पहन बसंती चोला।

 

मौत का न था डर उनको,

भारतभूमि शीश चढ़ाने बढ़े चले।

फाँसी के फंदे को गले लगाने,

वतन के शहीदे आजम बढ़े चले।

-समीक्षा गायकवाड़

 

अमर शहीद भगतसिंह

Poem On Shahid Bhagat Singh In Hindi

 

भारत के हो तुम भगत वीर सपूत,

आज़ादी के कर्मनिष्ठ क्रांतिकारी।

समूल उखाड़े अंग्रेज रूपी लताएं,

चीखे फिरंगी गूंज उठी किलकारी।

 

लेकर बंदूक और बम गोले हाथों में,

जब चलते थे गलियों में बन शेर सदृश्य।

डर के मारे तितर-बितर होते थे गोरे,

चापलूस भेड़िये हो जाते थे अदृश्य।

 

थर-थर कांप-कांप कर भागे अंग्रेज,

उनकी रोम-रोम जय हिंद पुकार उठती।

फिर कभी ना लौट कर आएंगे हिंद में,

गोरी मेम रोकर अपने पति से कहती।

 

जब तक जिंदा है भगत, राज, सुखदेव,

तब तक जन पर दमन कर ना सकेगा।

मुर्दा जन मन अब जीवित हो चुका है,

बांधकर बोरिया बिस्तर इंग्लैंड भागेगा।

 

गांधी अहिंसा से अब काम न चलेगा,

भगत सिंह की हिंसा तुम अपना लो।

चुन-चुन कर मारो धारदार हथियार से,

दुल्हन रूपी मृत्यु को गले लगा लो।

-अशोक कुमार यादव